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Laal Shayari

Laal rang kabhi tyohar hai, kabhi mohabbat.

Yeh laal shayari ek hi dhaage mein bandhi nahi hai — kahin Basant Panchami ke gulal ki baat hai, kahin subah ki laali ki, aur kahin bas ek pyaari si shikayat ya chatpati chutney ki. Rangon se juda aisa hi jazba humari Apne shayari mein bhi milega.

Laal Shayari – Rangon Aur Tyoharon Ka Rang

रंग भी होशियार हो गए हैं,
लोगों की जिंदगियों से निकल कर,
गुलाल तक ही सिमटकर रह गए हैं !!

Rang bhee hoshiyaar ho gae hain,
Logon kee jindagiyon se nikal kar,
Gulaal tak hee simatakar rah gae hain !!

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चेहरे पे सारे शहर के गर्द-ए-मलाल है
जो दिल का हाल है वही दिल्ली का हाल है
मलिकज़ादा मंज़ूर अहमद

Chehare pe saare shahar ke gard-e-malaal hai
Jo dil ka haal hai vahee dillee ka haal hai
Malikazaada manzoor ahamad

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प्यार में लुट गया लाल है,
इश्क़ का जादू भी कमाल है,
हर हफ़्ते उसे पिज्जा खिलाया
इसी बात का मलाल है.

Pyaar mein lut gaya laal hai,
Ishq ka jaadoo bhee kamaal hai,
Har hafte use pijja khilaaya
Isee baat ka malaal hai.

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लाल तीखी चटनी के साथ उफ़्फ़
ये कातिल गरमा-गरम मोमोज़,
अमीर हो या गरीब सबके खुशियों में
शामिल गरमा-गरम मोमोज़।

Laal teekhee chatanee ke saath uff
Ye kaatil garama-garam momoz,
Ameer ho ya gareeb sabake khushiyon mein
Shaamil garama-garam momoz.

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2 Line Shayari

नही हुआ हैं अभी सवेरा, पूरब की लाली पहचान,
चिडियों के उठने से पहले, खाट छोड़ उठ गया किसान.

Nahee hua hain abhee savera, poorab kee laalee pahachaan,
Chidiyon ke uthane se pahale, khaat chhod uth gaya kisaan.

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उड़े पतंग आसमान में सबकी निराली
पीली, लाल, हरी, नीली और काली
आओ मिलकर हम सब वसंत मनाएं
द्वार पर अपने रंगीली रंगोली सजाएं
बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं

Ude patang aasamaan mein sabakee niraalee,
Peelee, laal, haree, neelee aur kaalee !!
Aao milakar ham sab vasant manaen,
Dvaar par apane rangeelee rangolee sajaen !!
~ Basant panchamee kee haardik shubhakaamanaen ~

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रुख़सार पर है रंगे हया की लाली

रुख़सार पर है , रंगे “हया” की लाली,
लबों को छू लिया मैंने वो निखर गये !!

Rukhasaar par hai , range “haya” kee laalee,
Labon ko chhoo liya mainne vo nikhar gaye !!

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आशिक़ों के महबूब के पैरो की धूल हूँ

आशिक़ों के महबूब के पैरो की धूल हूँ
हाँ मैं एक लाल गुलाब का फूल हूँ !!

Aashiqon ke mahaboob ke pairo kee dhool hoon
Haan main ek laal gulaab ka phool hoon !!

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शाम की लाली तेरी

शाम की लाली तेरी
रंगत की याद दिलाती है,
तेरी मासूमियत ही मुझे
तेरी ओर खींच लाती है !!

Shaam kee laalee teree
Rangat kee yaad dilaatee hai,
Teree maasoomiyat hee mujhe
Teree or kheench laatee hai !!

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Aankh Shayari

अगर नए रिश्ते न बनें तो, मलाल मत करना

अगर नए रिश्ते न बनें तो, मलाल मत करना,
पुराने टूट ना जायें बस, इतना ख्याल रखना।

Agar nae rishte na banen to, malaal mat karana,
Puraane toot na jaayen bas, itana khyaal rakhana.

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न मस्जिद को जानते हैं, न शिवालों को जानते हैं

न मस्जिद को जानते हैं , न शिवालों को जानते हैं
जो भूखे पेट होते हैं, वो सिर्फ निवालों को जानते हैं.
मेरा यही अंदाज ज़माने को खलता है.
की मेरा चिराग हवा के खिलाफ क्यों जलता है……
में अमन पसंद हूँ, मेरे शहर में दंगा रहने दो…
लाल और हरे में मत बांटो, मेरी छत पर तिरंगा रहने दो

Na masjid ko jaanate hain , na shivaalon ko jaanate hain
Jo bhookhe pet hote hain, vo sirph nivaalon ko jaanate hain.
Mera yahee andaaj zamaane ko khalata hai.
Ki mera chiraag hava ke khilaaph kyon jalata hai……
Mein aman pasand hoon, mere shahar mein danga rahane do…
Laal aur hare mein mat baanto, meree chhat par tiranga rahane do

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हे हनुमान तुम हो सबसे बेमिसाल...
तुमसे आँख मिलाये किसकी है मजाल...
सूरज को पल में निगला अंजनी के लाल...
मूरत तेरी देखकर भाग जाये काल...!!

He hanumaan tum ho sabase bemisaal...
Tumase aankh milaaye kisakee hai majaal...
Sooraj ko pal mein nigala anjanee ke laal...
Moorat teree dekhakar bhaag jaaye kaal...!!

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आरजू थी तुम्हारी तलब बनने की,
मलाल ये है कि तुम्हारी लत लग गयी।

Aarajoo thee tumhaaree talab banane kee,
Malaal ye hai ki tumhaaree lat lag gayee.

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बन जाऊँ मैं तेरी अधूरी ख्वाहिश,
तुझे मलाल जो हो मेरा ज़िक्र जब हो।

Ban jaoon main teree adhooree khvaahish,
Tujhe malaal jo ho mera zikr jab ho.

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Apne Shayari

माँ तो माँ है पहचान लेती है...
के आँखें सोने से लाल है या रोने से...!!

Maan to maan hai pahachaan letee hai...
Ke aankhen sone se laal hai ya rone se...!!

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वो उसे होली का गुलाल लगा कर
हमेशा के लिए बेरंग कर गया...!!!

Vo use holee ka gulaal laga kar
Hamesha ke lie berang kar gaya...!!!

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पुरानी होली का थोड़ा गुलाल रक्खा है
तुम्हारा इश्क़ मैंने यूँ संभाल रक्खा है...!!

Puraanee holee ka thoda gulaal rakkha hai
Tumhaara ishq mainne yoon sambhaal rakkha hai...!!

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आज #दिल को #ना_छेड़ना मेरे,
जो #बिखर गया तो #लाल_गुलाल #हो_जायेगा..

Aaj #dil ko #na_chhedana mere,
Jo #bikhar gaya to #laal_gulaal #ho_jaayega..

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हर रंग ख़ूबसूरत है अपने आप में मगर...
चटक लाल रंग जैसा कोई रंग नहीं लगता...!!

Har rang khoobasoorat hai apane aap mein magar...
Chatak laal rang jaisa koee rang nahin lagata...!!

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Dil Shayari

रंगने का मज़ा तब है जब ना हो रंग ना हो गुलाल
इधर हमारे होंठ हो उधर तुम्हारे गाल..

Rangane ka maza tab hai jab na ho rang na ho gulaal
Idhar hamaare honth ho udhar tumhaare gaal..

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Frequently Asked Questions

क्या इस पेज पर रंगों और गुलाल से जुड़ी लाल शायरी है?
हां, "रंग भी होशियार हो गए हैं, लोगों की जिंदगियों से निकल कर, गुलाल तक ही सिमटकर रह गए हैं !!" पंक्तियां बताती हैं कि रंग अब सिर्फ गुलाल तक सिमट गए हैं। इसी थीम की Gulal शायरी भी देखी जा सकती है।
लाल शायरी में रंगों की बात किस तरह की गई है?
एक पंक्ति में कहा गया है “रंग भी होशियार हो गए हैं, लोगों की जिंदगियों से निकल कर, गुलाल तक ही सिमटकर रह गए हैं”, जो त्योहारों की रंगीनियत के कम होते जाने पर एक हल्का तंज है। रंगों से जुड़ी और शायरी Gulal Shayari कलेक्शन में भी मिलेगी।
मोमोज़ की लाल तीखी चटनी पर कौन सी मज़ेदार शायरी है?
"लाल तीखी चटनी के साथ उफ़्फ़ ये कातिल गरमा-गरम मोमोज़, अमीर हो या गरीब सबके खुशियों में शामिल गरमा-गरम मोमोज़।" पंक्तियां लाल तीखी चटनी वाले गरमा-गरम मोमोज़ को अमीर-गरीब दोनों की पसंद बताती हैं।
लाल पर लिखी शायरी में शहर और दिल की बात कैसे जुड़ी है?
इस कलेक्शन में मलिकज़ादा मंज़ूर अहमद की पंक्ति “चेहरे पे सारे शहर के गर्द-ए-मलाल है, जो दिल का हाल है वही दिल्ली का हाल है” भी शामिल है, जहां “लाल” की ध्वनि “मलाल” यानी अफ़सोस के भाव में गूंजती है और शहर के हालात को दिल की उदासी से जोड़ देती है। दिल से जुड़ी ऐसी गहरी शायरी Dil Shayari में भी पढ़ी जा सकती है।
प्यार में अपना "लाल" खो देने की बात करने वाली शायरी कौन सी है?
"प्यार में लुट गया लाल है, इश्क़ का जादू भी कमाल है, हर हफ़्ते उसे पिज्जा खिलाया इसी बात का मलाल है." पंक्तियां हर हफ़्ते पिज्जा खिलाकर भी प्यार में अपने "लाल" के लुट जाने का मलाल बयां करती हैं। इसी भाव की Dil शायरी भी देखी जा सकती है।
“लाल” नाम पर कोई मजेदार शायरी है क्या?
हां, एक शेर में मजाकिया अंदाज़ में कहा गया है “प्यार में लुट गया लाल है, इश्क़ का जादू भी कमाल है, हर हफ़्ते उसे पिज्जा खिलाया इसी बात का मलाल है”, जो नाम और प्यार दोनों को हल्के-फुल्के अंदाज़ में जोड़ता है। ऐसी दिलचस्प पंक्तियाँ 2 Line Shayari कलेक्शन में भी मिल जाएंगी।
क्या "लाल" टॉपिक की हर शायरी सीधे रंग के बारे में ही है?
नहीं, जैसे "चेहरे पे सारे शहर के गर्द-ए-मलाल है जो दिल का हाल है वही दिल्ली का हाल है" (मलिकज़ादा मंज़ूर अहमद) में "मलाल" शब्द है, जो दिल्ली के हाल पर अफ़सोस जताता है, न कि रंग "लाल" पर। इसी तरह हार और अफ़सोस के भाव से जुड़ी Haar शायरी भी देखी जा सकती है।
क्या लाल शायरी में खाने-पीने की बात भी है?
बिल्कुल, “लाल तीखी चटनी के साथ उफ़्फ़ ये कातिल गरमा-गरम मोमोज़” वाली पंक्ति बताती है कि अमीर हो या गरीब, गरमागरम मोमोज़ की खुशी सबके लिए एक जैसी है। रोजमर्रा के ऐसे छोटे-छोटे सुख अपनों के साथ बांटने से जुड़ी शायरी Apne Shayari में भी देखी जा सकती है।
इस संग्रह में "लाल" शब्द के कितने अलग-अलग इस्तेमाल मिलते हैं?
यहां "लाल" रंग (गुलाल), चटनी के रंग, और प्यार में खोए हुए दुलारे "लाल" जैसे अलग-अलग भावों में इस्तेमाल हुआ है। अपनों को लाल की तरह चाहने के भाव पर Apne शायरी भी देखी जा सकती है।
लाल शायरी जैसी और शायरी कहां पढ़ी जा सकती है?
लाल शायरी में रंग, शहर, नाम और जिंदगी के छोटे पल जैसे कई भाव एक साथ मिलते हैं। इसी तरह की भावनाओं और जज़्बातों से जुड़ी और शायरी के लिए आप Aankh Shayari या हौसले से जुड़ी Haar Shayari भी पढ़ सकते हैं।

Kabhi laal gulab pyaar ka izhaar karta hai, kabhi tyoharon ka rang khushiyan le aata hai — laal shayari in sabhi rangon ko samete hai. Aise hi mishrit bhaav ke liye humari Aankh aur Dil shayari bhi dekhein.