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Log Shayari - Duniya Ke Log Aur Unki Fitrat

Log badal jaate hain, sirf lafz reh jaate hain.

समाज पर एक सीधी नज़र - यही है Log shayari की पहचान। कैसे लोग किसी की हैसियत देखते हैं, कैसे सिर्फ चेहरा परखते हैं, और कैसे वक़्त के साथ अपना रंग बदल लेते हैं, यह सच्चाई हर उस इंसान को छूती है जिसने कभी दुनिया का यह रूप देखा हो। ऐसी ही सीधी बातों के लिए Quotes भी पढ़ें।

Log Shayari - Duniya Ke Log, Sacchi Baat

तमाम लोग नफ़रतों के ज़हर में बुझे हुए...
मोहब्बतों के सिलसिलों को आम करना चाहिए...!!

Tamaam log nafaraton ke zahar mein bujhe hue...
Mohabbaton ke silasilon ko aam karana chaahie...!!

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पास रह कर भी लोग हमारे ना हो सके...
और आप दूर रह कर भी हमारी जान बन गए...!!

Paas rah kar bhee log hamaare na ho sake...
Aur aap door rah kar bhee hamaaree jaan ban gae...!!

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ना देख पीछे मुड़कर वक्त को वो गुजर गया...
सुनो हथेली में एक बूँद अश्क की कब तक संभालोगे...!!

Na dekh peechhe mudakar vakt ko vo gujar gaya...
Suno hathelee mein ek boond ashk kee kab tak sambhaaloge...!!

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ज़िन्दगी दुःख देती है ...
जब कमज़ोर लोगों से मज़बूत रिश्ते बनते हैं...!!

Zindagee duhkh detee hai ...
Jab kamazor logon se mazaboot rishte banate hain...!!

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कुछ लोग सारी जिंदगी इंसान नही बन पाते...
और कुछ लोग मयखाने से खुदा बनकर निकलते हैं...!!

Kuchh log saaree jindagee insaan nahee ban paate...
Aur kuchh log mayakhaane se khuda banakar nikalate hain...!!

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हम तो अच्छे थे...
पर लोगो की नज़र में सदा बुरे ही रहे...
कहीं हम सच में ख़राब होते तो सोचो कितना बवाल होता...!!

Ham to achchhe the...
Par logo kee nazar mein sada bure hee rahe...
Kaheen ham sach mein kharaab hote to socho kitana bavaal hota...!!

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सांसों के सिलसिले को ना दो ज़िन्दगी का नाम...
जीने के बावजूद भी, मर जाते हैं कुछ लोग...!!

Saanson ke silasile ko na do zindagee ka naam...
Jeene ke baavajood bhee, mar jaate hain kuchh log...!!

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मगरूर नहीं हूँ बस दूर हो गई हूँ मैं...
उन लोगों से जिन्हें मेरी कदर नहीं है...!!

Magaroor nahin hoon bas door ho gaee hoon main...
Un logon se jinhen meree kadar nahin hai...!!

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खुद को भिखरते देखते है कुछ कर नहीं पाते हैं...
फ़िर भी लोग खुदाओं जैसी बातें करते हैं...!!

Khud ko bhikharate dekhate hai kuchh kar nahin paate hain...
Fir bhee log khudaon jaisee baaten karate hain...!!

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कहने वालों का कुछ नहीं जाता, सहने वाले कमाल करते हैं...
कौन ढूंढें जवाब दर्दों के, लोग तो बस सवाल करते हैं…!!

Kahane vaalon ka kuchh nahin jaata, sahane vaale kamaal karate hain...
Kaun dhoondhen javaab dardon ke, log to bas savaal karate hain…!!

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कुछ लोग पिघल कर मोम की तरह रिश्ते निभाते है...
और कुछ लोग आग बनकर उन्हें जलाते ही जाते है....!!

Kuchh log pighal kar mom kee tarah rishte nibhaate hai...
Aur kuchh log aag banakar unhen jalaate hee jaate hai....!!

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मेरा बसेरा अब उस शहर अदावत में है साहब...
जहाँ लोग सजदों में भी लोगों का बुरा चाहते हैं...!!

Mera basera ab us shahar adaavat mein hai saahab...
Jahaan log sajadon mein bhee logon ka bura chaahate hain...!!

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साथ लम्हों का,याद बरसों की...
अच्छे लोगों की बस यही बात बुरी लगती है...!!

Saath lamhon ka,yaad barason kee...
Achchhe logon kee bas yahee baat buree lagatee hai...!!

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जब लोगों के दिल भर जाते हैं...
तो बहाने अपने आप मिल जाते हैं...!!

Jab logon ke dil bhar jaate hain...
To bahaane apane aap mil jaate hain...!!

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हँस के मिलते हैं ,भले दिल में चुभन रखते है...
हम से कुछ लोग मोहब्बत का चलन रखते हैं...!!

Hans ke milate hain ,bhale dil mein chubhan rakhate hai...
Ham se kuchh log mohabbat ka chalan rakhate hain...!!

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रूठे रिश्ते और नाराज़ लोग सबूत है इस बात के...
कि ज़ज़्बात अब भी ज़ुड़े रहने की ख़्वाहिश रखते हैं...!!

Roothe rishte aur naaraaz log saboot hai is baat ke...
Ki zazbaat ab bhee zude rahane kee khvaahish rakhate hain...!!

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बातों से सीखा है हमने आदमी को पहचानने का फन...
जो हल्के लोग होते है, हर वक्त बातें भारी भारी करते हैं...!!

Baaton se seekha hai hamane aadamee ko pahachaanane ka phan...
Jo halke log hote hai, har vakt baaten bhaaree bhaaree karate hain...!!

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अजीब हैं इस दुनिया का दस्तूर...
लोग इतनी जल्दी बात नहीं मानते...
जितनी जल्दी बुरा मान जाते हैं...!!

Ajeeb hain is duniya ka dastoor...
Log itanee jaldee baat nahin maanate...
Jitanee jaldee bura maan jaate hain...!!

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उल्फत बदल गई, कभी नियत बदल गई
खुदगर्ज जब हुए, तो फिर सीरत बदल गई
अपना कुसूर, दूसरों के सर पर डाल कर
कुछ लोग सोचते हैं, हकीकत बदल गई...!!

Ulphat badal gaee, kabhee niyat badal gaee
Khudagarj jab hue, to phir seerat badal gaee
Apana kusoor, doosaron ke sar par daal kar
Kuchh log sochate hain, hakeekat badal gaee...!!

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कुछ लोग चाहे जितने बूढ़े हो जाएं, उनकी सुंदरता नहीं मिटती...
वह बस उनके चेहरों से उतर कर उनके दिलों में आ बसती है...!!

Kuchh log chaahe jitane boodhe ho jaen, unakee sundarata nahin mitatee...
Vah bas unake cheharon se utar kar unake dilon mein aa basatee hai...!!

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Frequently Asked Questions

लोग शायरी में समाज को लेकर किन बातों पर तंज़ या सीख दी जाती है?
लोग शायरी में दिल में दफ़न ख्वाहिशों, देने की सही नीयत, खूबसूरत चेहरे की बजाय खूबसूरत दिल ढूंढने और गरीबी से मिलने वाली सीख जैसे कई सामाजिक पहलुओं पर बात होती है। इसी तरह की और सामाजिक शायरी आदमी शायरी में भी मिलती है।
दिल में दफ़न ख्वाहिशों की बात करने वाली शायरी क्या कहती है?
'कुछ लोग सिने में दिल नहीं, कब्रिस्तान लिए फिरते है साहब; जहाँ दफ़न होती हैं उनकी अनगिनत ख्वाहिशें !!' पंक्ति बताती है कि कुछ लोगों के दिल में इतनी अधूरी ख्वाहिशें दबी रहती हैं कि वह कब्रिस्तान जैसा महसूस होता है।
नीयत और हैसीयत को लेकर लोगों की सोच पर यह शायरी क्या कहती है?
'देना है तो कुछ ऐसा दीजिये कि, लोग आपके हैसीयत पे नहीं नीयत पे भरोसा करे !!' पंक्ति सिखाती है कि लोगों का भरोसा जीतने के लिए हैसीयत से ज़्यादा नीयत की सच्चाई ज़रूरी है।
खूबसूरत चेहरे की बजाय खूबसूरत दिल ढूंढने की सलाह इस शायरी में कैसे दी गई है?
'लोग करते हैं तलाश खूबसूरत चेहरे की, खूबसूरत दिल ढूंढते तो धोखा नहीं मिलता !!' पंक्ति में कहा गया है कि लोग अक्सर सिर्फ चेहरे की खूबसूरती देखते हैं, जबकि दिल की खूबसूरती परखने पर धोखा मिलने की संभावना कम हो जाती है।
गरीबी और भूख से लोगों की औकात सामने आने की बात इस शायरी में कैसे कही गई है?
'भूख और ठोकर बहुत कुछ सिखा देते हैं, गरीबी में लोग अक्सर अपनी औकात दिखा देते हैं !!' पंक्ति दिखाती है कि मुश्किल हालात इंसान का असली स्वभाव सामने ला देते हैं।

इंसानों की फ़ितरत पर और गहराई से बात करनी हो तो Aadmi और Achchhai-par सेक्शन भी देखें।