Logo - Feel The Words

Janbaaz Shayari

Door se hi sherdil ko salaami milti hai.

Janbaaz shayari mein ek josh bhara elaan hai ki nidar dilwale ko chedne ki himmat kisi mein nahi hoti, log door se hi use sherdil ki tarah salaam karte hain. Isi josh mein Status bhi padhein.

किसकी है मजाल जो छेडे दिलेर को
दूर से ही ठोके सब सलामी शेर को !!

Kiski hai majaal jo chhede Diler ko,
Door se hi thoke sab salami Sher ko !!

Read more...

Frequently Asked Questions

जांबाज़ शायरी का मुख्य भाव क्या है?
यह शायरी निडरता और साहस की मिसाल पेश करती है — "किसकी है मजाल जो छेडे दिलेर को, दूर से ही ठोके सब सलामी शेर को!!" यानी जो सच में दिलेर और जांबाज़ होता है, उसे छेड़ने की हिम्मत किसी में नहीं होती — लोग दूर से ही उसे सलाम ठोकते हैं। ऐसी ही जोशीली शायरी Status के रूप में भी उपलब्ध है।
"दूर से ही ठोके सब सलामी शेर को" पंक्ति में "शेर" का क्या प्रतीकात्मक अर्थ है?
यहाँ "शेर" किसी जांबाज़, निडर व्यक्तित्व का प्रतीक है — जिस तरह जंगल में कोई शेर को चुनौती देने की हिम्मत नहीं करता, बल्कि दूर से ही सम्मान देता है, उसी तरह एक सच्चे जांबाज़ इंसान की मौजूदगी भर से लोग उसका एहतराम करने लगते हैं। यह पंक्ति आत्मविश्वास और दबंग व्यक्तित्व की तारीफ़ में लिखी गई एक जोशीली अभिव्यक्ति है।

Ek sher yahan bahaduri aur khudaari ko bade dum-dar andaaz mein bayan karta hai. Aage Aafat aur Beti shayari bhi padhein.