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Tasalli Shayari

Do shabd tasalli ke, jo shehar bhar mein kam hi milte hain.

Tasalli shayari mein is shehar mein tasalli ke do shabd na milne ka dard chhupa hai, jahan log dil mein bhi dimaag lekar ghoomte nazar aate hain. Isi dard mein Dil shayari bhi padhein.

दो शब्द तसल्ली के नहीं मिलते इस शहर में,
लोग दिल में भी दिमाग लिए घूमते हैं।

Do Shabd Tasalli Ke Nahi Milte Is Shahar Mein,
Log Dil Mein Dimaag Liye Ghoomte Hain.

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भते हुए ख्वाबों से कह दो अब आया ना करे..
हम तन्हा तसल्ली से रहते है बेकार उलझाया ना
करे...

bite hue khwaabon se kah do ab aaya na kare.. hum tanha tasalli se rahate hai bekaar ulajhaaya na kare...

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तसल्ली से पढा होता तो समझ मे आ जाते हम
कुछ पन्ने बिना पढे ही पलट दिये है तुमने..

Tasallee se padha hota to samajh me aa jaate ham
Kuchh panne bina padhe hee palat diye hai tumane..

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Frequently Asked Questions

तसल्ली शायरी में मुख्य रूप से किस भावना को दर्शाया गया है?
यह टॉपिक उस दौर की बात करता है जब किसी को दिलासा देने वाले दो शब्द भी दुर्लभ हो जाते हैं। ऐसे में इंसान खुद को तसल्ली देकर अकेले ही आगे बढ़ना सीख लेता है। Ham टॉपिक की शायरी में भी यही आत्मनिर्भरता का भाव मिलता है।
"दो शब्द तसल्ली के नहीं मिलते इस शहर में" पंक्ति का क्या अर्थ है?
यह पंक्ति आज के भावनात्मक रूप से दूर होते रिश्तों पर व्यंग्य है — "दो शब्द तसल्ली के नहीं मिलते इस शहर में, लोग दिल में भी दिमाग लिए घूमते हैं।" यानी लोग अब दिल से नहीं, दिमाग से सोचकर रिश्ते निभाते हैं, इसलिए सच्ची तसल्ली मिलना मुश्किल हो गया है। यह भाव Dil और Dimaag दोनों टॉपिक से जुड़ता है।
"हम तन्हा तसल्ली से रहते है" पंक्ति में क्या भाव छुपा है?
यह पंक्ति टूटे हुए ख्वाबों से आगे बढ़ने की सीख देती है — "भते हुए ख्वाबों से कह दो अब आया ना करे.. हम तन्हा तसल्ली से रहते है बेकार उलझाया ना करे..." यानी अब अधूरे Khwab से दूरी बनाकर अकेले ही सुकून से जीना बेहतर लगता है।
"तसल्ली से पढा होता तो समझ मे आ जाते हम" पंक्ति किस अनुभव को बयां करती है?
यह पंक्ति गलतफहमी के दर्द को किताब के रूपक से बयां करती है — "तसल्ली से पढा होता तो समझ मे आ जाते हम, कुछ पन्ने बिना पढे ही पलट दिये है तुमने.." यानी अगर सामने वाले ने रिश्ते को धैर्य और तसल्ली से समझने की कोशिश की होती, तो गलतफहमियां पैदा ही न होतीं।

Ek sher yahan tanha rehkar bhi tasalli se jeene ka faisla dikhata hai, to doosra tasalli se na padhne par kuch panne bina padhe hi palat jaane ki shikayat karta hai. Aage Ham aur 2 Line shayari bhi padhein.