प्रेम पर अनमोल वचन
सच्चे प्रेम, धैर्य और समर्पण पर आधारित शास्त्रीय व आधुनिक विचार।
प्रेम बांधने की नहीं, बल्कि स्वतंत्रता के बीच भी संबंध निभाने की कला मानी गई है, जहाँ अहंकार को प्रेम समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। कबीर के दोहों से लेकर आधुनिक भावनाओं तक फैली यह गहराई प्रेम कविताओं में भी उतनी ही खूबसूरती से उतरती है।
जहाँ सच्चा प्रेम होता है, वहाँ निर्णय से पहले क्षमा आ जाती है; प्रेम गलतियों को गिनता नहीं, हृदय को थामता है।
इस संसार में सबसे पवित्र और निःस्वार्थ प्रेम वही है जो एक माँ अपने बच्चे की पहली साँस से अंतिम साँस तक निभाती है।
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प्रेम पकड़कर रखने की चीज़ नहीं, बल्कि स्वतंत्र होकर भी जुड़े रहने की कला है; जो जकड़ता है वह प्रेम नहीं, अहंकार है।
जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि है मैं नाहि। प्रेम गली अति सांकरी, तामे दो न समाहि। — कबीर
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सच्चा प्रेम वही है जो बदले में कुछ नहीं माँगता, बस देता रहता है और देने में ही अपनी पूर्णता पाता है।
प्रेम को शब्दों की आवश्यकता नहीं होती; यह आँखों की चुप्पी और स्पर्श की गर्माहट में भी अपनी पूरी बात कह देता है।
जो प्रेम जल्दी में किया जाए वह अक्सर टूट जाता है; सच्चा प्रेम धैर्यवान होता है और सही समय का इंतज़ार करना जानता है।
काग़ज़ के बेजान परिंन्दे भी उड़ते है,
बस डोर सही हाथ में होनी चाहिये !!
Kaagaj ke bejaan parinde bhee padata hai,
Bas dor sahee haath mein honee chaahiye !!
Frequently Asked Questions
How do these quotes define love versus attachment or ego?
What do the quotes say about rushing into love?
Can love exist without being spoken?
सच्चा प्रेम कभी हड़बड़ी में परिपक्व नहीं होता, वह उचित घड़ी आने तक रुकना बखूबी जानता है, और बदले में कुछ पाने की चाह छोड़कर देने के भाव में ही स्वयं को सार्थक पाता है। ऐसी भावनाएँ शब्दों से ज़्यादा खामोश निगाहों में बोलती हैं, जिन्हें प्रेम संदेशों के ज़रिए भी महसूस किया जा सकता है।
