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क्लासिक गज़लें

पुरानी शायरी का कालातीत जादू

क्लासिक गज़लें पुराने दौर की उस शायरी को ज़िंदा रखती हैं जिसमें हर शेर बरसों के तजुर्बे और गहरी सोच से गढ़ा गया लगता है। पारंपरिक अंदाज़ पसंद करने वालों के लिए हमारी Quotes का संग्रह भी देखने लायक है।

10

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले,
बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले।

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9

दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है,
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है।

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8

इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब',
कि लगाए न लगे और बुझाए न बने।

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7

रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल,
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है।

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Faiz Ghazals

6

ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता,
अगर और जीते रहते यही इंतज़ार होता।

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5

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है,
तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तगू क्या है।

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4

बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मेरे आगे,
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे।

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3

गुलों में रंग भरे, बाद-ए-नौबहार चले,
चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले।

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2

बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे,
बोल ज़बाँ अब तक तेरी है।

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Hindi Ghazals

1

हम देखेंगे,
लाज़िम है कि हम भी देखेंगे।

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इंतज़ार, बेबसी और ज़िंदगी की नश्वरता जैसे विषयों पर लिखी ये गज़लें आज भी उतनी ही असरदार लगती हैं जितनी बरसों पहले लगती थीं। Faiz की गज़लों में भी यही क्लासिक गहराई मिलेगी।