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क्लासिक गज़लें

पुरानी शायरी का कालातीत जादू

क्लासिक गज़लें पुराने दौर की उस शायरी को ज़िंदा रखती हैं जिसमें हर शेर बरसों के तजुर्बे और गहरी सोच से गढ़ा गया लगता है। पारंपरिक अंदाज़ पसंद करने वालों के लिए हमारी Quotes का संग्रह भी देखने लायक है।

बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मेरे आगे,
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे।

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रात यूँ दिल में तेरी खोई हुई याद आई,
जैसे वीराने में चुपके से बहार आ जाए।

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Popular Ghazals Topics for You.

दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है,
मिल जाए तो मिट्टी है खो जाए तो सोना है।

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तुम मेरे पास होते हो गोया,
जब कोई दूसरा नहीं होता।

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Faiz Ghazals

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है,
तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तगू क्या है।

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और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा,
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा।

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हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी,
जिसको भी देखना हो कई बार देखना।

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उम्र-ए-दराज़ माँग कर लाए थे चार दिन,
दो आरज़ू में कट गए दो इंतज़ार में।

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हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले,
बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले।

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Hindi Ghazals

दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है,
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है।

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इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब',
कि लगाए न लगे और बुझाए न बने।

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रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल,
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है।

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ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता,
अगर और जीते रहते यही इंतज़ार होता।

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गुलों में रंग भरे, बाद-ए-नौबहार चले,
चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले।

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Love Ghazals

बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे,
बोल ज़बाँ अब तक तेरी है।

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हम देखेंगे,
लाज़िम है कि हम भी देखेंगे।

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मुझसे पहली सी मोहब्बत मेरे महबूब न माँग,
मैंने समझा था कि तू है तो दरख़शाँ है हयात।

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दिल ना-उम्मीद तो नहीं, नाकाम ही तो है,
लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है।

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अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें,
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें।

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Modern Ghazals

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं,
सो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं।

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Frequently Asked Questions

What kind of ghazals are featured in this Classic collection?
This collection gathers traditional-style Urdu ghazal couplets built around life's brevity, exile from one's homeland, and love's failed remedies, written in the dense classical diction of words like "तदबीरें" and "आलम-ए-नापायदार".
Why do readers search for Classic ghazals specifically?
Readers look for "classic" ghazals when they want the older, literary register of Urdu poetry rather than a modern rewrite — the kind of vocabulary and imagery also found in Quotes from the same era.
Is there anything distinctive in these particular couplets?
One couplet describes being dazzled into losing oneself and parting even from one's own self ("दिखाई दिए यूँ कि बेख़ुद किया") — a classic ghazal image of self-negation. Readers drawn to this tone often move on to the poet-specific Faiz collection.

इंतज़ार, बेबसी और ज़िंदगी की नश्वरता जैसे विषयों पर लिखी ये गज़लें आज भी उतनी ही असरदार लगती हैं जितनी बरसों पहले लगती थीं। Faiz की गज़लों में भी यही क्लासिक गहराई मिलेगी।