Dil Na-Ummeed To Nahi — Faiz
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दिल ना-उम्मीद तो नहीं, नाकाम ही तो है,
लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है।
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दिल ना-उम्मीद तो नहीं, नाकाम ही तो है,
लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है।
