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Milavat Shayari

When even love and ink come mixed with something else.

Milavat shayari treats adulteration as a mood as much as a fact — ink mixed with tears, love that isn't as pure as it claims, relationships decorated on the outside while selfishness sits underneath. It carries the same disillusioned tone as our Daur shayari.

Milavat Shayari - Hindi Lines on a World Full of Impurity

मेरे ख़त में जो भीगी भीगी सी लिखावट है,
स्याही में थोड़ी सी मेरे अश्कों की मिलावट है।

Mere khat mein jo bheegee bheegee see likhaavat hai,
Syaahee mein thodee see mere ashkon kee milaavat hai.

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नहीं पसंद मोहब्बत में मिलावट मुझको,
अगर वो मेरा है तो ख्वाब भी बस मेरे देखे।

Nahi Pasand Mohabbat Mein Milawat Mujhko,
Agar Wo Mera Hai To Khwab Bhi Bas Mere Dekhe.

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शहद सी मीठी है तेरी कलम , जरूर तेरी
श्याही में सियासत की मिलावट होगी।

Shahad se mithi hai trei kalam
Shyahi me siyasat ki milavat hogi !!

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मिलावट का दौर है साहिब..
हाँ में हाँ मिला दिया करो !!

Milawat ka daur hai saahib..
Haan mein haan mila diya karo !!

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2 Line Shayari

बुराई का रूप अब भ्रष्ट्राचार है

बुराई का रूप अब भ्रष्ट्राचार है,
रावण के रूप में नेताओं का अत्याचार हैं !!
देश रूपी इस लंका में कौन राम बनेगा,
यहाँ तो अब बस मिलावटी व्यवहार हैं !!

Buraee ka roop ab bhrashtraachaar hai,
Raavan ke roop mein netaon ka atyaachaar hain !!
Desh roopee is lanka mein kaun raam banega,
Yahaan to ab bas milaavatee vyavahaar hain !!

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रिश्तो की जमावट आज कुछ इस तरह हो रही है

रिश्तो की जमावट आज कुछ इस तरह हो रही है,
बहार से अच्छी सजावट और अन्दर से स्वार्थ की मिलावट हो रही है!!

Rishto kee jamaavat aaj kuchh is tarah ho rahee hai,
Bahaar se achchhee sajaavat aur andar se svaarth kee milaavat ho rahee hai!!

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छोडो अब ये मुहोब्बत की बातें..
मिलावट की दुनियां में प्यार भी कुछ मिलावटी सा हैं।

Chhodo ab ye muhobbat kee baaten..
Milaavat kee duniyaan mein pyaar bhee kuchh milaavatee sa hain.

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मिलावट का जमाना है साहिब

मिलावट का जमाना है साहिब,
कभी हमारी हाँ में हाँ भी मिला दिया करो...!

Milaavat ka jamaana hai saahib,
Kabhee hamaaree haan mein haan bhee mila diya karo...!

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अब तो इतवार में भी कुछ यूँ हो गयी है मिलावट.
छुट्टी तो दिखती है पर सुकून नजर नहीं आता.

Ab to itavaar mein bhee kuchh yoon ho gayee hai milaavat.
Chhuttee to dikhatee hai par sukoon najar nahin aata.

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Baatein Shayari

तुम तो चाहत का समंदर हुआ करते थे

तुम तो चाहत का समंदर हुआ करते थे ,
किस से सीख लिया मोहब्बत में मिलावट करना...!!

Tum to chaahat ka samandar hua karate the ,
Kis se seekh liya mohabbat mein milaavat karana...!!

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ये मिलावट का दौर हैं "साहब"..यहा
इल्जाम लगायें जाते हैं तारिफों के लिबास में..।।

Ye milaavat ka daur hain "saahab"..yaha
Iljaam lagaayen jaate hain taariphon ke libaas mein....

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बाँधा तो था हमने भी,एक धागा उनके नाम का.....
पर वो भी कच्चा निकला,मिलावट के इस दौर मे !

Baandha to tha hamane bhee,ek dhaaga unake naam ka.....
Par vo bhee kachcha nikala,milaavat ke is daur me !

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मिलावट है तेरे इश्क़ में इत्र और शराब की..
कभी हम महक जाते हैं तो कभी बहक जाते हैं!!

Milaavat hai tere ishq mein itr aur sharaab kee..
Kabhee ham mahak jaate hain to kabhee bahak jaate hain!!

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Frequently Asked Questions

मिलावट शायरी में कलम और सियासत को कैसे जोड़ा गया है?
यह शेर तारीफ के अंदाज़ में एक तंज भी छुपाए हुए है, यह कहते हुए कि इतनी मीठी और चतुर लेखनी में जरूर थोड़ी सियासत घुली होगी। पंक्ति है, "शहद सी मीठी है तेरी कलम, जरूर तेरी श्याही में सियासत की मिलावट होगी।" यह Baatein में छुपी चालाकी पर एक हल्का लेकिन तीखा इशारा है।
मोहब्बत में मिलावट न पसंद करने वाला शेर क्या कहता है?
यह शेर मोहब्बत में पूरी शुद्धता और वफादारी की मांग करता है, बिना किसी और के ख्याल की मिलावट के। पंक्ति है, "नहीं पसंद मोहब्बत में मिलावट मुझको, अगर वो मेरा है तो ख्वाब भी बस मेरे देखे।" यह अधिकार और भरोसे की गहरी भावना को दर्शाता है।
आँसुओं की मिलावट स्याही में होने वाली पंक्ति का क्या भाव है?
यह एक बेहद भावुक पंक्ति है, जहाँ ख़त लिखते वक्त गिरे आँसू स्याही में घुल जाते हैं, और लिखावट खुद ही दर्द की गवाही बन जाती है। शेर है, "मेरे ख़त में जो भीगी भीगी सी लिखावट है, स्याही में थोड़ी सी मेरे अश्कों की मिलावट है।" यह भावनात्मक गहराई असली दर्द को शब्दों से भी ज्यादा सच्चाई से बयां कर देती है।
"मिलावट का दौर है" वाला शेर आज के समाज पर क्या टिप्पणी करता है?
यह शेर उस चलन पर व्यंग्य करता है जहाँ लोग अपनी राय छोड़कर सिर्फ भीड़ के साथ हाँ में हाँ मिलाते हैं। पंक्ति है, "मिलावट का दौर है साहिब.. हाँ में हाँ मिला दिया करो !!" यह Daur यानी आज के दौर की एक कड़वी सच्चाई है, जिसे Ham में से बहुत से लोग रोज़ जीते हैं।
क्या मिलावट शायरी सिर्फ भ्रष्टाचार या राजनीति के बारे में है?
नहीं, यह विषय मोहब्बत की शुद्धता से लेकर आँसुओं में डूबी लिखावट और समाज की चापलूसी तक, कई अलग-अलग रूपों में मिलावट को दिखाता है। हर शेर अपने-अपने अंदाज़ में यह बताता है कि असली और मिलावटी के बीच फर्क पहचानना कितना जरूरी है।

Even rest and routine don't escape it here — a Sunday that looks like a holiday but never quite feels like peace. Continue with Baatein shayari or Haar shayari.