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Falak Shayari

Kabhi khwahishein falak jitni oonchi ho jaati hain.

Falak shayari mein aasman ki oonchaiyon se chand ki chandni churane ki khwahish bhi milti hai. Isi khwahish mein Chand shayari bhi padhein.

फलक के तारों से क्या दूर होगी जुल्मत-ए-शब,
जब अपने घर के चरागों से रोशनी न मिली।

Falak Ke Taaron Se Kya Dur Hogi Zulmat-e-Shab,
Jab Apne Ghar Ke Chiraagon Se Roshni Na Mili.

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.फलक* देता है जिनको ऐश उनको गम भी होते हैं
जहां बजते हैं नक्कारे, वहां मातम भी होते हैं

.phalak* deta hai jinako aish unako gam bhee hote hain
Jahaan bajate hain nakkaare, vahaan maatam bhee hote hain

Daagh Dehlvi

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ऐ फलक चाहिए जी भर के नजारा हमको
जाके आना नहीं दुनिया में दोबारा हमको

Ai phalak chaahie jee bhar ke najaara hamako
Jaake aana nahin duniya mein dobaara hamako

Daagh Dehlvi

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ऐ चाँद फलक से तेरी चांदनी चुरा के

ऐ चाँद फलक से तेरी चांदनी चुरा के...
एक चाँद जमीं पर,अपना बना लूं...!!

Ai chaand phalak se teree chaandanee chura ke...
Ek chaand jameen par,apana bana loon...!!

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Chand Shayari

फलक तक साथ चलने की ना दुआ कीजिए

फलक तक साथ चलने की ना दुआ कीजिए...
जो जिंदा हैं जमीं पर उनसे वफा कीजिए...!!

Phalak tak saath chalane kee na dua keejie...
Jo jinda hain jameen par unase vapha keejie...!!

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तुम्हारी याद का दरिया और तन्हा दिल की कश्ती,,,,,,
दूर फलक तक बस यादें, न कोई जमीन न बस्ती..

Tumhaaree yaad ka dariya aur tanha dil kee kashtee,,,,,,
Door phalak tak bas yaaden, na koee jameen na bastee..

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Frequently Asked Questions

फलक और घर के चराग वाला शेर किस बात पर जोर देता है?
यह शेर बताता है कि अगर अपने घर में ही रोशनी न हो, तो दूर आसमान के तारों से रात का अंधेरा दूर होने की उम्मीद बेमानी है। पंक्ति है, "फलक के तारों से क्या दूर होगी जुल्मत-ए-शब, जब अपने घर के चरागों से रोशनी न मिली।" यह Door की उम्मीदों से ज्यादा अपने घर के भीतर की रोशनी पर भरोसा करने की एक गहरी सीख है।
"फलक से जी भर के नजारा चाहिए" वाली पंक्ति जिंदगी के बारे में क्या कहती है?
यह शेर जिंदगी को पूरी शिद्दत से जीने की चाहत बयां करता है, यह याद दिलाते हुए कि यह दुनिया में सिर्फ एक ही मौका है। पंक्ति है, "ऐ फलक चाहिए जी भर के नजारा हमको, जाके आना नहीं दुनिया में दोबारा हमको।" यह हर पल को पूरी तरह जीने की एक भावुक अपील है।
फलक देता है ऐश तो गम भी वाली पंक्ति क्या सिखाती है?
यह शेर जिंदगी के संतुलन की बात करता है, जहाँ खुशी के पल जितने असली हैं, गम के पल भी उतने ही अपरिहार्य हैं। पंक्ति है, ".फलक* देता है जिनको ऐश उनको गम भी होते हैं, जहां बजते हैं नक्कारे, वहां मातम भी होते हैं।" यह Dua मांगते वक्त भी यह सच्चाई याद दिलाता है कि सुख-दुख दोनों जिंदगी का हिस्सा हैं।
चाँद की चांदनी चुराने वाला रोमांटिक शेर क्या कहता है?
यह एक खूबसूरत रोमांटिक ख्याल है, जहाँ शायर आसमान से चाँदनी चुराकर अपनी खुद की एक चाँद जमीन पर बनाना चाहता है। पंक्ति है, "ऐ चाँद फलक से तेरी चांदनी चुरा के... एक चाँद जमीं पर, अपना बना लूं...!!" यह Chand जितनी ही खूबसूरत चाहत को धरती पर पाने की एक प्यारी कल्पना है।
क्या फलक शायरी सिर्फ आसमान की बात करती है?
नहीं, फलक यहाँ सिर्फ आसमान नहीं, बल्कि जिंदगी के दर्शन, रोमांस और उम्मीद जैसे कई भावों का प्रतीक बनकर आता है। हर Dil के लिए फलक कभी दूर की उम्मीद बनता है तो कभी करीब की चाहत।

Ek sher yahan yeh bhi kehta hai ki falak tak sath chalne ki dua se behtar hai jo zinda hain unse wafa ki jaaye. Aage Dil aur Dua shayari bhi padhein.