अगर तू दोस्त हैं तो फिर ये खंजर क्यूँ हैं हाथो में
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अगर तू दोस्त हैं तो फिर ये खंजर क्यूँ हैं हाथो में,
अगर दुश्मन हैं तो आख़िर मेरा सिर क्यूँ नही जाता.
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अगर तू दोस्त हैं तो फिर ये खंजर क्यूँ हैं हाथो में,
अगर दुश्मन हैं तो आख़िर मेरा सिर क्यूँ नही जाता.
Agar too dost hain to phir ye khanjar kyoon hain haatho mein,
Agar dushman hain to aakhir mera sir kyoon nahee jaata.
