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Aaj Shayari - Sirf Aaj, Sirf Abhi

Kal jo bhi tha, aaj shayari sirf is pal ki baat karti hai.

कल भी ज़िंदा था और आज भी है, बस दिल के जीने का ढंग बदल गया है - इस एहसास से लेकर बंद अलमारी में झांकते बचपन के खिलौनों की याद तक, aaj shayari बीते और वर्तमान पल के फ़र्क को बड़ी सादगी से दिखाती है। यही मूड Aajkal में भी मिलता है।

Aaj Shayari - Sirf Is Pal Ka Ehsaas

मैने यादें उठाकर देखी थी आज..
एक दिन तुम मेरे थे

Maine yaaden uthaakar dekhee thee aaj..
Ek din tum mere the

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कल खुद में थी आज तुझमें हूँ
गुम हुए मुझे एक जमाना हो गया...!!!

Kal khud mein thee aaj tujhamen hoon
Gum hue mujhe ek jamaana ho gaya...!!!

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बहुत कोशिश की आज 'सिर्फ' बारिश पर शायरी लिखु
पर हर बौछार 'सिर्फ ' तुम्हारी याद बरसा रही थी ...

Bahut koshish kee aaj sirph baarish par shaayaree likhu
Par har bauchhaar sirph tumhaaree yaad barasa rahee thee ...

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आदमी ही आदमी का रास्ता काट रहा है भैया. . .
बिल्लियाँ तो बेचारी बेरोज़गार बैठी है आजकल. .

Aadamee hee aadamee ka raasta kaat raha hai bhaiya. . .
Billiyaan to bechaaree berozagaar baithee hai aajakal. .

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पढ़ने वालों की कमी हो गयी है आज इस ज़माने में ,
नहीं तो गिरता हुआ एक-एक आँसू पूरी किताब है ....

Padhane vaalon kee kamee ho gayee hai aaj is zamaane mein ,
Nahin to girata hua ek-ek aansoo pooree kitaab hai ....

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“यकीनन” मुझे आज भी इश्क है तुमसे।
बस अब बयाँ करने की आदत नही रही।

“yakeenan” mujhe aaj bhee ishk hai tumase.
Bas ab bayaan karane kee aadat nahee rahee.

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आज धुंध बहुत है,
काश वो टकरा जाएँ हमसे..!!

Aaj dhundh bahut hai,
Kaash vo takara jaen hamase..!!

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कुछ मीठी सी ठंडक है आज इन हवाओं में,
शायद दोस्तो की यादों का कमरा खुला रह गया है

Kuchh meethee see thandak hai aaj in havaon mein,
Shaayad dosto kee yaadon ka kamara khula rah gaya hai

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लफ्ज़ बीमार से पड़ गये हैं आज कल,
*एक खुराक* आपकी वाह वाह की चाहिए।

Laphz beemaar se pad gaye hain aaj kal,
*ek khuraak* aapakee vaah vaah kee chaahie.

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जिस के सहारे ज़िंदगी गुज़र जाए......
आजकल उस वहम की तलाश में हूँ

Jis ke sahaare zindagee guzar jae......
Aajakal us vaham kee talaash mein hoon

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आज खुद को इतना तनहा पाया हमने,
जेसे लोग दफना के चले गए हो..!!

Aaj khud ko itana tanaha paaya hamane,
Jese log daphana ke chale gae ho..!!

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देशभक्ति अब फ़िर जागेगी...
महीना आजाद-ए-हिन्द है...!!

Deshabhakti ab fir jaagegee...
Maheena aajaad-e-hind hai...!!

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बड़े हादसे होने लगे आज मेरे भी शहर में,
कोई दिल चुरा ले गया और" पता न चला...!!

Bade haadase hone lage aaj mere bhee shahar mein,
Koee dil chura le gaya aur" pata na chala...!!

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ठिठुर रहा है बदन साँस थम सी गई है

ठिठुर रहा है बदन साँस थम सी गई है
आज सर्दी बहुत है शायरी जम सी गई है !!

Thithur raha hai badan saans tham see gaee hai
Aaj sardee bahut hai shaayaree jam see gaee hai !!

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हर रोज़ खा जाते थे वो कसम मेरे नाम की,
आज पता चला की जिंदगी धीरे धीरे ख़त्म क्यूँ हो रही..

Har roz kha jaate the vo kasam mere naam kee,
Aaj pata chala kee jindagee dheere dheere khatm kyoon ho rahee..

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देखते देखते वो क्या से क्या हो गया
वो मेरा पता था आज ख़ुद लापता हो गया !!

Dekhate dekhate vo kya se kya ho gaya
Vo mera pata tha aaj khud laapata ho gaya !!

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हर रोज आजकल, मैं सरेआम बिकता हूँ;
ज़मीर हूँ साहब, आजकल कहाँ टिकता हूँ!

Har roj aajakal, main sareaam bikata hoon;
Zameer hoon saahab, aajakal kahaan tikata hoon!

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आज दिल कर रहा है बच्चों की तरह रूठ ही जाऊँ,
फिर सोचा वक्त का तकाजा है मनायेगा कौन...!!!!

Aaj dil kar raha hai bachchon kee tarah rooth hee jaoon,
Phir socha vakt ka takaaja hai manaayega kaun...!!!!

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सही गलत में आज बस, अंतर इतना यार
जीत गया वो है सही, गलत गया जो हार।।

Sahee galat mein aaj bas, antar itana yaar
Jeet gaya vo hai sahee, galat gaya jo haar..

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आज कल वो हमसे डिजिटल नफरत करते हैं,
हमें ऑनलाइन देखते ही ऑफलाइन हो जाते हैं..

Aaj kal vo hamase dijital napharat karate hain,
Hamen onalain dekhate hee ophalain ho jaate hain..

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Frequently Asked Questions

आज शायरी में यह शब्द किन-किन भावों के साथ आता है?
आज शायरी में यह शब्द तीज जैसे त्योहारों की खुशियों, ज़िन्दगी में मिले किसी खास तोहफे, किसी के लिए अनसुलझे एहसास और बचपन की यादों जैसे कई भावों के साथ आता है।
हरियाली तीज पर आज घर-आंगन में खुशियों की बात इस शायरी में कैसे कही गई है?
'हरियाली तीज आई है, संग खुशियों की सौगात लाई है !! मेंहदी लगे, साज-सिंगार हो, भक्ति में झूमे हर घर-आंगन आज हो !!' पंक्ति में हरियाली तीज को खुशियों की सौगात लेकर आने वाला त्योहार बताया गया है।
आज मिले ज़िन्दगी के तोहफे की बात इस शायरी में कैसे कही गई है?
'मिला है आज मुझे ज़िन्दगी का वो तोहफा, जिसे पाने के लिए किसी और ने की थी तमन्ना !!' पंक्ति में शायर बताता है कि उसे आज एक ऐसा तोहफा मिला है जिसकी चाहत किसी और ने भी की थी।
किसी के लिए बेचैनी या सुकून समझ ना आने की उलझन इस शायरी में कैसे बयां हुई है?
'तुम मेरी बेचैनी हो या सुकून, आज तक समझ नहीं पाया मैं !!' पंक्ति में शायर आज तक यह तय नहीं कर पाया कि सामने वाला उसके लिए बेचैनी की वजह है या सुकून की।
बचपन के खिलौनों की याद और उसके ना लौटने का अफसोस इस शायरी में कैसे बयां हुआ है?
'खिलौने आज भी झांकते हैं, बंद अलमारियों के शीशों से !! बचपन फिर कभी नहीं लौटेगा, ये अफसोस हमें भी है पूरे दिल से !!' पंक्ति में बंद अलमारियों में रखे पुराने खिलौनों को देखकर बचपन के ना लौटने का अफसोस जताया गया है। ऐसी भावुक यादों से जुड़ी और शायरी 2 लाइन शायरी में भी मिलती है।

कभी यह पल दिल की बेचैनी बन जाता है तो कभी अपनों की याद, इसलिए Dil और Apne शायरी भी पढ़ें।