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फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की गज़लें

मोहब्बत और फ़लसफ़े की शायरी

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ को उर्दू अदब के सबसे मोहब्बत भरे और फ़लसफ़ाना शायरों में गिना जाता है, जिनकी गज़लें दर्द और उम्मीद के बीच एक नाज़ुक संतुलन बनाती हैं। उनकी शायरी की जड़ों को समझने के लिए हमारी Urdu गज़लें भी देखें।

10

गुलों में रंग भरे, बाद-ए-नौबहार चले,
चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले।

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9

बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे,
बोल ज़बाँ अब तक तेरी है।

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8

हम देखेंगे,
लाज़िम है कि हम भी देखेंगे।

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7

मुझसे पहली सी मोहब्बत मेरे महबूब न माँग,
मैंने समझा था कि तू है तो दरख़शाँ है हयात।

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Classic Ghazals

6

दिल ना-उम्मीद तो नहीं, नाकाम ही तो है,
लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है।

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5

और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा,
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा।

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4

रात यूँ दिल में तेरी खोई हुई याद आई,
जैसे वीराने में चुपके से बहार आ जाए।

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उनकी सबसे मशहूर रचनाओं में गिनी जाने वाली एक ग़ज़ल में मोहब्बत के गुज़र जाने के बाद भी उम्मीद ज़िंदा रखने की बात कही गई है, जो आज भी उतनी ही असरदार लगती है। क्लासिक अंदाज़ की और गज़लों के लिए Classic पर भी जाएं।