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देश अनमोल वचन

मेरा जीवन ही मेरा असली संदेश है।

किसी राष्ट्र की असली प्रगति उपदेशों की भरमार से नहीं बल्कि वहां के व्यवहार और संवेदनशीलता से आंकी जाती है, जैसे गुलाब बिना कहे अपनी खुशबू से पहचान बनाता है। ऐसे राष्ट्रप्रेम से भरे भाव देश शायरी में भी उतने ही सशक्त हैं।

मेरा देश-है इससे प्यार मुझको,
अल्लाह की हुंकार रामायण की कथा
वृन्दावन का रास,गोपियों की व्यथा,
त्योहारों की धूम,दिवाली के दिए,
होली के रंगों बिना कोई क्या जिए,
ये सब मेरी दुनिया की आवाज़ हैं,
इस पर ही तो होता...

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थोडा सा अभ्यास बहुत सारे उपदेशों से बेहतर है..

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गुलाब को उपदेश देने की आवश्यकता नहीं होती है,
वह तो केवल अपनी ख़ुशी बिखेरता है,
उसकी खुशबु ही उसका संदेश है....

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एक देश की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से आँका जा सकता है,
कि वहां जानवरों से कैसे व्यवहार किया जाता है...

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15 August Shayari

मेरा जीवन मेरा सन्देश है..

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राष्ट्रीय व्यवहार में हिन्दी को काम में लाना,
देश की उन्नति के लिए आवश्यक है..

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धर्म और व्यावहारिक जीवन अलग नहीं हैं। सन्यास लेना जीवन का परित्याग करना नहीं है। असली भावना सिर्फ अपने लिए काम करने की बजाये देश को अपना परिवार बना मिलजुल कर काम करना है। इसके बाद का कदम मानवता की...

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ईश्वर की यही इच्छा हो सकती है कि मैं जिस उद्देश्य का प्रतिनिधित्व करता हूँ वो मेरे आजादी में रहने से ज्यादा मेरी पीड़ा में अधिक समृद्धि हो।

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यदि हम किसी भी देश के इतिहास को अतीत में जाएं , तो हम अंत में मिथकों और परम्पराओं के काल में पहुंच जाते हैं जो आखिरकार अभेद्य अन्धकार में खो जाता है।

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26 January Shayari

मेरी एक ही इच्छा है कि भारत एक अच्छा उत्पादक हो और इस देश में कोई भूखा ना हो , अन्न के लिए आंसू बहाता हुआ.

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मेरे मन में कोई संदेह नहीं है,
कि हमारे देश की प्रमुख समस्यायों
जैसे गरीबी ,अशिक्षा , बीमारी , कुशल उत्पादन एवं वितरण का समाधान,
सिर्फ समाजवादी तरीके से ही की जा सकती है .....

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यदि देशहित मरना पड़े
मुझे सहस्रों बार भी,
तो भी न मैं इस कष्ट को निज ध्यान में लाऊं
कभी. हे ईश भारतवर्ष में शत बार मेरा जन्म हो,
कारण सदा ही मृत्यु का देशोपकारक कर्म हो.......

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मैं जानता हूँ कि मैं मरूँगा,
किन्तु मैं मरने से नहीं घबराता. किन्तु जनाब,
क्या इससे सरकार का उद्देश्य पूर्ण होगा?
क्या इसी तरह हमेशा भारत माँ के वक्षस्थल पर विदेशियों का तांडव नृत्य होता रहेगा?
कदापि नहीं. इतिहास इसका...

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मेरा यह दृढ निश्चय है कि
मैं उत्तम शरीर धारण कर नवीन शक्तियों सहित
अति शीघ्र ही
पुनः भारत में ही किसी निकटवर्ती संबंधी या इष्ट मित्र के
गृह में जन्म ग्रहण करूँगा
क्योंकि मेरा जन्म-जन्मान्तरों में भी यही उद्देश्य...

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Army Shayari

आज हमारे देश को आवश्‍यकता है.
लोहे के समान मांसपेशियों और वज्र के समान स्‍नायुओं की.
हम बहुत दिनों तक रो चुके,
अब और रोने की आवश्‍यकता नहीं,
अब अपने पैरों पर उठ खड़े हो एवं मनुष्‍य बनो.

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नए साल का उद्देश्य यह नहीं हैं कि हमारे पास एक नया साल हो, वह यह है कि हमारे पास एक नई आत्मा हो।

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अगर हम एक बार अपने उद्देश्य से पीछे हट जाते है तो उसे फिर से पाने में एकदम शून्य से शुरुआत करना होता है यानी अनवरत प्रयाश ही सफलता की निशानी है

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असफलता से निराश होकर अपने उद्देश्य से पीछे हट जाना एक तरह से अपने उद्देश्य से मुह मोड़ लेने के बराबर है

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उपदेश वाणी से नहीं
आचरण से प्रस्तुत किया जाता है

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Desh Bhakti Shayari

जो व्यक्ति अपने माता-पिता, अपने देश अपनी मातृभूमि के प्रति कृतज्ञ नहीं हो सकता है.
ऐसा व्यक्ति वास्तव में किसी के प्रति कृतज्ञ नहीं होता है.

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Frequently Asked Questions

Are the Desh anmolvachan quotes actually about the nation or patriotism?
Not particularly - although the title means nation, three of the four sample lines are general wisdom about practice over preaching and a rose spreading fragrance without needing to be told. Only one line explicitly mentions a nation, judging its greatness by how it treats animals.
Are any of these lines attributed to a well-known figure?
The line about a nation's treatment of animals and the line 'my life is my message' are commonly attributed to Gandhi, though that attribution isn't verified within the source material itself.
What related pages link from this Desh anmolvachan page?
This page links to Shayari and 15 August anmolvachan, fitting given the nation-themed name even though the quotes themselves lean general.

अपने लिए जीने की बजाय पूरे राष्ट्र को अपना परिवार मानकर काम करना ही मानवता की असली सेवा मानी जाती है। स्वतंत्रता के जज्बे से जुड़े ऐसे भाव 15 अगस्त के अनमोल वचन में भी उमड़ते हैं।