Ram Bhajan
Ram naam ki loot, bhakton ke bol mein ghuli.
Ram Bhajan mein Dashrath-nandan Ram ki mahima aur unke naam ki us shakti ka gungaan hai jise sant Kabir ne bhi apne pad mein saraaha. Isi bhakti mein Aarti bhi padhein.
आज राम नाम की बारात है, जनकपुर में उत्सव की रात है।
सजी हैं गलियाँ फूलों से, बजे शहनाई हर ओर है साथ है॥
सीता संग राम विवाह रचाए,
सारी अयोध्या आनंद मनाए।
आज राम नाम की बारात है, जनकपुर...
मेरे घट घट में राम बसत है, दुनिया देखन नाहीं।
नैना अंतर आव तू, मैं तुझ बिन रहा न जाई॥
पानी में मीन पियासी, मोहे सुन सुन आवे हांसी,
घर घर डोलूँ दीवानी, राम न मिले उदासी।
— संत कबीरदास...
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श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणं।
नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कंजारुणं॥
कंदर्प अगणित अमित छवि, नवनील नीरज सुंदरम्।
पटपीत मानहु तड़ित रुचि-शुचि, नौमि जनक सुतावरम्॥
— गोस्वामी तुलसीदास रचित यह भजन श्रीराम के सौंदर्य और करुणा...
रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम।
सीता राम सीता राम, भज प्यारे तू सीता राम॥
ईश्वर अल्लाह तेरो नाम, सबको सन्मति दे भगवान।
रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम॥
Durga Bhajan
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु, किरपा करि अपनायो॥
जनम जनम की पूँजी पाई, जग में सभी खोवायो।
खरचै न खूटे चोर न लूटे, दिन दिन बढ़त सवायो॥
— मीराबाई के इस पद में...
जय सियाराम जय जय सियाराम,
सीता राम सीता राम जय जय सियाराम।
अयोध्या के राजा हो तुम, जग के पालनहार,
भक्तों के दुःख हरते हो, करते बेड़ा पार।
जय सियाराम जय जय सियाराम॥
राम नाम की महिमा न्यारी, जपते जपते बेड़ा पार।
तुलसी कहें इस कलियुग में, राम नाम ही है आधार॥
वाल्मीकि ने उल्टा जपा, फिर भी हो गए ऋषि महान,
इतनी शक्ति है राम नाम में, करता है उद्धार।
राम नाम...
राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट।
अंत काल पछताओगे, जब प्राण जाएंगे छूट॥
सत्संग में यह बात बताई जाए,
नाम जपो जब तक सांस चले काया में।
राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट॥
जय जय राम, जय जय राम,
कीर्तन मंडली बोले जय जय राम।
ढोल मृदंग की धुन पे नाचें,
भक्ति के सागर में मन को बाँचें।
जय जय राम, जय जय राम॥
Hanuman Bhajan
निर्बल के बल राम, यही है भरोसा मेरा।
जब भी मुश्किल आए जीवन में, तू ही है सहारा मेरा॥
कमजोर का साथी बनता है प्रभु,
हर मुश्किल में देता है हाथ।
निर्बल के बल राम, यही है भरोसा मेरा॥
आरती श्री रामचंद्र जी की, दशरथ के घर जन्मे जो प्यारे।
कौशल्या के नंदन कहलाए, अवध के राजा सबसे न्यारे॥
रतन सिंहासन बैठे राम,
लखन बैठे हनुमत धाम।
आरती श्री रामचंद्र जी की, दशरथ के घर जन्मे जो प्यारे॥
