उर्दू गज़लें
ज़बान की गहराई, जज़्बात की नज़ाकत
उर्दू ज़बान की गज़लें अपनी लफ़्ज़ी नज़ाकत और गहरे जज़्बात के लिए जानी जाती हैं, जहाँ हर शेर में सदियों पुरानी अदबी परंपरा झलकती है। अगर आपको उर्दू का यह अंदाज़ पसंद है तो हमारी Quotes भी ज़रूर पढ़ें।
न था कुछ तो ख़ुदा था, कुछ न होता तो ख़ुदा होता,
डुबोया मुझ को होने ने, न होता मैं तो क्या होता।
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वो जो हम में तुम में क़रार था, तुम्हें याद हो कि न याद हो,
वही यानी वादा निबाह का, तुम्हें याद हो कि न याद हो।
Classic Ghazals
Faiz Ghazals
हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले,
बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले।
