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Mulk Shayari

Mulk ke liye fakhr, mulk ke liye fikar.

Mulk shayari sirf jazbaati deshbhakti tak seemit nahi - yeh Itihaas ke panno se lekar aaj ke us sach tak jaati hai jahan garibi aur beimani par bhi khule dil se sawal uthaye jaate hain.

Mulk Shayari - Fakhr Bhi, Fikar Bhi
भिगोकर खून में वर्दी कहानी दे गए अपनी

भिगोकर खून में वर्दी कहानी दे गए अपनी,
मोहब्बत मुल्क की सच्ची निशानी दे गए अपनी,
मनाते रह गए वेलेंटाइन-डे यहाँ हम तुम,
वहाँ कश्मीर में सैनिक जवानी दे गए अपनी..।
!! नमन वीर जवानो नमन !!

Bhigokar khoon mein vardee kahaanee de gae apanee,
Mohabbat mulk kee sachchee nishaanee de gae apanee,
Manaate rah gae velentain-de yahaan ham tum,
Vahaan kashmeer mein sainik javaanee de gae apanee...
!! naman veer javaano naman !!

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कुछ पन्ने इतिहास के

कुछ पन्ने इतिहास के
मेरे मुल्क के सीने में शमशीर हो गएँ,
जो लड़े, जो मरे वो शहीद हो गएँ,
जो डरे, जो झुके वो वजीर हो गएँ.

Kuchh panne itihaas ke,
Mere mulk ke seene mein shamasheer ho gaye !!
Jo lade, jo mare vo shaheed ho gaye ,
Jo dare, jo jhuke vo vajeer ho gaye !!

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वो रोटी चुरा के चोर हो गया,
लोग मुल्क खा गए, कानून लिखते लिखते !!

Vo rotee chura ke chor ho gaya,
Log mulk kha gae, kaanoon likhate likhate !!

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भूख मरती है मेरे मुल्क में नंगे पाँव

भूख मरती है मेरे मुल्क में नंगे पाँव
रिज्क़ ज़ालिम कि तिजोरी में छुपा बैठा है...।

Bhookh maratee hai mere mulk mein nange paanv
Rijq zaalim ki tijoree mein chhupa baitha hai....

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2 Line Shayari

हद है कि गैर मुल्क के बल्बों की रौशनी

हद है कि गैर मुल्क के बल्बों की रौशनी
मेरे वतन की मिट्टी के दीपक को खा गयी....

Had hai ki gair mulk ke balbon kee raushanee,
Mere watan kee mittee ke deepak ko kha gayee....

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खाली पेट वाले झंडे बेच रहे हैं साहब,
और भरे पेट वाले मुल्क.

Khaalee pet vaale jhande bech rahe hain saahab,
Aur bhare pet vaale mulk.

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सियासत मुल्क़ में मार काट और दंगा बेचती है...
ग़रीबी पेट पालने के लिये तिरंगा बेचती है...!!

Siyaasat mulq mein maar kaat aur danga bechatee hai...
Gareebee pet paalane ke liye tiranga bechatee hai...!!

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हुआ जाता है कैसे मुल्क पर कुर्बान लिख देंगे ,
हम अपने खून से घर घर में हिंदुस्तान लिख देंगे

Hua jaata hai kaise mulk par kurbaan likh denge ,
Ham apane khoon se ghar ghar mein hindustaan likh denge

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Frequently Asked Questions

सैनिकों के बलिदान को वेलेंटाइन डे से जोड़ने वाली पंक्ति क्या संदेश देती है?
"भिगोकर खून में वर्दी कहानी दे गए अपनी, मोहब्बत मुल्क की सच्ची निशानी दे गए अपनी, मनाते रह गए वेलेंटाइन-डे यहाँ हम तुम, वहाँ कश्मीर में सैनिक जवानी दे गए अपनी" पंक्ति देश के Jawan के बलिदान को याद करते हुए यह याद दिलाती है कि जब हम रोज़मर्रा के उत्सव मनाते हैं, तब सरहद पर सैनिक अपनी जवानी देश के लिए न्योछावर कर देते हैं।
इतिहास के पन्नों में शहीद और वज़ीर का फर्क यह शायरी कैसे दिखाती है?
"कुछ पन्ने Itihaas के मेरे मुल्क के सीने में शमशीर हो गएँ, जो लड़े, जो मरे वो शहीद हो गएँ, जो डरे, जो झुके वो वजीर हो गएँ" पंक्ति साहस और समर्पण को कायरता से अलग करती है — जो लड़ते हुए मरे वो हमेशा के लिए अमर हो गए, जो डर गए वो सत्ता में ज़रूर रहे मगर इतिहास में गुम हो गए।
रोटी चुराने वाला चोर और मुल्क खाने वालों पर यह शायरी कैसा व्यंग्य करती है?
"वो रोटी चुरा के चोर हो गया, लोग मुल्क खा गए, कानून लिखते लिखते" पंक्ति एक तीखा सामाजिक व्यंग्य है — यह बिना किसी खास व्यक्ति या पार्टी का नाम लिए, इस विडंबना को उजागर करती है कि छोटी चोरी करने वाला तुरंत मुजरिम बन जाता है जबकि बड़े स्तर के भ्रष्टाचार को कानून की पेचीदगियों में उलझा दिया जाता है।
भूख और गरीबी को लेकर यह शायरी क्या सामाजिक टिप्पणी करती है?
"भूख मरती है मेरे मुल्क में नंगे पाँव, रिज्क़ ज़ालिम कि तिजोरी में छुपा बैठा है" पंक्ति संसाधनों के असमान बंटवारे पर गहरी चोट करती है — जब ज़रूरतमंद भूखे रहते हैं, तो साधन कुछ मुट्ठी भर हाथों में सिमट कर रह जाते हैं।
मुल्क शायरी में बलिदान, इतिहास और सामाजिक असमानता के भाव कैसे एक साथ आते हैं?
सैनिकों के बलिदान से लेकर इतिहास के सबक और भूख-गरीबी की सच्चाई तक — यह संग्रह Kahani के रूप में मुल्क के प्रति Apneपन और ज़िम्मेदारी का एहसास कराता है।

Sarhad par shaheed hue jawano ke fakhr se lekar Apne mulk ki kamiyon tak, Ham shayari har rang mein mulk ke liye pyar dikhati hai.