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Nazariya Shayari

Nazar nahi, nazariya badalne ki baat hai.

Nazariya shayari un sher ka sangrah hai jo batate hain ki har rang khoobsurat hota hai, bas dekhne ka nazariya sahi chahiye. Isi soch ko aur khoolti Aankh shayari bhi padhein.

Nazariya Shayari - Sochne Ka Andaz Badalne Wale Sher

नज़र तो आंख वाला डॉक्टर सुधार देता है...
नज़रिया सुधारने में जिंदगी लग जाती है...!!

Nazar to aankh vaala doktar sudhaar deta hai...
Nazariya sudhaarane mein jindagee lag jaatee hai...!!

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हर एक रंग खूबसूरत होता है साहब...
बस उसे देखने का नज़रिया चाहिए...!!

Har ek rang khoobasoorat hota hai saahab...
Bas use dekhane ka nazariya chaahie...!!

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आप का अपना होगा नज़रिया...
हमारी अपनी हक़ीक़तें हैं...!!

Aap ka apana hoga nazariya...
Hamaaree apanee haqeeqaten hain...!!

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यह नज़रिया है आजकल सबका...
खूबियाँ मेरी खामियाँ उसकी...!!

Yah nazariya hai aajakal sabaka...
Khoobiyaan meree khaamiyaan usakee...!!

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2 Line Shayari

हाँ थोड़ा मैं बदल गयी हूँ

हाँ, थोड़ा मैं बदल गयी हूँ,
कुछ तुम्हारा भी नज़रिया बदल गया...!

Haan, thoda main badal gayee hoon,
Kuchh tumhaara bhee nazariya badal gaya...!

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तेरा नज़रिया मेरे नज़रिये से अलग था

तेरा नज़रिया मेरे नज़रिये से अलग था,
शायद तुझे वक्त गुज़ारना था और मुझे जिन्दगी !!

Tera nazariya mere nazariye se alag tha,
Shaayad tujhe vakt guzaarana tha aur mujhe jindagee !!

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Frequently Asked Questions

'नज़र और नज़रिया' वाली शायरी में क्या फर्क बताया गया है?
शेर कहता है, "नज़र तो आंख वाला डॉक्टर सुधार देता है... नज़रिया सुधारने में जिंदगी लग जाती है...!!" यह आँखों की नज़र, जिसे Doctor ठीक कर सकता है, और सोच के नज़रिये के बीच के गहरे फर्क को दिखाता है - सोच बदलना आँख से देखने से कहीं ज़्यादा मुश्किल है।
'हर रंग खूबसूरत होता है' वाली शायरी में नज़रिये को लेकर क्या सीख है?
शेर कहता है, "हर एक रंग खूबसूरत होता है साहब... बस उसे देखने का नज़रिया चाहिए...!!" यह सिखाती है कि खूबसूरती चीज़ों में नहीं, बल्कि उन्हें देखने के हमारे अपने नज़रिये में छिपी होती है।
'अपना नज़रिया, अपनी हक़ीक़त' वाली शायरी का क्या भाव है?
शेर कहता है, "आप का अपना होगा नज़रिया... हमारी अपनी हक़ीक़तें हैं...!!" यह हर इंसान के अलग नज़रिये और उसकी अपनी सच्चाई को स्वीकार करने की परिपक्व सोच दिखाता है, बिना किसी पर अपनी राय थोपे।
'खूबियाँ मेरी, खामियाँ उसकी' वाली शायरी में किस आम आदत पर तंज़ है?
शेर कहता है, "यह नज़रिया है आजकल सबका... खूबियाँ मेरी खामियाँ उसकी...!!" यह उस आम इंसानी आदत पर तंज़ करता है जहाँ लोग खुद की अच्छाइयां और दूसरों की बुराइयां ही देखने का नज़रिया रखते हैं।
नज़रिया शायरी छोटी और दो-पंक्ति वाली भी मिलती है?
हाँ, इस विषय की ज़्यादातर शायरियाँ दो पंक्तियों में गहरी बात कहती हैं, जैसे ऊपर के उदाहरण दिखाते हैं। ऐसी और संक्षिप्त रचनाएं 2 Line सेक्शन में मिलेंगी।

Kuch lines yahan do logon ke alag-alag nazariye ki baat karti hain, jo waqt ke saath badalte rehte hain. Aage padhein Chaah aur 2 Line shayari bhi.