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Siyasat Shayari

Rishton mein bhi kabhi siyasat jhalak jaati hai.

Siyasat shayari mein kabhi tabahi aur siyasat ka gehra rishta dikhaya jaata hai, to kabhi mohabbat ko bhi siyasat jaisi rah badalne wali bataya jaata hai. Isi soch mein Achchha shayari bhi padhein.

Siyasat Shayari - Vyavastha Par Kataksh Ke Sher

बड़ा गहरा ताल्लुक है,
सियासत का तबाही से
कोई भी शहर जलता है
तो दिल्ली मुस्कुराती है.

Bada gahara taalluk hai,
Siyaasat ka tabaahee se
Koee bhee shahar jalata hai
To dillee muskuraatee hai.

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मेरी गलतियाँ वो इस तरह बताता है,
जैसे लखनऊ में सियासत चलाता है.

Meree galatiyaan vo is tarah bataata hai,
Jaise lakhanoo mein siyaasat chalaata hai.

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कई आँखों में रहती है कई बांहें बदलती है

कई आँखों में रहती है कई बांहें बदलती है,
मुहब्बत भी सियासत की तरह राहें बदलती है...

Kaee aankhon mein rahatee hai kaee baanhen badalatee hai,
Muhabbat bhee siyaasat kee tarah raahen badalatee hai...

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सियासत मुल्क़ में मार काट और दंगा बेचती है...
ग़रीबी पेट पालने के लिये तिरंगा बेचती है...!!

Siyaasat mulq mein maar kaat aur danga bechatee hai...
Gareebee pet paalane ke liye tiranga bechatee hai...!!

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2 Line Shayari

जो दिल को अच्छा लगता है उसी को दोस्त कहती हूँ...
मुनाफ़ा देखकर रिश्तों की सियासत नहीं करती मैं...!!

Jo dil ko achchha lagata hai usee ko dost kahatee hoon...
Munaafa dekhakar rishton kee siyaasat nahin karatee main...!!

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Frequently Asked Questions

सियासत का तबाही से गहरा ताल्लुक बताते हुए शहर जलने पर दिल्ली के मुस्कुराने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"बड़ा गहरा ताल्लुक है, सियासत का तबाही से कोई भी शहर जलता है तो दिल्ली मुस्कुराती है." — यह शायरी सियासत और तबाही के गहरे रिश्ते पर व्यंग्य करती है — कहीं भी कोई शहर जले, दिल्ली मुस्कुराती है।
लखनऊ में सियासत चलाने के अंदाज़ में अपनी गलतियां गिनाने वाले पर तंज कसने वाली शायरी कौन सी है?
"मेरी गलतियाँ वो इस तरह बताता है, जैसे लखनऊ में सियासत चलाता है." — यह शायरी किसी के गलतियां गिनाने के अंदाज़ की तुलना लखनऊ में सियासत चलाने से करते हुए एक हल्का-फुल्का तंज कसती है।
मुहब्बत के भी सियासत की तरह राहें बदलने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"कई आँखों में रहती है कई बांहें बदलती है, मुहब्बत भी सियासत की तरह राहें बदलती है..." — यह शायरी कहती है कि जिस तरह कई आँखों और बांहों के बीच सियासत राहें बदलती है, उसी तरह मुहब्बत भी अपनी राहें बदल लेती है।
क्या यह 'सियासत' शायरी संग्रह किसी खास पार्टी या नेता का नाम लेकर आलोचना करता है?
नहीं, इस संग्रह की शायरियां सियासत पर सामान्य और व्यंग्यात्मक टिप्पणी करती हैं, बिना किसी खास पार्टी या व्यक्ति का नाम लिए, जैसे: "सियासत मुल्क़ में मार काट और दंगा बेचती है... ग़रीबी पेट पालने के लिये तिरंगा बेचती है...!!" — यह सियासत को लेकर आम जनता के मोहभंग को दर्शाती एक व्यापक टिप्पणी है।
Siyasat से जुड़ी और शायरी कहाँ पढ़ें?
आप Aankh, Achchha, Delhi और Dil शायरी पढ़ सकते हैं।

Ek sher yahan yeh bhi kehta hai ki faayde ke bina rishton mein siyasat nahi chalti, dosti sirf dil dekh kar hoti hai. Aage 2 Line aur Aankh shayari bhi padhein.