Logo - Feel The Words

Thikana Shayari

Har dil ko chahiye ek apna sa thikana.

Thikana shayari mein kabhi hansi ke thikanon ki baat hoti hai to kabhi zaroorton ka naya thikana dhoondhne ki. Isi safar mein Bastee shayari bhi padhein.

सुकून भरी इतवार सी थी,
बातों के बाज़ार सी थी !!
थी ठिकाना हंसी ठहाकों की,
एक सहेली मेरी ढाल सी थी !!

Sukoon bharee itavaar see thee,
Baaton ke baazaar see thee !!
Thee thikaana hansee thahaakon kee,
Ek sahelee meree dhaal see thee !!

Read more...

तुमसे मुहब्बत करने वालों का बस आगरा है ठिकाना,
मिल जाओ तो ताजमहल नहीं मिलो तो पागलखाना।

Tumase muhabbat karane vaalon ka bas aagara hai thikaana,
Mil jao to taajamahal nahin milo to paagalakhaana.

Read more...

उजरल घर में अब केके ढूँढ़त बाड. तु !
बरबाद भईला पर ओकर ठिकाना ना रहेला !!

Ujaral ghar mein ab keke dhoondhat baad. tu !
Barabaad bheela par okar thikaana na rahela !!

Read more...

ज़रूरतों ने उनकी कोई और ठिकाना ढूंढ लिया शायद

ज़रूरतों ने उनकी, कोई और ठिकाना ढूंढ लिया शायद,
एक अरसा हो गया, मुझे हिचकी नहीं आई...!

Zarooraton ne unakee, koee aur thikaana dhoondh liya shaayad,
Ek arasa ho gaya, mujhe hichakee nahin aaee...!

Read more...

2 Line Shayari

अजीब सी बस्ती में ठिकाना है मेरा
जहाँ लोग मिलते कम, झांकते ज़्यादा है...

Ajeeb see bastee mein thikaana hai mera
Jahaan log milate kam, jhaankate zyaada hai...

Read more...

अजीब सी बस्ती में ठिकाना है मेरा जिसे वो 'शहर' कहते हैं...
जहाँ लोग मिलते कम, झाँकते ज्यादा हैं....

Ajeeb see bastee mein thikaana hai mera jise vo shahar kahate hain...
Jahaan log milate kam, jhaankate jyaada hain....

Read more...

Frequently Asked Questions

"ठिकाना" शायरी में यह शब्द किस भावना को दर्शाता है?
ठिकाना का मतलब सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि वह सुकून भरा एहसास भी है जो किसी अपने के साथ मिलता है। एक पंक्ति कहती है, "सुकून भरी इतवार सी थी, बातों के बाज़ार सी थी!! थी ठिकाना हंसी ठहाकों की, एक सहेली मेरी ढाल सी थी!!" यहाँ एक सहेली को ही असली ठिकाना बताया गया है, ठीक वैसे जैसे Itavaar की शायरी में इतवार की फुरसत को सुकून का प्रतीक माना जाता है।
आगरा और ताजमहल वाला मशहूर मुहब्बत का शेर क्या है?
यह एक चुलबुला और मशहूर शेर है, "तुमसे मुहब्बत करने वालों का बस आगरा है ठिकाना, मिल जाओ तो ताजमहल नहीं मिलो तो पागलखाना।" यह पंक्ति मोहब्बत की दीवानगी को हल्के-फुल्के, थोड़े Ajeeb अंदाज़ में पेश करती है।
भोजपुरी में लिखी ठिकाना शायरी किस हाल का जिक्र करती है?
एक भोजपुरी शेर बर्बादी और बेघर होने की पीड़ा बयां करता है, "उजरल घर में अब केके ढूँढ़त बाड़ तु! बरबाद भईला पर ओकर ठिकाना ना रहेला!!" यह पंक्ति उस उजड़े Ghar की बात करती है जहाँ अब कोई ठिकाना बाकी नहीं बचा।
"जरूरतों ने कोई और ठिकाना ढूंढ लिया" पंक्ति का क्या भाव है?
यह पंक्ति उस भावनात्मक दूरी को दर्शाती है जब कोई अपनी जरूरतों के लिए किसी और की तरफ मुड़ जाता है। शेर है, "जरूरतों ने उनकी, कोई और ठिकाना ढूंढ लिया शायद, एक अरसा हो गया, मुझे हिचकी नहीं आई...!" यह गहरी उदासी और अनदेखे किए जाने के एहसास को बड़ी सादगी से बयां करता है।
क्या ठिकाना शायरी सिर्फ घर तक सीमित है या रिश्तों तक भी फैली है?
नहीं, यह शायरी घर से आगे बढ़कर दोस्ती, मोहब्बत और भरोसे तक फैली हुई है, जहाँ एक इंसान भी किसी का ठिकाना बन जाता है। इसी तरह की भावनाएं Bastee से जुड़ी शायरी में भी देखने को मिलती हैं, जहाँ जगह से ज्यादा अपनों का साथ मायने रखता है।

Ek sher yahan ajeeb si basti mein akele rehne ke ehsaas ko bhi bayaan karta hai. Aage Ajeeb aur Ghar shayari bhi padhein.