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Ghulam Shayari

Willingly bound by love, proudly free from tyranny.

Ghulam shayari leans into an old metaphor — being a willing slave to love, words obedient to the pen, freedom traded for someone's presence. It sits alongside our Dil shayari as verses about surrender rather than defeat.

Ghulam Shayari - Hindi Lines on Love's Sweet Slavery

ऐसा कभी सोचा न था कि ये अंजाम होगा,
एक वक्त का बादशाह आज गुलाम होगा.

Aisa kabhee socha na tha ki ye anjaam hoga,
Ek vakt ka baadashaah aaj gulaam hoga.

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गुलामी के दाग हटाना कोई पाप नही,
हमे #गर्व है मन मे कोई पश्चाताप नही !!

#शोर्यदिवस🚩

Gulami ke daag hataana koee paap nahee,
Hame #garv hai man me koee pashchaataap nahee !!

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ज़ालिम ने दिल उस वक़्त तोडा,
जब हम उसके गुलाम हो गए।

Zaalim ne dil us vaqt toda,
Jab ham usake gulaam ho gae.

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दूसरे के महल में गुलामी करने से बे‍हतर है....
कि इंसान अपनी झोपड़ी में हुकूमत करे...!!

Doosare ke mahal mein gulaamee karane se be‍hatar hai....
Ki insaan apanee jhopadee mein hukoomat kare...!!

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Aaj Shayari

इश्क और मेरी बनती नहीं है साहब,
वो गुलामी चाहता है और मै बचपन से आजाद हूँ..

Ishk aur meree banatee nahin hai saahab,
Vo gulaamee chaahata hai aur mai bachapan se aajaad hoon..

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शायरी का बादशाह हुं और कलम मेरी रानी,
अल्फाज़ मेरे गुलाम है, बाकी रब की महेरबानी ।

Shaayaree ka baadashaah hun aur kalam meree raanee,
Alphaaz mere gulaam hai, baakee rab kee maherabaanee .

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हर कोई यहाँ किसी न किसी पार्टी के विचारो का गुलाम हैं

हर कोई यहाँ किसी न किसी पार्टी के विचारो का गुलाम हैं,
इसलिए भारत का ये हाल हैं, किसान बेहाल हैं. नेता माला-माल हैं.

Har koee yahaan kisee na kisee paartee ke vichaaro ka gulaam hain,
Isalie bhaarat ka ye haal hain, kisaan behaal hain. neta maala-maal hain.

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गुलाब, ख्वाब, दवा, ज़हर, जाम क्या क्या हैं
में आ गया हु बता इंतज़ाम क्या क्या हैं

फ़क़ीर, शाह, कलंदर, इमाम क्या क्या हैं
तुझे पता नहीं तेरा गुलाम क्या क्या हैं

Gulab, khwab, dwa, jahar, jaam, kya kya hain
mein aa gay hun bata intzaam kya kya hain

Fakir, shaah, kalndar, imaam, kya kya hain
Tujhe pata nahi tera gulam kya kya hain

Rahat Indori

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गुलाम बने इस देश को आजाद तुमने कराया है
सुरक्षित जीवन देकर तुमने कर्ज अपना चुकाया है
दिल से तुमको नमन हैं करते
ये आजाद वतन जो दिलाया है

Gulaam bane is desh ko aajaad tumane karaaya hai,
Surakshit jeevan dekar tumane karj apana chukaaya hai !!
Dil se tumako naman hain karate,
Ye aajaad vatan jo dilaaya hai !!

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Chaah Shayari

अधिकार मिलते नहीं लिए जाते हैं

अधिकार मिलते नहीं लिए जाते हैं
आजाद हैं मगर गुलामी किये जाते हैं
वंदन करो उन सेनानियों को
जो मौत के आँचल में जिए जाते हैं

Adhikaar milate nahin lie jaate hain,
Aajaad hain magar gulaamee kiye jaate hain !!
Vandan karo un senaaniyon ko,
Jo maut ke aanchal mein jie jaate hain !!

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तेरे कूचे में जो आया है ग़ुलामों की तरह,
अपनी बस्ती का सिकंदर भी तो हो सकता है !!

Tere kooche mein jo aaya hai gulaamon kee tarah,
Apanee bastee ka sikandar bhee to ho sakata hai !!

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मेरी रूह गुलाम हो गई है तेरे इश्क़ में शायद...
वरना यूँ छटपटाना मेरी आदत तो ना थी..

Meree rooh gulaam ho gaee hai tere ishq mein shaayad...
Varana yoon chhatapataana meree aadat to na thee..

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लोग कहते हैं कि वक्त किसी का गुलाम नहीं होता

लोग कहते हैं कि वक्त किसी का गुलाम नहीं होता,
फिर क्यों तेरी मुस्कुराहट पर ये थम सा जाता है !!

Log kahate hain ki vakt kisee ka gulaam nahin hota,
Phir kyon teree muskuraahat par ye tham sa jaata hai !!

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Frequently Asked Questions

गुलाम शायरी में बादशाह के गुलाम बन जाने की बात का क्या मतलब होता है?
गुलाम शायरी में बादशाह के गुलाम बन जाने की बात का मतलब यह है कि वक्त और मोहब्बत दोनों इतने ताकतवर होते हैं कि एक वक्त का बादशाह भी किसी के आगे झुक सकता है, जैसे “एक वक्त का बादशाह आज गुलाम होगा” पंक्ति में कहा गया है। दिल की इस मजबूरी और झुकाव को समझने के लिए Dil शायरी भी पढ़ी जा सकती है।
गुलामी के दाग हटाने वाली शायरी में क्या जोश झलकता है?
गुलामी के दाग हटाने वाली शायरी में एक गर्व और जोश झलकता है, जिसमें कोई पश्चाताप नहीं बल्कि आज़ादी और आत्मसम्मान की बात होती है, जैसे “गुलामी के दाग हटाना कोई पाप नही, हमे गर्व है मन मे कोई पश्चाताप नही” पंक्ति में दिखता है। ऐसे जोशीले भावों से भरी हिंदी शायरी के लिए Hindi शायरी का कलेक्शन भी देखा जा सकता है।
अल्फाज़ मेरे गुलाम हैं जैसी पंक्ति का शायरी में क्या मतलब है?
“अल्फाज़ मेरे गुलाम हैं” जैसी पंक्ति का मतलब यह है कि शायर अपने शब्दों पर पूरा हक और काबू रखता है, यानी वो अपनी कलम से जो चाहे लिखवा सकता है, जैसे “शायरी का बादशाह हुं और कलम मेरी रानी, अल्फाज़ मेरे गुलाम है” पंक्ति में कहा गया है। हम जैसे आम पढ़ने वालों के लिए भी यह आत्मविश्वास प्रेरणा देता है, इसके लिए Ham शायरी भी पढ़ी जा सकती है।
दूसरे के महल में गुलामी करने से बेहतर अपनी झोपड़ी में हुकूमत वाली शायरी क्या सिखाती है?
दूसरे के महल में गुलामी करने से बेहतर अपनी झोपड़ी में हुकूमत वाली शायरी यह सिखाती है कि आज़ादी और आत्मसम्मान किसी भी सुख-सुविधा से ज्यादा कीमती है, जैसे “दूसरे के महल में गुलामी करने से बे‍हतर है कि इंसान अपनी झोपड़ी में हुकूमत करे” पंक्ति में कहा गया है। अपनी चाहत और शर्तों पर जीने की इस चाह को समझने के लिए Chaah शायरी भी पढ़ी जा सकती है।
गुलाम शायरी किस मूड में या किन मौकों पर पढ़ी जाती है?
गुलाम शायरी उस मूड में पढ़ी या शेयर की जाती है जब कोई अपने आत्मसम्मान, आज़ादी या गुरूर को शब्दों में जताना चाहता है, न कि किसी की गुलामी या दबाव में जीना चाहता है। आज के दौर में भी आत्मसम्मान से जुड़ी ऐसी बातें उतनी ही असरदार लगती हैं, इसके लिए Aaj शायरी भी पढ़ी जा सकती है।

A second thread here honors India's fight to break real chains of subjugation, saluting those who freed the nation. Read more under Chaah shayari or Ham shayari.