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Ras Shayari - Kaashi Ka Adhyatmik Rang

Banaras ka har ghaat is ras shayari mein zinda ho utha hai.

गंगा किनारे की शाम, विश्वनाथ के दर्शन और मणिकर्णिका घाट का सच - ras shayari में यह पूरा बनारस अपनी अध्यात्मिक रंगत के साथ उतरा है, जहाँ हर सतर में एक गहरा रस छुपा है। छोटे अंदाज़ में ऐसी ही भावनाएं 2 Line में भी मिलेंगी।

मिलना इत्तेफाक था बिछड़ना नसीब था,
वो उतना ही दूर चला गया जितना वो करीब था,
हम उसको देखने के लिए तरसते रहे,
जिस शख्स की हथेली पे हमारा नसीब था।

Milna Ittefak Tha Bichhadna Naseeb Tha,
Woh Utna Hi Dur Chala Gaya Jitna Woh Kareeb Tha,
Hum Usko Dekhne Ke Liye Taraste Rahe.
Jis Shakhs Ki Hatheli Pe Humara Naseeb Tha.

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रख सको तो एक निशानी हैं हम,
भूल जाओ तो एक कहानी हैं हम,
ख़ुशी की धूप हो या हो ग़म के बादल,
दोनों में जो बरसें वो पानी हैं हम।

Rakh Sako Toh Ek Nishani Hain Hum,
Bhul Jao Toh Ek Kahani Hain Hum,
Khushi Ki Dhup Ho Ya Gam Ke Badal,
Dono Mein Jo Barse Wo Pani Hain Hum.

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कहीं फ़लक पे सरकती है सरसराती हुई
कहीं दिलों की फ़ज़ा में पतंग उड़ती है
-ज़फ़र इक़बाल

Kaheen falak pe sarakatee hai sarasaraatee huee
Kaheen dilon kee faza mein patang udatee hai
-zafar iqabaal

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तरसते थे जो मिलने को हमसे कभी,
आज वो क्यों मेरे साए से कतराते हैं,
हम भी वही हैं दिल भी वही है,
न जाने क्यों लोग बदल जाते हैं।

Taraste The Jo Milne Ko Humse Kabhi,
Aaj Woh Kyun Mere Saaye Se Katrate Hain,
Hum Bhi Wohi Hain Dil Bhi Wohi Hai,
Na Jaane Kyun Log Badal Jaate Hain.

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2 Line Shayari

गर्दिश-ए-दौरां, ज़माने की नज़र, आँखों की नींद,
कितने दुश्मन इक रस्म-ए-मोहब्बत से हो गये।

Gardish-e-Dauraan, Zamane Ki Najar, Aankhon Ki Neend,
Kitne Dushman Ek Rasm-e-Mohabbat Se Ho Gaye.

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जब मैं बनारस जाता हूँ
तो दो जगह जाना नहीं भूलता हूँ,
इक गंगा मैया का तट
दूसरा बाबा विश्वनाथ का पट…

Jab main banaaras jaata hoon
To do jagah jaana nahin bhoolata hoon,
Ik ganga maiya ka tat
Doosara baaba vishvanaath ka pat…

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जो बाबा विश्वनाथ के द्वार आता है,
आध्यात्म का आत्म सुख पाता है,
माँ गंगा की आरती को जिसने देखा
उसके दिल में इक बनारस बस जाता है.

Jo baaba vishvanaath ke dvaar aata hai,
Aadhyaatm ka aatm sukh paata hai,
Maan ganga kee aaratee ko jisane dekha
Usake dil mein ik banaaras bas jaata hai.

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महादेव के भक्तों को सत्य पर गुरूर हैं,
बनारस का प्रेम भी पूरी दुनिया में मशहूर है.

Mahaadev ke bhakton ko saty par guroor hain,
Banaaras ka prem bhee pooree duniya mein mashahoor hai.

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नासमझी में पत्थर समझा,
समझ आया तो पारस हो गया,
उसने गंगा-सा ऐसे छुआ मुझको
कि मेरा रोम-रोम बनारस हो गया.

Naasamajhee mein patthar samajha,
Samajh aaya to paaras ho gaya,
Usane ganga-sa aise chhua mujhako
Ki mera rom-rom banaaras ho gaya.

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Baras Shayari

बनारस का हर शाम इतना सुहाना लगे,
इसे भुलाने में कई सदियाँ कई जमाना लगे.

Banaaras ka har shaam itana suhaana lage,
Ise bhulaane mein kaee sadiyaan kaee jamaana lage.

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तुम्हें मैंने अपने दिल में
इस तरह से बसाया है,
जैसे गंगा किनारे भगवान शिव ने
दिव्य बनारस बसाया है.

Tumhen mainne apane dil mein
Is tarah se basaaya hai,
Jaise ganga kinaare bhagavaan shiv ne
Divy banaaras basaaya hai.

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बनारस में मणिकर्णिका घाट
जीवन के सत्य को 24 घंटे दिखाता है,
इस घाट पर कुछ देर बैठने मात्र से
ही आध्यात्म और सत्य का ज्ञान हो
जाता है.

Banaaras mein manikarnika ghaat
Jeevan ke saty ko 24 ghante dikhaata hai,
Is ghaat par kuchh der baithane maatr se
Hee aadhyaatm aur saty ka gyaan ho
Jaata hai.

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बनारस की शाम सबसे सुंदर होती है,
जब माँ गंगा की आरती शुरू होती है
तो मन मन्त्र मुग्ध हो जाता है और
हृदय में अध्यात्म जागृत हो जाता है.

Banaaras kee shaam sabase sundar hotee hai,
Jab maan ganga kee aaratee shuroo hotee hai
To man mantr mugdh ho jaata hai aur
Hrday mein adhyaatm jaagrt ho jaata hai.

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जीवन की सुधा अध्यात्म के रस में है,
स्वयं ही भगवान शिव बनारस में है.

Jeevan kee sudha adhyaatm ke ras mein hai,
Svayan hee bhagavaan shiv banaaras mein hai.

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Barsaat Shayari

माँ गंगा की आरती इस कदर मुझे भाया,
फिर फुर्सत निकालकर मैं बनारस आया.

Maan ganga kee aaratee is kadar mujhe bhaaya,
Phir phursat nikaalakar main banaaras aaya.

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बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद हो,
माँ गंगा का निर्मल पवित्र घाट हो,
पूरी दुनिया को मैं भूल जाऊं और
बनारस में मेरा भोला मुझे याद हो.

Baaba vishvanaath ka aasheervaad ho,
Maan ganga ka nirmal pavitr ghaat ho,
Pooree duniya ko main bhool jaoon aur
Banaaras mein mera bhola mujhe yaad ho.

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यहाँ बाबा विश्वनाथ का दरबार है,
यहाँ माँ गंगा की जय जयकार है,
अध्यात्म की नगरी बनारस को देखा
तो लगा यही तो जीवन का सार है.
चक्रधारी पांडेय

Yahaan baaba vishvanaath ka darabaar hai,
Yahaan maan ganga kee jay jayakaar hai,
Adhyaatm kee nagaree banaaras ko dekha
To laga yahee to jeevan ka saar hai.
Chakradhaaree paandey

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जिसने भी छुआ वो स्वर्ण हुआ,
सब कहे मुझे मैं पारस हूँ
मेरा जन्म महा श्मशान मगर
मैं जिन्दा शहर बनारस हूँ.
चंद्रशेखर गोस्वामी

Jisane bhee chhua vo svarn hua,
Sab kahe mujhe main paaras hoon
Mera janm maha shmashaan magar
Main jinda shahar banaaras hoon.
Chandrashekhar gosvaamee

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दिल मेरा बनारस सा है,
पर मिजाज लखनऊ सा है.

Dil mera banaaras sa hai,
Par mijaaj lakhanoo sa hai.

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Dil Shayari

मुझ पर करो सितम तो तरस मत खाना,
क्योकि खता मेरी है मोहब्बत मैंने की है।

Mujh Par Karo Sitam Toh Taras Mat Khana,
Kyunki Khata Meri Hai Mohabbat Maine Ki Hai.

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Frequently Asked Questions

बनारस जाकर गंगा तट और विश्वनाथ के दर्शन वाली शायरी में क्या भाव है?
एक शायरी में लिखा है, "जब मैं बनारस जाता हूँ तो दो जगह जाना नहीं भूलता हूँ, इक गंगा मैया का तट दूसरा बाबा विश्वनाथ का पट..." यह बनारस की उन दो सबसे अहम पहचानों - गंगा तट और बाबा विश्वनाथ के मंदिर - के प्रति गहरी श्रद्धा दिखाती है।
विश्वनाथ के द्वार आने से आध्यात्म का सुख पाने वाली शायरी क्या कहती है?
शेर कहता है, "जो बाबा विश्वनाथ के द्वार आता है, आध्यात्म का आत्म सुख पाता है, माँ गंगा की आरती को जिसने देखा उसके दिल में इक बनारस बस जाता है।" यह बनारस की आध्यात्मिक शक्ति को दिखाती है, जो एक बार वहाँ जाने वाले के दिल में हमेशा के लिए बस जाती है।
महादेव के भक्तों के सत्य पर गुरूर वाली शायरी का क्या मतलब है?
एक शायरी कहती है, "महादेव के भक्तों को सत्य पर गुरूर हैं, बनारस का प्रेम भी पूरी दुनिया में मशहूर है।" यह महादेव के भक्तों की सच्चाई पर टिके रहने की मज़बूती और बनारस के प्रति दुनिया भर में मशहूर प्रेम को दिखाती है।
पत्थर से पारस बनने वाली शायरी में गंगा का क्या असर बताया गया है?
शेर कहता है, "नासमझी में पत्थर समझा, समझ आया तो पारस हो गया, उसने गंगा-सा ऐसे छुआ मुझको कि मेरा रोम-रोम बनारस हो गया।" यह गंगा के स्पर्श के असर को इतना गहरा दिखाती है कि साधारण पत्थर जैसा व्यक्ति भी पारस यानी बहुमूल्य बन जाता है, हर पल में Dil से बनारस बस जाता है।
बनारस के प्रति श्रद्धा दिखाने वाली और शायरियाँ कहाँ मिलेंगी?
बनारस की इस श्रद्धा भरी शायरी के साथ-साथ बरसात और मौसम से जुड़े भाव के लिए Baras और Barsaat सेक्शन भी देखे जा सकते हैं, जहाँ प्रकृति और आस्था के मिले-जुले भाव मिलते हैं।

यही रस कभी सावन की बारिश में झलकता है तो कभी दिल की गहराई में, इसलिए Barsaat और Dil शायरी भी साथ पढ़ें।