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Khwab Shayari - Jo Aankh Band Karke Bhi Dikhe

Neend na aaye toh bhi khwab peecha nahi chhodte.

जब आँखें बंद करते ही किसी का चेहरा सामने आ जाए तो वो सिर्फ नींद नहीं, एक पूरी दुनिया बन जाती है - khwab shayari इसी अनकही चाहत और उससे जुड़ी बेचैनी को बयान करती है। खुद से जुड़ी बातों के लिए Khud शायरी भी पढ़ें।

Khwab Shayari - Aankhon Mein Basi Chaahat

तुम हसीन हो, गुलाब जैसी हो
बहुत नाज़ुक हो ख़्वाब जैसी हो
होठों से लगाकर पी जाऊं तुम्हे
सर से पाँव तक शराब जैसी हो.

Tum hasin ho gulab jesi ho
bahut najuk ho khwab jesi ho
hontho se lagakar pi jaun tumhe
sar se pawan tak sharab jesi ho.

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ऊँचे आसमान से मेरी ज़मीन देख लो,
तुम ख्वाब आज कोई हसीं देख लो,
अगर आज़माना हैं ऐतबार को मेरे तो,
एक झूठ बोलो और मेरा यकीन देख लो।

Oonche aasamaan se meree zameen dekh lo,
Tum khvaab aaj koee haseen dekh lo,
Agar aazamaana hain aitabaar ko mere to,
Ek jhooth bolo aur mera yakeen dekh lo.

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दिल के दरिया में धड़कन की कश्ती है,
ख़्वाबों की दुनिया में यादों की बस्ती है,
मोहब्बत के बाजार में चाहत का सौदा है,
वफ़ा की कीमत से तो बेवफाई सस्ती है।

Dil ke dariya mein dhadakan kee kashtee hai,
Khvaabon kee duniya mein yaadon kee bastee hai !!
Mohabbat ke baajaar mein chaahat ka sauda hai,
Wafa kee keemat se to bevaphaee sastee hai !!

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आलस्य के खेत में जो ख़्वाबों के फसल बोता है,
वक्त की मार पड़ने पर वो अकेले में खूब रोता है.

Aalasy ke khet mein jo khvaabon ke phasal bota hai,
Vakt kee maar padane par vo akele mein khoob rota hai.

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Apne Shayari

किसान खेतों में अक्सर अपने ख़्वाबों को बोता है,
और बदले में भूख की फसल काटता है.

Kisaan kheton mein aksar apane khvaabon ko bota hai,
Aur badale mein bhookh kee phasal kaatata hai.

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आसां नही यहाँ किसी को खुद से जुदा कर पाना,
रूह सी निकलती है इस जिस्म से,
दूर जाने के ख्याल भर से ही,
आ भी जाओ मेरी आँखों के रू-ब-रू अब तुम,
कितना ख्वाबो में तुझे तलाश करूं।

Aasaan Nahin Yahan Kisi Ko Khud Se Juda Kar Paana,
Rooh Si Nikalati Hai Is Jism Se,
Door Jaane Ke Khyaal Bhar Se Hi,
Aa Bhi Jao Meri Aankhon Ke Roo-Ba-Ru Ab Tum,
Kitna Khwaabo Mein Tujhe Talaash Karun

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जाने कहाँ थे और चले थे कहाँ से हम,
बेदार हो गए किसी ख्वाब-ए-गिराँ से हम,
ऐ नौ-बहार-ए-नाज़ तेरी निकहतों की खैर,
दामन झटक के निकले तेरे गुलसिताँ से हम।
~ Ahmad Nadeem Qasimi

Jaane Kahan The Aur Chale The Kahaan Se Ham,
Bedaar Ho Gaye Kisi Khwaab-E-Giraan Se Ham,
Ai Nau-Bahaar-E-Naaz Teri Nikahaton Ki Khair,
Daaman Jhatak Ke Nikle Tere Gulsitaan Se Ham.

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कभी सपने को भी दिल से लगाया करो,
किसी के ख्वाबों में आया-जाया करो,
जब भी जी हो कि कोई तुम्हें भी मनाये,
बस हमें याद करके रूठ जाया करो।

Kabhi Sapne Ko Bhi Dil Se Lagaya Karo,
Kisi Ke Khwabon Mein Aaya-Jaaya Karo,
Jab Bhi Jee Ho Ki Koi Tumhen Bhi Manaye,
Bas Hamen Yaad Karke Rooth Jaya Karo.

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बिन बोले जो तुम कहते हो
बिन बोले ही वो सुन लूँ मैं,
भरके तुमको इन आँखों में
कुछ ख्वाब नए से बुन लूँ मैं।

Bin Bole Jo Tum Kahte Ho,
Bin Bole Hi Wo Sun Loon Main,
Bharke Tumko In Aankhon Mein,
Kuchh Khwaab Naye Se Bun Loon Main.

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Apno-par Shayari

तेरा ही नाम मेरी हर सांस में निकला,
तेरा अक्स मेरी गजल के आब में निकला,
तुझे भुलाने को जब किया खुदको बेसुध मैंने,
तेरा ख्वाब ही कम्बखत इस आँख में निकला ।

Tera hee naam meree har saans mein nikala,
Tera aks meree gajal ke aab mein nikala,
Tujhe bhulaane ko jab kiya khudako besudh mainne,
Tera khvaab hee kambakhat is aankh mein nikala .

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जब पास थे तो क्या कम दूरी थी।
तुम्हारा बहाना था या मजबूरी थी।
जिनसे नाउम्मीदी थी उन्होंने निभाया साथ,
मेरे ख्वाबों की ही हर रात बेनूरी थी।

Jab paas the to kya kam dooree thee.
Tumhaara bahaana tha ya majabooree thee.
Jinase naummeedee thee unhonne nibhaaya saath,
Mere khvaabon kee hee har raat benooree thee.

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मिजाज मस्ती का खुशहाल नया लाया है
सुहाने ख्वाब का कमाल नया लाया है !
दिलो को ख्वाहिशों को और हवा दे देना
तुम्हारे वास्ते यह साल नया आया है !

Mijaaj mastee ka khushahaal naya laaya hai,
Suhaane khvaab ka kamaal naya laaya hai !
Dilo ko khvaahishon ko aur hava de dena,
Tumhaare vaaste yah saal naya aaya hai !!

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बंद आँखों की हकीकत है देश में बेरोजगारी,
खुली आँखों का ख्वाब है नौकरी सरकारी.

Band aankhon kee hakeekat hai desh mein berojagaaree,
Khulee aankhon ka khvaab hai naukaree sarakaaree.

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ऐ ख़ुदा बस एक ख़्वाब सच्चा दे दे,
अबकी बरस मानसून अच्छा दे दे,

Ai khuda bas ek khvaab sachcha de de,
Abakee baras maanasoon achchha de de,

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Ham Shayari

किसानो से अब कहाँ वो मुलाकात करते हैं,
बस ऱोज नये ख्वाबो की बात करते हैं.

Kisaano se ab kahaan vo mulaakaat karate hain,
Bas roj naye khvaabo kee baat karate hain.

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नयी उम्मीदों से भरा यह नया साल मुबारक हो,
ख़ुशी की मस्तियों के यह चाल मुबारक हो।
तुम्हारे ख्वाब सभी इस बरस में पुरे हो
दुआएं दिल से तुम्हे, यह साल मुबारक हो।

Nayee ummeedon se bhara yah naya saal mubaarak ho,
Khushee kee mastiyon ke yah chaal mubaarak ho.
Tumhaare khvaab sabhee is baras mein pure ho
Duaen dil se tumhe, yah saal mubaarak ho.

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यही चेहरा यही आंखें यही रंगत निकले...
जब कोई ख्वाब तराशूं तेरी सूरत निकले...!!

Yahee chehara yahee aankhen yahee rangat nikale...
Jab koee khvaab taraashoon teree soorat nikale...!!

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ख्वाब नए बुनते है ख्याल गुजर जाते है...
कुछ जवाब ढूंढने में सवाल गुजर जाते है...!!

Khvaab nae bunate hai khyaal gujar jaate hai...
Kuchh javaab dhoondhane mein savaal gujar jaate hai...!!

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बड़ी मशरूफ रहती है आशिको की जिंदगी...
फुरसत में भी वो इश्क़ का ख्वाब बुनते रहते है...!!

Badee masharooph rahatee hai aashiko kee jindagee...
Phurasat mein bhee vo ishq ka khvaab bunate rahate hai...!!

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Khud Shayari

सोये थे सारे ख़्वाब, शहर के मचल गये
मुरझाये सारे फूल, गुलसितां के खिल गये
नेताजी हमें आपसे, उम्मीद है बड़ी
तकदीर थी हमारी, हमें आप मिल गये।

Soye the saare khvaab, shahar ke machal gaye
Murajhaaye saare phool, gulasitaan ke khil gaye
Netaajee hamen aapase, ummeed hai badee
Takadeer thee hamaaree, hamen aap mil gaye.

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Frequently Asked Questions

ख्वाब शायरी में मुख्य रूप से किस भाव को दर्शाया गया है?
यह टॉपिक ख़्वाब को कई रूपों में दिखाता है — कभी प्रिय की खूबसूरती की उपमा के रूप में, कभी बिछड़ने के बाद उसकी तलाश के रूप में, तो कभी जीवन के गहरे दार्शनिक भाव के रूप में, जहाँ ज़िंदगी खुद एक भारी ख़्वाब जैसी महसूस होती है।
"तुम हसीन हो, गुलाब जैसी हो...ख़्वाब जैसी हो" पंक्ति में प्रिय की तारीफ़ कैसे की गई है?
यह पंक्ति प्रिय की नज़ाकत और खूबसूरती को बेहद रूमानी अंदाज़ में बयां करती है — "तुम हसीन हो, गुलाब जैसी हो, बहुत नाज़ुक हो ख़्वाब जैसी हो, होठों से लगाकर पी जाऊं तुम्हे, सर से पाँव तक शराब जैसी हो." यहाँ ख़्वाब को नज़ाकत और खूबसूरती की पराकाष्ठा के तौर पर इस्तेमाल किया गया है।
"कितना ख्वाबो में तुझे तलाश करूं" पंक्ति में क्या भाव है?
यह पंक्ति बिछड़ने के बाद की तड़प को दर्शाती है — "आसां नही यहाँ किसी को खुद से जुदा कर पाना, रूह सी निकलती है इस जिस्म से, दूर जाने के ख्याल भर से ही, आ भी जाओ मेरी आँखों के रू-ब-रू अब तुम, कितना ख्वाबो में तुझे तलाश करूं।" यानी जब हकीकत में साथ नहीं मिलता, तो Khud को ख़्वाबों में ही उस तलाश से तसल्ली देनी पड़ती है।
"बेदार हो गए किसी ख्वाब-ए-गिराँ से हम" पंक्ति का क्या दार्शनिक भाव है?
यह पंक्ति उर्दू शायर अहमद नदीम क़ासमी की लिखी हुई है और जीवन की एक गहरी दार्शनिक सोच को दर्शाती है — "जाने कहाँ थे और चले थे कहाँ से हम, बेदार हो गए किसी ख्वाब-ए-गिराँ से हम, ऐ नौ-बहार-ए-नाज़ तेरी निकहतों की खैर, दामन झटक के निकले तेरे गुलसिताँ से हम।" यानी ज़िंदगी खुद एक भारी, गहरे ख़्वाब जैसी महसूस होती है, जिससे इंसान अचानक "जाग" उठता है और आगे बढ़ जाता है।
"कुछ ख्वाब नए से बुन लूँ मैं" पंक्ति में क्या भाव है?
यह पंक्ति खामोश, बिना कहे समझे जाने वाले गहरे रिश्ते की बात करती है — "बिन बोले जो तुम कहते हो, बिन बोले ही वो सुन लूँ मैं, भरके तुमको इन आँखों में, कुछ ख्वाब नए से बुन लूँ मैं।" यानी प्रिय की हर Khwahish को बिना कहे समझ लेना और उनकी मौजूदगी से नए ख़्वाब बुनना — यह चुप्पी में छुपे गहरे प्रेम का इज़हार है।

यह ख़्वाब कभी अपनों की यादों में बसते हैं तो कभी हम सब की साझा चाहत में, इसलिए Apne और Ham शायरी भी देखें।