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Dhan Anmolvachan

धन और असली अमीरी पर विचार करते वचन।

जिसकी संदूक रुपयों-पैसों से लबालब हो वह जरूरी नहीं सच में अमीर हो, बल्कि सच्चा धनवान वही है जिसकी झोली अपनों के रिश्तों और भरोसे से भरी रहे। संसाधनों और लालच के फर्क से जुड़े और विचार देश अनमोलवचन में भी मिलेंगे।

तोड़े से भी ना टूटे जो ऐसा ये मन – बंधन है, इस बंधन को सारी दुनिया कहती रक्षाबंधन हैं!! तुम भी इस कच्चे धागे का मान जरा-सा रख लेना, कम से कम राखी के दिन बहाना का रस्ता तक...

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रक्षाबंधन एक ऐसा त्यौहार हैं जिसे भाई अपने बहन को जीवन भर रक्षा करने का वचन देता हैं।

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धनवान वो नहीं है जिसकी तिजोरी नोटों से भरी हो…
धनवान वो है, जिसकी तिजोरी रिश्तों से भरी हो…!!

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गुरु तेरा उपकार का,
कैसे चुकाऊ मैं मोल ?
लाख कीमती धन भक
गुरु हैं मेरा अनमोल

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Desh Shayari

प्रिय टीचर, मुझे हमेशा सपोर्ट करने और मेरा मार्गदर्शन करने के लिए धन्यवाद. यदि मुझे हमेशा आपका आशीर्वाद मिल पाता तो मैं उसी तरह सफल होता जाता जैसे मैं होता आया हूँ.

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खुद की समझदारी ही अहमियत रखती है,
वरना याद रहे अर्जुन और दुर्योधन के गुरु एक ही थे ।

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प्रत्‍येक व्‍यक्ति के जीवन में
एक मंत्र होना चाहिए…
मंत्र में गजब की सकती होती है!
फिर वो ईश्‍वर की आराधना का मंत्र हो
सेवा कार्य हो या फिर जीवन का लक्ष्‍य!

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पृथ्वी सभी मनुष्यों की ज़रुरत पूरी करने के लिए पर्याप्त संसाधन प्रदान करती है,
लेकिन लालच पूरी करने के लिए नहीं...

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मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है,
सत्य मेरा भगवान है, अहिंसा उसे पाने का साधन...

Mera dharm saty aur ahinsa par aadhaarit hai,
Satya mera bhagavaan hai, ahinsa use paane ka saadhan...

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Dil Shayari

जो समय बचाते हैं,
वे धन बचाते हैं और बचाया हुआ धन, कमाएं हुए धन के बराबर है...

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मेरा यह दृढ निश्चय है कि
मैं उत्तम शरीर धारण कर नवीन शक्तियों सहित
अति शीघ्र ही
पुनः भारत में ही किसी निकटवर्ती संबंधी या इष्ट मित्र के
गृह में जन्म ग्रहण करूँगा
क्योंकि मेरा जन्म-जन्मान्तरों में भी यही उद्देश्य...

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मैनें धन से कहा.. तुम एक कागज़ के टुकड़े हो.. धन मुस्कराया और बोला मैं बेश्क एक कागज़ का टुकड़ा हूँ लेकिन मैनें आज तक कूड़ेदान का मुँह नही देखा।

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फल लगने पर वृक्ष नीचे की ओर झुक जाते हैं
वैसे ही सज्जन पुरुष धन और ज्ञान आते ही और विनम्र हो जाते हैं

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कितने मूर्ख हैं हम भगवान के बनाए फलों को भगवान को ही अर्पण करके धन दौलत माँगने लगते हैं

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Frequently Asked Questions

Do these samples actually focus on wealth?
Only partly - two of the four are Raksha Bandhan verses about a sibling's protective bond, and one recalls Arjun and Duryodhana sharing the same guru; just the final line addresses wealth directly.
What's the one line here that does address wealth directly?
It redefines richness: a person isn't wealthy because their safe is full of currency notes, but because their safe is full of relationships.
What do the Raksha Bandhan verses contribute instead?
They describe the sibling bond as a thread that can't truly be broken, with a brother vowing to protect his sister for life - a theme of family duty rather than money.

भार बढ़ने पर जैसे वृक्ष की डालियां जमीन की ओर झुकने लगती हैं, वैसे ही सच्चे गुणी लोग समृद्धि और समझ बढ़ने पर और भी नम्र होते जाते हैं, अहंकारी नहीं। ज्ञान और विनम्रता से जुड़े और भाव हार अनमोलवचन पर पढ़ें।