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मॉडर्न गज़लें

पुराने अंदाज़ में आज की बात

सुकून, सब्र और सच्चाई जैसे पुराने विषयों को आज के लहजे में कहने की कोशिश करती हैं मॉडर्न गज़लें, जो पारंपरिक और समकालीन शायरी के बीच का पुल बनती हैं। पुराने अंदाज़ के लिए हमारी Classic गज़लें भी देखें।

10

स्क्रीन पे दिखते हो हर पल, फिर भी दूर लगते हो,
डिजिटल दुनिया में अपनापन कम होता जाता है।

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9

शहर की भागदौड़ में सुकून कहीं खो गया है,
हर कोई बस अपनी मंज़िल में खोया हुआ है।

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Popular Ghazals Topics for You.

8

वीडियो कॉल पे गुडनाइट कहना भी इक रस्म बन गई है,
दूरियों ने भी हमें थोड़ा डिजिटल बना दिया है।

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7

मीटिंग्स और डेडलाइन्स में ज़िंदगी उलझी है,
फिर भी इक मुस्कान से सब कुछ सुलझ जाती है।

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Classic Ghazals

6

स्क्रीन के पीछे भी दिल धड़कते हैं किसी के लिए,
मोहब्बत अब डिजिटल राहों से भी गुज़रती है।

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5

ट्रैफिक सिग्नल पे रुके रुके ख़याल आते हैं,
ज़िंदगी भी कभी कभी यूँही थम जाती है।

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4

कॉफ़ी शॉप में अजनबी भी अपने से लगते हैं,
शहर की तन्हाई में सब साथी से लगते हैं।

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3

ख़ामोशी भी कभी कभी बहुत कुछ कह जाती है,
बिन बोले भी हर बात समझ आ जाती है।

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2

टूटे हुए भी मुस्कुरा देते हैं हम,
यही तो हुनर है ज़िंदगी जीने का हम में।

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Hindi Ghazals

1

ख़्वाब कभी सोने नहीं देते रात भर,
मंज़िल की तलाश में जागते हैं उम्र भर।

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मंज़िल की तलाश और ख़्वाबों की उड़ान पर लिखी ये गज़लें आज की पीढ़ी की सोच से मेल खाती हैं। हिंदी में और रचनाएं पढ़ने के लिए Hindi गज़लें भी पढ़ें।