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Khel Shayari - Haar Ho Ya Jeet, Khel Jaari Hai

Zindagi ka khel aisa hai ki haarna bhi seekhna padta hai.

जीत-हार का हिसाब लगाए बिना बस एक बार खुलकर मैदान में उतर जाने का जज़्बा - यह शायरी ज़िंदगी और नसीब के इसी खेल को बड़ी सहजता से बयान करती है। दिल पर खेले गए इस खेल को Dil शायरी में और पढ़ें।

Khel Shayari - Haar Jeet Ka Naya Rang

ज़िन्दगी का खेल ही ऐसा है साहब,
हँसना भी ज़रूरी है और रोना भी !!

Zindagi Ka Khel Hi Aisa Hai Sahab,
Hasna Bhi Zaruri hai Aur Rona Bhi !!

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प्यार के लिए सच्चे दिल की तलाश होनी चाहिए,
धर्म का खेल राजनीती में तो चल ही रही है !!

Pyar Ke Liye Sache Dil Ki Talash Honi Chahiye,
Dharm Ka Khel Rajneeti Me To Chal Hi Rahi Hai !!

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हारूँ या जीतूं इससे फर्क नहीं पड़ता मुझे,
एक बार ये खेल मैं भी आजमाऊँगा !!

Haaru Ya Jitu Isse Fark Nahi Padta Mujhe,
Ek Bar Ye Khel Main Bhi Aazmaunga !!

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मैं शब्दों से खेलती हूँ हैरान होते हैं लोग,
करती हूँ हाले दिल बयान तो परेशान होते हैं लोग।

Main shabdon se khelatee hoon hairaan hote hain log,
Karatee hoon haale dil bayaan to pareshaan hote hain log.

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2 Line Shayari

शेर-ओ-सुखन क्या कोई बच्चों का खेल है?
जल जातीं हैं जवानियाँ लफ़्ज़ों की आग में।

Sher-o-sukhan kya koee bachchon ka khel hai?
Jal jaateen hain javaaniyaan lafzon kee aag mein.

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मत सुनो नाराजगी का सबब मुझसे,
कैसे-कैसे खेले हैं नसीब ने खेल मुझसे,
अब कैसे छिपाऊं अश्क इन आँखों में,
क्या बताऊँ क्या बिछड़ गया है मुझसे।

Mat Suno Narajagi Ka Sabab Mujhse,
Kaise-Kaise Khele Hain Naseeb Ne Khel Mujhse,
Ab Kaise Chhipaoon Ashq In Aankhon Mein,
Kya Bataoon Kya Bichhad Gaya Hai Mujhse.

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भूल जाऊं मैं तुम्हे, लोग मुझसे ये आसानी से कह देते हैं,
शायद खेल समझते हैं इश्क़ को वो, इसलिए इसे मुंह ज़ुबानी कह देते हैं।

Bhool jaoon main tumhe, log mujhase ye aasaanee se kah dete hain,
Shaayad khel samajhate hain ishq ko vo, isalie ise munh zubaanee kah dete hain.

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भूल जाऊं मैं तुम्हे, लोग मुझसे ये आसानी से कह देते हैं,
शायद खेल समझते हैं इश्क़ को वो, इसलिए इसे मुंह ज़ुबानी कह देते हैं।

Bhool jaoon main tumhe, log mujhase ye aasaanee se kah dete hain,
Shaayad khel samajhate hain ishq ko vo, isalie ise munh zubaanee kah dete hain.

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छू के देखा तो गर्म था माथा
धूप में खेलता रहा है चाँद !!

Chhoo ke dekha to garm tha maatha
Dhoop mein khelata raha hai chaand !!

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Dil Shayari

करोना के दौर में अपनी जान पर खेलकर
तुम्हारी जान बचा रहे है,
तुम अपने घरों में रहना
डॉक्टर अस्पताल जा रहे है.

Corona ke daur mein apni jaan par khelakar,
Tumhari jaan bacha rahe hai !!
Tum apne gharon mein rahana,
Doctar aspataal ja rahe hai !!

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एक ज़रा सी भूल खता बन गयी,
मेरी वफ़ा ही मेरी सजा बन गयी,
दिल लिया और खेल कर तोड़ दिया उसने,
हमारी जान गयी और उनकी अदा बन गयी।

Ek Zara Si Bhool Khata Ban Gayi,
Meri Wafa Hi Meri Saza Ban Gayi,
Dil Liya Aur Khel Kar Tod Diya Usne,
Hamari Jaan Gayi Aur Unki Adaa Ban Gayi.

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अजीब है महोब्बत का खेल,
जा मुझे नही खेलना,
रूठ कोई और जाता है
टूट कोई और जाता है।

Ajeeb Hai Mahobbat Ka Khel,
Ja Mujhe Nahi Khelna
Rooth Koi Aur Jaata Hai ,
Toot Koi Aur Jaata Hai.

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न मेरा दिल बुरा था ओर न उसमे कोई बुराई थी।
सब नसीब का खेल है बस क़िस्मत में जुदाई थी।।

Na mera dil bura tha or na usame koee buraee thee.
Sab naseeb ka khel hai bas qismat mein judaee thee..

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डॉक्टर और मरीज खेल रहे है होली,
सुई सी पिचकारी और रंग-बिरंगी गोली.

Doktar aur mareej khel rahe hai holee,
Suee see pichakaaree aur rang-birangee golee.

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Haar Shayari

ढाई लाख का लोन लेकर खेल ये खेला है,
यारों नजर ना लगाना, ये गरीब का ठेला है.

Dhaee laakh ka lon lekar khel ye khela hai,
Yaaron najar na lagaana, ye gareeb ka thela hai.

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खालीयो शिशा मे निशान रह जाला
टूटल दिल मे भी अरमान रह जाला
जवन खामोशी से गुजर जाला
उ दरिय़ा भी आपन दिल मे तूफान राखेला !!

Khaaleeyo shisha me nishaan rah jaala
Tootal dil me bhee aramaan rah jaala
Javan khaamoshee se gujar jaala
U dariya bhee aapan dil me toophaan raakhela !!

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तुम गढ़बंधन का खेल खेल रहे थे
और मोदी से उधर देश को लूटने वालों को पेल रहे थे !!

Tum gathabandhan ka khel khel rahe the
Aur Modi udhar desh ko lootne vaalon ko pel rahe the !!

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कुछ कह गए, कुछ सह गए कुछ कहते कहते रह गए...
मैं सही तुम गलत के खेल में न जाने कितने रिश्ते ढह गए...!!

Kuchh kah gae, kuchh sah gae kuchh kahate kahate rah gae...
Main sahee tum galat ke khel mein na jaane kitane rishte dhah gae...!!

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हाथ दफ्तर की फाइलों से उलझे रहे,
वक़्त उनकी ज़ुल्फों से खेलने का था...❤️

Haath daphtar kee phailon se ulajhe rahe,
Vaqt unakee zulphon se khelane ka tha...❤

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Ham Shayari

नहीं खेल ऐ 'दाग़' यारों से कह दो,
कि आती है उर्दू ज़बाँ आते आते !!

Nahin khel ai daag yaaron se kah do,
Ki aatee hai urdoo zabaan aate aate !!

Daagh Dehlvi

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Frequently Asked Questions

खेल शायरी में जिंदगी को कैसे परिभाषित किया गया है?
शायरी में लिखा है 'ज़िन्दगी का खेल ही ऐसा है साहब, हँसना भी ज़रूरी है और रोना भी।' यह जिंदगी को एक ऐसा खेल बताती है जिसमें खुशी और गम दोनों जरूरी हिस्से हैं।
राजनीति में धर्म के खेल पर कोई शायरी है?
हाँ, एक शायरी में लिखा है 'प्यार के लिए सच्चे दिल की तलाश होनी चाहिए, धर्म का खेल राजनीती में तो चल ही रही है।' यह राजनीति में धर्म के इस्तेमाल पर सामाजिक टिप्पणी करती है, साथ ही सच्चे प्यार की अहमियत भी जताती है।
हार-जीत की परवाह न करने वाली खेल शायरी कौन सी है?
शायरी में लिखा है 'हारूँ या जीतूं इससे फर्क नहीं पड़ता मुझे, एक बार ये खेल मैं भी आजमाऊँगा।' यह हार शायरी जैसे भाव में हिम्मत और जोखिम उठाने के जज़्बे को दिखाती है, नतीजे की परवाह किए बिना।
नसीब के खेल पर कोई भावुक शायरी है?
एक शायरी में लिखा है 'कैसे-कैसे खेले हैं नसीब ने खेल मुझसे, अब कैसे छिपाऊं अश्क इन आँखों में।' यह दिल शायरी जैसे गहरे दर्द में किस्मत की मार और बिछड़ने के गम को बयां करती है।
खेल शायरी में जीवन के कितने अलग-अलग पहलू छुए गए हैं?
इस कलेक्शन में खेल शब्द को जिंदगी के उतार-चढ़ाव, राजनीति, हिम्मत और नसीब जैसे कई पहलुओं से जोड़ा गया है, अक्सर छोटी 2 Line शायरी के रूप में। यह दिखाता है कि खेल यहाँ सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि जिंदगी का रूपक बनकर आता है।

कभी इश्क़ को मज़ाक समझ लिया जाता है तो कभी नसीब खुद खेल-खेल में सब कुछ बदल देता है - इसी हार-जीत के भाव को Haar और Ham शायरी में पढ़ें।