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Khilaaf Shayari

When the world turns khilaaf, keep walking

These khilaaf shayari lines lean into resilience, the idea that when people stand against you, success is usually just around the corner. One line goes further, pointing out that a hungry person doesn't check for a mosque or a temple, only food, close to our Bhookh shayari.

Khilaaf Shayari - Standing Strong Against Odds

अगर खिलाफ है होने दो जान थोड़ी है,
ये सब धुआ है कोई आसमान थोड़ी है

Agar khilaaf hai hone do jaan thodi hai,
Ye sab dhuan hai koi aasmaan thodi hai.

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जब लोग आपके खिलाफ होते है,
तब सफलता के करीब आप होते है.

Jab log aapake khilaaph hote hai,
Tab saphalata ke kareeb aap hote hai.

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न मस्जिद को जानते हैं, न शिवालों को जानते हैं

न मस्जिद को जानते हैं , न शिवालों को जानते हैं
जो भूखे पेट होते हैं, वो सिर्फ निवालों को जानते हैं.
मेरा यही अंदाज ज़माने को खलता है.
की मेरा चिराग हवा के खिलाफ क्यों जलता है……
में अमन पसंद हूँ, मेरे शहर में दंगा रहने दो…
लाल और हरे में मत बांटो, मेरी छत पर तिरंगा रहने दो

Na masjid ko jaanate hain , na shivaalon ko jaanate hain
Jo bhookhe pet hote hain, vo sirph nivaalon ko jaanate hain.
Mera yahee andaaj zamaane ko khalata hai.
Ki mera chiraag hava ke khilaaph kyon jalata hai……
Mein aman pasand hoon, mere shahar mein danga rahane do…
Laal aur hare mein mat baanto, meree chhat par tiranga rahane do

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मैं हर उस हिन्दू का सम्मान करता हूँ
जिसको हिंदुत्व पर गर्व है और रहेगा
निजी स्वार्थ के लिये हिन्दू की बुराई करता है
उसके मैं सख़्त खिलाफ हूँ !

Main har us hindoo ka sammaan karata hoon
Jisako hindutv par garv hai aur rahega
Nijee svaarth ke liye hindoo kee buraee karata hai
Usake main sakht khilaaph hoon !

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15 August Shayari

धूल चटा दो गिद्धों को जो घर में घुसकर घात करें
और जीभ काट लो कुत्तों की जो हिंदुत्व के खिलाफ बात करें !

Dhool chata do giddhon ko jo ghar mein ghusakar ghaat karen
Aur jeebh kaat lo kutton kee jo hindutv ke khilaaph baat karen !

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अपने खिलाफ बाते खामोशी से सुन लो,
यकीन मानो वक्त बेहतरीन जवाब देगा।

Apane khilaaph baate khaamoshee se sun lo,
Yakeen maano vakt behatareen javaab dega.

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अब मातृभूमि के खिलाफ नारे लगाने वालों देख आश्चर्य नहीं होता

अब मातृभूमि के खिलाफ नारे लगाने वालों देख आश्चर्य नहीं होता,
हमने बच्चों को अपनी माँ को वृद्धाश्रम मे छोड़ के आते देखा है !!!

Ab maatrbhoomi ke khilaaph naare lagaane vaalon dekh aashchary nahin hota,
Hamane bachchon ko apanee maan ko vrddhaashram me chhod ke aate dekha hai !!!

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अभी साथ था.....अब खिलाफ है,
वक्त का भी आदमी जैसा हाल है.

Abhee saath tha.....ab khilaaph hai,
Vakt ka bhee aadamee jaisa haal hai.

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रजामंदी मे भी खिलाफत जरा सी बाकी है...
तुम्हारे खुदा से मेरा कुछ हिसाब बाकी है...!!

Rajaamandee me bhee khilaaphat jara see baakee hai...
Tumhaare khuda se mera kuchh hisaab baakee hai...!!

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Frequently Asked Questions

विरोध को हल्के में लेने वाली खिलाफ शायरी कौन सी है?
एक शायरी में लिखा है 'अगर खिलाफ है होने दो जान थोड़ी है, ये सब धुआ है कोई आसमान थोड़ी है।' यह दिखाती है कि किसी के विरोध को बहुत गंभीरता से न लेकर आत्मविश्वास से आगे बढ़ने का भाव कैसे बयां किया जा सकता है।
सफलता और खिलाफत का क्या रिश्ता बताया गया है?
शायरी कहती है 'जब लोग आपके खिलाफ होते है, तब सफलता के करीब आप होते है।' यह एक प्रेरक सोच है कि विरोध अक्सर इस बात का संकेत होता है कि इंसान सही राह पर आगे बढ़ रहा है। जुड़े विचारों के लिए खिलाफ अनमोल वचन देखे जा सकते हैं।
भूख और धर्म को लेकर खिलाफ शायरी में क्या संदेश है?
एक शायरी में लिखा है 'न मस्जिद को जानते हैं, न शिवालों को जानते हैं, जो भूखे पेट होते हैं, वो सिर्फ निवालों को जानते हैं... मेरा चिराग हवा के खिलाफ क्यों जलता है।' यह भूख शायरी जैसे भाव में धार्मिक भेदभाव से ऊपर उठकर भूख और इंसानियत की बात करने का साहसी अंदाज़ दिखाती है।
एक शायरी में हिंदुत्व से जुड़ा एक खास राजनीतिक-वैचारिक नजरिया भी है?
हाँ, एक शायरी में लिखा है 'मैं हर उस हिन्दू का सम्मान करता हूँ जिसको हिंदुत्व पर गर्व है और रहेगा, निजी स्वार्थ के लिये हिन्दू की बुराई करता है उसके मैं सख़्त खिलाफ हूँ।' यह उस शायर के निजी और स्पष्ट राजनीतिक-सामाजिक दृष्टिकोण को बयां करती है, जो हिंदू पहचान पर गर्व करने वालों के सम्मान और स्वार्थवश आलोचना करने वालों के विरोध की बात करती है।
खिलाफ शायरी में विरोध को किन-किन नजरियों से देखा गया है?
इस कलेक्शन में खिलाफ शब्द को व्यक्तिगत आत्मविश्वास, सामाजिक-धार्मिक टिप्पणी और वैचारिक रुख जैसे कई पहलुओं से दिखाया गया है। इससे जुड़ी देश शायरी में भी ऐसे ही सामाजिक और वैचारिक भाव मिलते हैं।

Other couplets simply answer opposition with silence and patience instead of argument. For more short lines on staying grounded, browse our Desh or Anmol Vachan collection.