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Bali Shayari

Jhumkon ki khanak mein chhupa hai poora husn.

Bali shayari mein jhumkon ki khanak, kajal-bindi ka jadoo aur unki khoobsurati ka zikr milta hai, jahan har sher kisi ke husn ko naye andaaz mein bayaan karta hai. Isi husn ke zikr mein Quotes bhi padhein.

काजल, आँखे, जुल्फे, झुमके, चेहरा, होंठ,
हाए, सब हार गए तुझे बे-नकाब देख कर !!

Kaajal, aankhe, julphe, jhumake, chehara, honth,
Haye, sab haar gae tujhe be-nakaab dekh kar !!

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तेरे कानों का झुमका,
मेरे बगीचे में क्या गिरा !!
बगीचे की मिट्टी भी,
तेरी जुल्फों की खुश्बू से महक उठी !!

Tere kaanon ka jhumaka,
Mere bageeche mein kya gira !!
Bageeche kee mittee bhee,
Teree julphon kee khushboo se mahak uthee !!

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मैं तारीफ करता था उसकी बिंदी कि,
मेरे लफ़्ज़ कम पड़ गए जब उसने झुमके पहन लिए !!

Main taareeph karata tha usakee bindee ki,
Mere lafz kam pad gae jab usane jhumake pahan lie !!

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मुसीबत है जो तेरा ये झुमका गालों पे झूल गया,
कहने आया था मैं दिल की बात और भूल गया !!

Museebat hai jo tera ye jhumaka gaalon pe jhool gaya,
Kahane aaya tha main dil kee baat aur bhool gaya !!

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Sardi Shayari

झुमके से कह दो गालों को चूमना छोड़ दे,
इश्क रुस्वा हुआ तो कत्ल हजार होंगे !!

Jhumake se kah do gaalon ko choomana chhod de,
Ishk rusva hua to katl hajaar honge !!

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Frequently Asked Questions

बाली शायरी किस विषय पर आधारित है?
बाली शायरी किसी की खूबसूरती की तारीफ पर आधारित है, खासकर उसके झुमकों-बालियों, जुल्फों और चेहरे के हुस्न का जिक्र करते हुए लिखी जाती है।
झुमकों की तारीफ में लिखी शायरी में क्या खास है?
'तेरे कानों का झुमका, मेरे बगीचे में क्या गिरा!! बगीचे की मिट्टी भी, तेरी जुल्फों की खुश्बू से महक उठी!!' जैसी पंक्तियों में झुमकों के बहाने से माशूका की खूबसूरती और उसकी खुश्बू का खूबसूरत बखान किया गया है।
बिंदी और झुमकों की तारीफ साथ में क्यों की जाती है इस शायरी में?
'मैं तारीफ करता था उसकी बिंदी कि, मेरे लफ़्ज़ कम पड़ गए जब उसने झुमके पहन लिए!!' पंक्ति दिखाती है कि श्रृंगार की हर एक चीज़ - बिंदी से लेकर झुमकों तक - मिलकर हुस्न को इतना कमाल बना देती है कि तारीफ के लिए शब्द भी कम पड़ जाएं।
झुमके के झूलने पर लिखी शायरी में क्या रूमानी पल दिखाया गया है?
'मुसीबत है जो तेरा ये झुमका गालों पे झूल गया, कहने आया था मैं दिल की बात और भूल गया!!' पंक्ति में झुमके के गालों पर झूलने के मंज़र में इस कदर खो जाना दिखाया गया है कि दिल की बात कहना ही भूल जाना पड़े।
बाली शायरी के साथ कौन सा दूसरा कंटेंट पढ़ा जा सकता है?
अगर बाली और झुमकों की तारीफ वाली शायरी पसंद आई, तो इसी विषय पर लिखे बाली कोट्स भी पढ़े जा सकते हैं, जो शायरी से थोड़े अलग अंदाज़ में वही खूबसूरती बयां करते हैं।

Ek sher yahan yeh bhi kehta hai ki jhumkon ki jagah gaalon ko choomna chhod dena chahiye, warna ishq mehenga pad sakta hai. Yahan har sher kisi khaas ke husn ki tareef alag andaaz mein karta hai.