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Dhool Shayari

Even dust can carry devotion.

Dhool shayari finds meaning in what storms leave behind — misunderstandings washed away by rain, and the old idea of being as humble as dust at someone's feet. It shares its devotional side with Aaj Shayari.

Dhool Shayari - Charno Ki Dhool Wali Shayari

खूब हौसला बढ़ाया आँधियों ने धूल का,
मगर दो बूँद बारिश ने औकात बता दी।

Khoob Hausla Barhaya Aandhiyon Ne Dhool Ka,
Magar Do Boond Barish Ne Aukaat Bata Di.

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सुना है बहुत बारिश हुई है तुम्हारे शहर में
ज्यादा भीगना मत
अगर धूल गई सारी गलतफहमियां
तो बहुत याद आयेंगे हम !!

sunaa hai bahut baarish hui hai tumhaare shahar men
jyaadaa bhignaa mat
agar dhul gayi saari galataphahamiyaan
to bahut yaad aayenge ham...

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आप बागों के सबसे हसीं गुल हैं,
हम तो बस आपके कदमों की धूल हैं,
अब ज्यादा गुरुर मत करना क्योंकि आज अप्रैल फूल है…

Aap baagon ke sabase haseen gul hain,
Ham to bas aapake kadamon kee dhool hain,
Ab jyaada gurur mat karana kyonki aaj aprail phool hai…

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नंदा सुनंदा अब किसी का, नाम नही है
गौ धूलि-गौ बेला की सुबह, शाम नहीं है !!
जिसको कहा था कामधेनु, हमने किसी दिन
उस गाय का अब कौंड़ियों में, दाम नहीं है !!

Nanda sunanda ab kisee ka, naam nahee hai
Gau dhooli-gau bela kee subah, shaam nahin hai !!
Jisako kaha tha kaamadhenu, hamane kisee din
Us gaay ka ab kaundiyon mein, daam nahin hai !!

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2 Line Shayari

आशिक़ों के महबूब के पैरो की धूल हूँ

आशिक़ों के महबूब के पैरो की धूल हूँ
हाँ मैं एक लाल गुलाब का फूल हूँ !!

Aashiqon ke mahaboob ke pairo kee dhool hoon
Haan main ek laal gulaab ka phool hoon !!

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सारा जहां है जिसकी शरण में

सारा जहां है जिसकी शरण में,
नमन है उस माँ के चरण में,
हम है उस माँ के चरणों की धूल,
आओ मिलकर चढ़ाएं माँ को श्रद्धा के फूल। शुभ नवरात्रि.

Saara jahaan hai jisakee sharan mein,
Naman hai us maan ke charan mein,
Ham hai us maan ke charanon kee dhool,
Aao milakar chadhaen maan ko shraddha ke phool. shubh navaraatri.

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हे महाकाल धूल तेरे चरणों की चन्दन और अबीर बनी

हे महाकाल, धूल तेरे चरणों की चन्दन और अबीर बनी,
जिसने भी लगाई मस्तक से उसकी बिगड़ी तकदीर बनी।

He mahaakaal, dhool tere charanon kee chandan aur abeer banee,
Jisane bhee lagaee mastak se usakee bigadee takadeer banee.

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धूल चटा दो गिद्धों को जो घर में घुसकर घात करें
और जीभ काट लो कुत्तों की जो हिंदुत्व के खिलाफ बात करें !

Dhool chata do giddhon ko jo ghar mein ghusakar ghaat karen
Aur jeebh kaat lo kutton kee jo hindutv ke khilaaph baat karen !

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क़दम उठे हैं तो धूल आसमान तक जाए

क़दम उठे हैं तो धूल आसमान तक जाए...
चले चलो कि जहाँ तक भी ये सड़क जाए...!!

Qadam uthe hain to dhool aasamaan tak jae...
Chale chalo ki jahaan tak bhee ye sadak jae...!!

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Aaj Shayari

गुज़रे लम्हों की धूल उड़ती है,
इस हवेली में अब रखा क्या है.

Guzare lamhon kee dhool udatee hai,
Is havelee mein ab rakha kya hai.

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इस बार बरस जाए ईमान की बारिश...
लोगों के ज़मीर पर धूल बहुत है...

Is baar baras jae eemaan kee baarish...
Logon ke zameer par dhool bahut hai...

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दिल साफ़ करके मुलाक़ात की आदत डालो...
धूल हटती है तो आईने भी चमक उठते हैं...!!

Dil saaf karake mulaaqaat kee aadat daalo...
Dhool hatatee hai to aaeene bhee chamak uthate hain...!!

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Frequently Asked Questions

आँधी और बारिश वाली धूल शायरी में क्या सीख है?
"खूब हौसला बढ़ाया आँधियों ने धूल का, मगर दो बूँद बारिश ने औकात बता दी।" पंक्तियों में घमंड और असलियत के बीच का फर्क बड़ी खूबसूरती से दिखाया गया है — तूफानों ने भले ही धूल को ऊँचा उड़ाया, पर बारिश की चंद बूँदों ने उसे ज़मीन पर ला दिया। यह भाव Attitude शायरी में घमंड पर लिखी बातों से मेल खाता है।
'तुम्हारे शहर में बारिश' वाली धूल शायरी में क्या भाव छुपा है?
"सुना है बहुत बारिश हुई है तुम्हारे शहर में, ज्यादा भीगना मत, अगर धूल गई सारी गलतफहमियां तो बहुत याद आयेंगे हम !!" पंक्तियों में एक मीठी चिंता और याद का मिश्रण है — यहाँ धूल का धुल जाना गलतफहमियों के मिट जाने का प्रतीक है, जिसके बाद बिछड़े हुए फिर से याद आने लगते हैं।
अप्रैल फूल वाली धूल शायरी किस अंदाज़ में लिखी गई है?
यह शायरी छेड़छाड़ भरे अंदाज़ में लिखी गई है — "आप बागों के सबसे हसीं गुल हैं, हम तो बस आपके कदमों की धूल हैं, अब ज्यादा गुरुर मत करना क्योंकि आज अप्रैल फूल है…" यहाँ तारीफ़ के बाद हल्के मज़ाक में उसे नीचा दिखाया गया है, जो April शायरी के चंचल अंदाज़ से मेल खाता है।
'पैरों की धूल' वाली शायरी में प्रेम को कैसे दिखाया गया है?
"आशिक़ों के महबूब के पैरो की धूल हूँ, हाँ मैं एक लाल गुलाब का फूल हूँ !!" पंक्तियों में प्रेम में विनम्रता और समर्पण को खूबसूरती से दिखाया गया है — खुद को महबूब के कदमों की धूल कहना, फिर भी खुद की तुलना गुलाब के फूल से करना, यह प्रेम की गहराई और गर्व दोनों को एक साथ बयान करता है।
इस 'धूल' शायरी संग्रह में धूल के कितने प्रतीकात्मक इस्तेमाल हैं?
यह संग्रह धूल को एक बहुरूपी प्रतीक की तरह इस्तेमाल करता है — कभी घमंड की असलियत दिखाने के लिए, कभी बीती यादों और गलतफहमियों के मिटने के लिए, तो कभी प्रेम में विनम्रता जताने के लिए। यह रचनात्मकता Ham शायरी के व्यापक भाव-संसार जैसी ही समृद्ध है।

A playful April Fool's line and a nostalgic nod to rural mornings round out the mix. Browse April Shayari or Attitude Shayari for more variety.