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Dharti Shayari

Matribhoomi ke gaurav aur prakriti ki Hindi lines

Yeh sher dharti ko sirf zameen nahi, balidaan aur gaurav ki nishani maante hain — jahan har kan mein desh ki khushbu hai. Kuch lines Aasmaan ki taraf dekhti pyaasi zameen ki umeed bhi bayan karti hain.

Dharti Shayari – Matribhoomi Aur Desh Bhakti Ki Lines

खुशियों की सौगात लेकर , आया है एक नवम्बर ।
हर्षित है कण-कण आज , झूम रहे हैं धरती अम्बर ।।

Khushiyon kee saugaat lekar , aaya hai ek navambar .
Harshit hai kan-kan aaj , jhoom rahe hain dharatee ambar ..

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धरती हरी भरी हो तो आकाश मुस्कुराए,

ऐसा कुछ करके दिखाओ कि इतिहास जगमगाए।

Dharti haree bharee ho to aakaash muskurae,
Aisa kuchh karake dikhao ki itihaas jagamagae !!

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यह है बलिदानों की धरती, हर कोई करता है इसे सलाम।

यहां है बहती प्रेम की गंगा और हर दिल में बसता है भगवान।

Yah hai balidaanon kee dharatee,
Har koee karata hai ise salaam !!
Yahaan hai bahatee prem kee ganga,
Aur har dil mein basata hai bhagavaan !!

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क्या दिखा नही वो खून तुम्हें,
जहाँ धरती पुत्र का अंत हुआ,
सच को ये सच नही मान रहा,
लो आँखों से अँधा भक्त हुआ.

Kya dikha nahee vo khoon tumhen,
Jahaan dharatee putr ka ant hua,
Sach ko ye sach nahee maan raha,
Lo aankhon se andha bhakt hua.

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Aaj Shayari

फूल खिला दे शाखों पर, पेड़ों को फल दे मालिक,
धरती जितनी प्यासी हैं उतना तो जल दे मालिक.

Phool khila de shaakhon par, pedon ko phal de maalik,
Dharti jitni pyasi hain utana to jal de maalik.

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रंगीलो रस भरियो म्हारो प्यारो राजस्थान...
सोने री धरती जठे चाँदी रो आसमान...!!
सभी को #राजस्थान_दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं...!!

Rangeelo ras bhariyo mhaaro pyaaro raajasthaan...
Sone ree dharatee jathe chaandee ro aasamaan...!!
Sabhee ko #raajasthaan_divas kee haardik shubhakaamanaen...!!

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पाँवों के छालें तुम देखो, काँटों की जात न पूछो
बंजर धरती की पीड़ा जानो, कैसे हुई बरसात न पूछो.

Paanvon ke chhaalen tum dekho, kaanton kee jaat na poochho
Banjar dharatee kee peeda jaano, kaise huee barasaat na poochho.

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रात के अंधियारे में ,
जब तक रुतबा रहेगा चाँद का ,
कारगिल की चोटियों पर ,
तब तक फैरता रहेगा तिरंगा शान का .
धरती क्या आसमान में ,
डंका बजेगा हिंदुस्तान नाम का..!!

Raat ke andhiyare mein ,
Jab tak rutba rahega chaand ka ,
Kaaragil kee chotiyon par ,
Tab tak phairata rahega tiranga shaan ka .
dharatee kya aasamaan mein ,
Danka bajega hindustaan naam ka..!!

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तिरंगा है आन मेरी तिरंगा ही है शान मेरी

तिरंगा है आन मेरी
तिरंगा ही है शान मेरी
तिरंगा रहे सदा ऊँचा हमारा
तिरंगे से है धरती महान मेरी

Tiranga hai aan meri,
Tiranga hee hai shaan meri !!
Tiranga rahe sada uchaa hamara,
Tirange se hai dharatee mahaan meri !!

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Aasmaan Shayari

जब तक बादलों को फ़िक्र धरती की रहेगी यूँ
सूरज की तपिश से कुछ बुरा होगा नहीं इसका

Jab tak baadalon ko fikr dharatee kee rahegee yoon
Sooraj kee tapish se kuchh bura hoga nahin isaka

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Frequently Asked Questions

"धरती" संग्रह की पहली शायरी में भारत भूमि को किस रूप में महिमामंडित किया गया है?
पहली शायरी भारत की धरती को बलिदान और आस्था की भूमि बताती है - "यह है बलिदानों की धरती, हर कोई करता है इसे सलाम। यहां है बहती प्रेम की गंगा और हर दिल में बसता है भगवान।" यह धरती को वीरों की कुर्बानी, प्रेम और आस्था की त्रिवेणी के रूप में सम्मानित करती है। आसमान से जुड़ी भावुक शायरियों के लिए Aasmaan देखें।
क्या संग्रह में हरियाली और प्रगति को जोड़ने वाली कोई प्रेरणादायक शायरी है?
हाँ, एक शायरी कहती है - "धरती हरी भरी हो तो आकाश मुस्कुराए, ऐसा कुछ करके दिखाओ कि इतिहास जगमगाए।" यह प्रकृति की हरियाली और मानव की उपलब्धियों को एक-दूसरे से जोड़ते हुए कुछ बड़ा कर दिखाने की प्रेरणा देती है। हौसले से जुड़ी और शायरियों के लिए Haar भी पढ़ें।
संग्रह में किसी सामाजिक-राजनीतिक मुद्दे पर भी शायरी है?
हाँ, एक गंभीर शायरी अन्याय और अंधी निष्ठा पर सवाल उठाती है - "क्या दिखा नही वो खून तुम्हें, जहाँ धरती पुत्र का अंत हुआ, सच को ये सच नही मान रहा, लो आँखों से अँधा भक्त हुआ." यह शायरी सच्चाई को नजरअंदाज करने और आंख मूंदकर किसी विचारधारा का समर्थन करने की प्रवृत्ति पर तीखा सवाल उठाती है, बिना किसी पक्ष विशेष का नाम लिए।
क्या संग्रह में धरती की प्यास बुझाने की प्रार्थना भी शामिल है?
हाँ, एक भावुक प्रार्थना कहती है - "फूल खिला दे शाखों पर, पेड़ों को फल दे मालिक, धरती जितनी प्यासी हैं उतना तो जल दे मालिक." यह ईश्वर से प्रकृति और धरती की प्यास बुझाने, फल-फूल से भर देने की विनती करती है। काश जैसी चाहतों से जुड़ी शायरियों के लिए Kaash पढ़ें।
इस संग्रह से "धरती" शब्द के बारे में क्या व्यापक भाव मिलता है?
यह संग्रह धरती को बलिदान, प्रकृति, राजनीति और आस्था - चार अलग नजरियों से देखता है, जो इसे एक बहुआयामी और गहन संग्रह बनाता है। रोज़ के हालात पर आधारित शायरियों के लिए Aaj भी पढ़ सकते हैं।

Kargil ki chotiyon se lekar Rajasthan ki mitti tak, dharti ka gaurav har sher mein alag rang leta hai. Aaj ke jazbaat ho ya raat ka Chand, dharti ka zikr har jagah shaan se hota hai.