Mere Ghat Ghat Mein Ram Basat Hai (Kabir Bhajan)
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मेरे घट घट में राम बसत है, दुनिया देखन नाहीं।
नैना अंतर आव तू, मैं तुझ बिन रहा न जाई॥
पानी में मीन पियासी, मोहे सुन सुन आवे हांसी,
घर घर डोलूँ दीवानी, राम न मिले उदासी।
— संत कबीरदास के इस पद में राम के सर्वव्यापी स्वरूप का वर्णन है।
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मेरे घट घट में राम बसत है, दुनिया देखन नाहीं।
नैना अंतर आव तू, मैं तुझ बिन रहा न जाई॥
पानी में मीन पियासी, मोहे सुन सुन आवे हांसी,
घर घर डोलूँ दीवानी, राम न मिले उदासी।
— संत कबीरदास के इस पद में राम के सर्वव्यापी स्वरूप का वर्णन है।
