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Jurm Shayari

Ishq ho jaaye to jurm bhi pyaara lagta hai.

Yahan jurm ka matlab kisi cheez ka bura hona nahi, balki khoobsurat hone ya dil de baithne jaisi baaton ko shayaraana andaaz mein kehna hai. Isi mood mein Beautiful Girl shayari bhi dekhein.

कुछ अपना अंदाज हैं कुछ मौसम रंगीन हैं,
तारीफ करूँ या चुप रहूँ जुर्म दोनो ही संगीन हैं।

Kuch apna andaz hai kuch mausam rangeen hai,
Tariff karu ya chup rahu zurm dono hi sangeen hai

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दिल के मुआमले में नतीजे की फ़िक्र क्या
आगे है इश्क़ जुर्म-ओ-सजा के मकाम से !!

Dil ke muaamale mein nateeje ki fiqr kya
Aage hai ishq jurm-o-saza ke maqaam se

Sahir Ludhianvi

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खामोशी जुर्म हैं इस दौर में बोलना सीखो...
वरना मिट जाओगे हालात के तुफानो में...!!

Khamoshi jurm hain is daur mein bolna seekho...
Warna mit jaoge halaat ke tufano mein !!

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इश्क से बचिए जनाब गजब का काजी है ये....
खुद ही सजा देता है जुर्म करवाने के बाद।।

Ishk se bachie janaab gajab ka kaajee hai ye....
Khud hee saja deta hai jurm karavaane ke baad..

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2 Line Shayari

अगर सुन्दर होना जुर्म है,
तो मै बिलकुल बेगुनाह हुँ

Agar sundar hona jurm hai,
To mai bilakul begunaah hun

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दिल की हेराफेरी संभलकर कीजिये हुजूर..
अंजाम ऐ मोहब्बत जुर्म बड़ा संगीन होता है...

Dil kee heraapheree sambhalakar keejiye hujoor..
Anjaam ai mohabbat jurm bada sangeen hota hai...

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इश्क का हो जाना जुर्म अगर है.
फख्र है मुझे की मुजरिम हुआ हुँ.

Ishk ka ho jaana jurm agar hai.
Phakhr hai mujhe kee mujarim hua hun.

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कितने सितम करोगे इस टुटे हुए दिल पर,,,,,
किसी रोज थक कर बताना जरूर मेरा जुर्म क्या था..

Kitane sitam karoge is tute hue dil par,,,,,
Kisee roj thak kar bataana jaroor mera jurm kya tha..

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लौटा जो सज़ा काट के बिना जुर्म की
घर आ के उसने सारे परिंदे रिहा किये।।

Lauta jo saza kaat ke bina jurm kee
Ghar aa ke usane saare parinde riha kiye..

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Beautiful Girl Shayari

कुछ आपका अंदाज है कुछ मौसम रंगीन है...
तारीफ करूँ या चुप रहूँ, जुर्म दोनो संगीन है...!!

Kuchh aapaka andaaj hai kuchh mausam rangeen hai...
Taareeph karoon ya chup rahoon, jurm dono sangeen hai...!!

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Frequently Asked Questions

"जुर्म" शायरी में यह शब्द किस काव्यात्मक अर्थ में इस्तेमाल हुआ है?
यहाँ "जुर्म" कोई असली अपराध नहीं, बल्कि प्यार में तारीफ करने या चुप रहने की उलझन का रूपक है। जैसे पंक्ति कहती है — "कुछ अपना अंदाज हैं कुछ मौसम रंगीन हैं, तारीफ करूँ या चुप रहूँ जुर्म दोनो ही संगीन हैं।" यह दिखाता है कि इश्क़ में हर फैसला मुश्किल लगता है, चाहे कुछ भी करो।
इश्क को "जुर्म-ओ-सजा" जैसे शब्दों से क्यों जोड़ा गया है?
"दिल के मुआमले में नतीजे की फ़िक्र क्या, आगे है इश्क़ जुर्म-ओ-सजा के मकाम से !!" यह पंक्ति बताती है कि प्यार में नतीजे की Fikr छोड़कर आगे बढ़ना पड़ता है — यहाँ किसी अदालत या असली सज़ा की बात नहीं, यह सिर्फ प्रेम की तीव्रता को दिखाने का काव्यात्मक अंदाज़ है।
"खामोशी जुर्म है" पंक्ति का क्या संदेश है?
"खामोशी जुर्म हैं इस दौर में बोलना सीखो... वरना मिट जाओगे हालात के तुफानो में...!!" यह पंक्ति चुप्पी की बजाय अपनी बात कहने और आवाज़ उठाने की सीख देती है, जो अक्सर Chup शायरी में भी अलग-अलग अंदाज़ से मिलती है।
प्यार को "काज़ी" यानी जज की तरह क्यों दिखाया गया है?
"इश्क से बचिए जनाब गजब का काजी है ये.... खुद ही सजा देता है जुर्म करवाने के बाद।।" यह एक काव्यात्मक अंदाज़ है जिसमें इश्क़ खुद ही गुनाह करवाता है और खुद ही उसकी सज़ा भी देता है — यह भावनाओं की उलझन दर्शाने वाला शेर है, वास्तविक कानूनी संदर्भ नहीं।
इस थीम की शायरी किस अंदाज़ में सबसे ज्यादा शेयर होती है?
गहरे और छोटे अंदाज़ की वजह से यह अक्सर 2 Line रूप में पढ़ी जाती है, और दिल की उलझनों से जुड़ी होने के कारण Dil शायरी से जुड़ी थीम में भी इसे शामिल किया जाता है।

Kai sher yahan khamoshi ko bhi is daur ka sabse bada 'jurm' bata dete hain. Dil ya Chup shayari mein bhi aisa hi shararati andaaz milega.