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Berojagari Shayari

Bekaari ka dard bhi kabhi shayari mein has deta hai.

Berojagari shayari mein band aankhon ki hakikat bekaari hoti hai, jabki khuli aankhon ka khwaab hamesha sarkari naukri ka hota hai. Isi sangharsh mein Dukhiya shayari bhi padhein.

बेरोजगारी से मैं बेकार प्रिये,
तुम गंगा की निर्मल धार प्रिये,
कैसे बढ़ेगा अपना प्यार प्रिये,
हृदय में है हाहाकार प्रिये.

Berojagaaree se main bekaar priye,
Tum ganga kee nirmal dhaar priye,
Kaise badhega apana pyaar priye,
Hrday mein hai haahaakaar priye.

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अपने टूटे हुए सपनों को बहुत जोड़ा,
वक़्त और हालत ने मुझे बहुत तोड़ा,
बेरोजगारी इतने दिन तक साथ रही
मजबूरी में हमने लखनऊ छोड़ा।

Apane toote hue sapanon ko bahut joda,
Vaqt aur haalat ne mujhe bahut toda,
Berojagaaree itane din tak saath rahee
Majabooree mein hamane lakhanoo chhoda.

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मेरे गाँव में बेरोजगारी बढ़ रहा है,
हर कोई अब चुनाव लड़ रहा है.

Mere gaanv mein berojagaaree badh raha hai,
Har koee ab chunaav lad raha hai.

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बंद आँखों की हकीकत है देश में बेरोजगारी,
खुली आँखों का ख्वाब है नौकरी सरकारी.

Band aankhon kee hakeekat hai desh mein berojagaaree,
Khulee aankhon ka khvaab hai naukaree sarakaaree.

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Dukhiya Shayari

डियर मोटरों बेरोजगारी का आलम ये है
कि वकीलों को खुद ही केस करना पड़ रहा है !!

Diyar motaron berojagaaree ka aalam ye hai
Ki vakeelon ko khud hee kes karana pad raha hai !!

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Frequently Asked Questions

बेरोजगारी से बेकार होकर भी प्यार बढ़ाने की मजबूरी और हृदय में हाहाकार होने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"बेरोजगारी से मैं बेकार प्रिये, तुम गंगा की निर्मल धार प्रिये, कैसे बढ़ेगा अपना प्यार प्रिये, हृदय में है हाहाकार प्रिये." — यह शायरी बेरोजगारी की मार झेल रहे किसी प्रेमी के हृदय के हाहाकार और प्यार बढ़ाने की असमर्थता को बयां करती है।
टूटे हुए सपनों को जोड़ने और बेरोजगारी के चलते लखनऊ छोड़ने की मजबूरी बताने वाली शायरी कौन सी है?
"अपने टूटे हुए सपनों को बहुत जोड़ा, वक़्त और हालत ने मुझे बहुत तोड़ा, बेरोजगारी इतने दिन तक साथ रही मजबूरी में हमने लखनऊ छोड़ा।" — यह शायरी टूटे सपनों को जोड़ने की कोशिश और लंबे समय तक साथ रही बेरोजगारी के चलते लखनऊ छोड़ने की मजबूरी बताती है।
देश में बेरोजगारी की हकीकत और सरकारी नौकरी के ख्वाब की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"बंद आँखों की हकीकत है देश में बेरोजगारी, खुली आँखों का ख्वाब है नौकरी सरकारी." — यह शायरी कहती है कि बंद आँखों की हकीकत देश में बेरोजगारी है, जबकि खुली आँखों का ख्वाब सरकारी नौकरी पाना है।
गाँव में बढ़ती बेरोजगारी के चलते हर किसी के चुनाव लड़ने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"मेरे गाँव में बेरोजगारी बढ़ रहा है, हर कोई अब चुनाव लड़ रहा है." — यह शायरी बिना किसी पार्टी का नाम लिए एक सामाजिक विडंबना बताती है कि गाँव में बेरोजगारी बढ़ने के साथ अब हर कोई चुनाव लड़ रहा है।
Berojagari से जुड़ी और शायरी कहाँ पढ़ें?
आप Dukhiya, Kamjori और Samasya शायरी पढ़ सकते हैं।

Ek sher yahan majboori mein sheher chhodne ka dard bayaan karta hai, to doosra mazakiya andaaz mein vakeelon ko khud hi case karne ki naubat bata deta hai. Aage Kamjori aur Jua shayari bhi padhein.