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Kohra Shayari

Dimaag ki batti jal bhi jaaye, agyanta ka kohra phir bhi nahi chhatta.

Kohra shayari mein agyanta ko kohre se joda gaya hai, jo dimaag ki batti jalte hue bhi kuch bigaad nahi pata. Isi soch mein Badal shayari bhi padhein.

जला जो दिल से होता है ...बुझा रहता है उसका चेहरा ..
जब जल रही हो दिमाग की बत्ती...
तो क्या करेगा अज्ञानता का कोहरा..

Jala jo dil se hota hai ...bujha rahata hai usaka chehara ..
Jab jal rahee ho dimaag kee battee...
To kya karega agyaanata ka kohara..

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जब उठेगी हिन्दू तलवार कोहराम ही मच जाएगा
इतिहास की तुम चिंता ना करो पूरा भुगोल ही बदल जाएगा !

Jab uthegi hindu talavaar koharaam hi mach jaega,
Itihaas ki tum chinta na karo poora bhugol hi badal jaega !!

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Frequently Asked Questions

'कोहरा' शायरी कलेक्शन में किस तरह का रूपक इस्तेमाल हुआ है?
इस कलेक्शन में कोहरे को अज्ञानता के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया गया है। जैसे लिखा है, 'जब जल रही हो दिमाग की बत्ती... तो क्या करेगा अज्ञानता का कोहरा' — यानी अगर सोच रोशन हो तो अज्ञानता का कोहरा टिक नहीं सकता। Dimaag कलेक्शन में सोच और समझ से जुड़ी और शायरियां मिलेंगी।
दिल के जलने और चेहरे पर उसके असर को लेकर क्या कहा गया है?
एक पंक्ति कहती है, 'जला जो दिल से होता है ...बुझा रहता है उसका चेहरा' — यानी अंदर की तकलीफ अक्सर चेहरे पर उदासी बनकर दिख जाती है, भले ज़ुबान से कुछ न कहा जाए। Chehara कलेक्शन में चेहरे से जुड़ी और भावुक शायरियां हैं।
क्या इसमें कोई धार्मिक-राजनीतिक भाव वाली शायरी भी है?
हां, एक तीखी पंक्ति कहती है, 'जब उठेगी हिन्दू तलवार कोहराम ही मच जाएगा, इतिहास की तुम चिंता ना करो पूरा भुगोल ही बदल जाएगा' — यह एक जोशीले और आक्रामक अंदाज़ में लिखी गई शायरी है। इसी भाव से जुड़ी शायरियों के लिए Bhagwa कलेक्शन देखें।

Ye sher aage poochta hai ki dil se jalne wale ka chehra aakhir bujha kyun rehta hai, ek gehra falsafa liye. Aage Chehara aur 2 Line shayari bhi padhein.