Logo - Feel The Words

Khanjar Shayari

Kabhi haathon mein khanjar, kabhi shabdon mein hi vaar chhupa hota hai.

Khanjar shayari mein sawaal uthta hai ki agar tu dost hai to haath mein khanjar kyun hai, aur agar dushman hai to sar kyun nahi jaata. Isi sawaal mein Dost shayari bhi padhein.

अगर तू दोस्त हैं तो फिर ये खंजर क्यूँ हैं हाथो में,
अगर दुश्मन हैं तो आख़िर मेरा सिर क्यूँ नही जाता.

Agar too dost hain to phir ye khanjar kyoon hain haatho mein,
Agar dushman hain to aakhir mera sir kyoon nahee jaata.

Read more...

गजब की जिन्दगी होती है शायरी लिखना...
खुद के खंजर से खुद की खुदाई करना...

Gajab kee jindagee hotee hai shaayaree likhana...
Khud ke khanjar se khud kee khudaee karana...

Read more...

कई बार रक़ीबों ने मारे मुझे खंज़र
हर बार मैंने हँसकर ख़ुद को सँवारा है

Kaee baar raqeebon ne maare mujhe khanzar
Har baar mainne hansakar khud ko sanvaara hai

Read more...

कलम हाथ मेँ है, खंजर की क्या जरुरत है...
पढ़ा लिखा हूँ, सलीके से कत्ल करता हूँ...

Kalam haath men hai, khanjar kee kya jarurat hai...
Padha likha hoon, saleeke se katl karata hoon...

Read more...

Frequently Asked Questions

खंजर शायरी में दोस्त और दुश्मन का जो सवाल उठाया गया है, उसका मतलब क्या है?
यह शायरी उस उलझन को बयां करती है जब कोई अपना होकर भी दुश्मन जैसा बर्ताव करे- 'अगर तू दोस्त हैं तो फिर ये खंजर क्यूँ हैं हाथो में' पंक्ति में यही दर्द झलकता है। यह असल हथियार नहीं बल्कि रिश्तों में छिपे धोखे और भरोसे के टूटने का प्रतीक है, जिसे Dost और Dushman शायरी में भी अलग-अलग रंगों में देखा जा सकता है।
क्या खंजर शायरी सिर्फ दुश्मनी की बात करती है?
नहीं, कुछ पंक्तियाँ आत्म-चिंतन की भी हैं, जैसे 'खुद के खंजर से खुद की खुदाई करना' जो शायरी लिखने की उस पीड़ादायक प्रक्रिया को दर्शाती है जहाँ शायर खुद अपने अंदर झांककर लिखता है। यह दिखाता है कि खंजर शब्द यहाँ भावनाओं की गहराई खोदने का रूपक बनकर आता है।
रक़ीबों वाली पंक्ति में शायर किस भाव को दिखाता है?
'कई बार रक़ीबों ने मारे मुझे खंज़र, हर बार मैंने हँसकर ख़ुद को सँवारा है' पंक्ति हौसले और आत्म-सुधार की बात करती है, जहाँ शायर हर चोट के बाद और मज़बूत होकर उभरता है। यह प्रतिद्वंद्विता के बावजूद मुस्कुराते रहने के जज़्बे को बयां करती है।
कलम और खंजर की तुलना करने वाली शायरी का क्या अर्थ है?
'कलम हाथ मेँ है, खंजर की क्या जरुरत है... पढ़ा लिखा हूँ, सलीके से कत्ल करता हूँ' पंक्ति बताती है कि पढ़े-लिखे इंसान के लिए शब्द ही सबसे तीखा हथियार हैं, हाथों में खंजर की जरूरत नहीं। यह Kalam शायरी की तरह कलम की ताकत को दर्शाने वाली सोच है।
खंजर पर लिखी शायरियाँ ज़्यादातर किस अंदाज़ में मिलती हैं?
इनमें से कई शायरियाँ छोटी और सीधी चोट करने वाली हैं, जैसे रक़ीबों और हौसले वाली पंक्तियाँ 2 Line शायरी के अंदाज़ में लिखी गई हैं। हाथ, धोखा और हौसले जैसे भावों को कुछ शब्दों में गहराई से पिरोया गया है, इसलिए इन्हें Haath शायरी के साथ भी जोड़कर पढ़ा जा सकता है।

Ek sher yahan rakibon ke baar-baar khanjar maarne ke baad bhi hansi ke saath khud ko sanwaarne ki baat karta hai, to doosra kalam ko hi apna hathiyaar batakar salike se baat kehne ka daawa karta hai. Aage Haath aur Dushman shayari bhi padhein.