Logo - Feel The Words

Hatheli Shayari

Kismat se pehle, jazbaat hatheli mein likhe hote hain.

Hatheli shayari mein watan ke liye hatheli par jaan rakhne ka jazba bhi hai aur kisi apne ki lakiron mein kareeb se dekhne ki khwahish bhi. Isi ehsaas mein Dil shayari bhi padhein.

मै जानता हू के दुश्मन भी कम नही लेकिन,
हमारी तरह हथेली पे जान थोड़ी है.

Mai jaanta hu ke dushman bhi kam nahi lekin,
Hamari tarh hatheli pe jaan thodi hai...

Read more...

काश... किसी लकीर में मिल जाऊं मैं,
मुझे कुछ करीब से देखने दे #हथेली तेरी।

Kaash... Kisi Lakeer Mein Mil Jaoon Main,
Mujhe Kuch Karib Se Dekhne De #Hatheli Teri.

Read more...

मुकम्मल है इबादत और मैं वतन ईमान रखता हूँ

मुकम्मल है इबादत और मैं वतन ईमान रखता हूँ,
वतन के शान की खातिर हथेली पे जान रखता हूँ !!
क्यु पढ़ते हो मेरी आँखों में नक्शा पाकिस्तान का ,
मुस्लमान हूँ मैं सच्चा, दिल में हिंदुस्तान रखता हूँ !!

Mukammal hai ibaadat aur main vatan eemaan rakhata hoon,
Watan ke shaan kee khaatir hathelee pe jaan rakhata hoon !!
Kyu padhate ho meree aankhon mein naksha paakistaan ka ,
Muslamaan hoon main sachcha, dil mein hindustaan rakhata hoon !!

Read more...

अगर तुमसे कोई पूछे बताओ ज़िन्दगी क्या है,
हथेली पर जरा सी राख़ रखना और उड़ा देना।

Agar tumase koee poochhe batao zindagee kya hai,
Hathelee par jara see raakh rakhana aur uda dena.

Read more...

2 Line Shayari

हथेली पर लकीरें महज सजावट नहीं
हर लकीर का मिजाज़ अलग होता है !!

Hathelee par lakeeren mahaj sajaavat nahin
Har lakeer ka mijaaz alag hota hai !!

Read more...

हथेली की लकीरें अब दुखने लगी हैं ,
मैं अब थक गया हूँ तुम्हे उनमे ढूँढ़ते ढूँढ़ते !!

Hathelee kee lakeeren ab dukhane lagee hain ,
Main ab thak gaya hoon tumhe uname dhoondhate dhoondhate !!

Read more...

Frequently Asked Questions

दुश्मन कम न होने के बावजूद जान हथेली पर रखने का साहस यह शायरी कैसे दिखाती है?
"मै जानता हू के Dushman भी कम नही लेकिन, हमारी तरह हथेली पे Jaan थोड़ी है" पंक्ति निडरता और आत्मविश्वास का प्रतीक है — चाहे मुश्किलें कितनी भी बड़ी हों, जान हथेली पर रखकर लड़ने वाला हमेशा एक कदम आगे होता है।
हथेली की लकीरों में समा जाने की रोमांटिक चाहत का भाव क्या है?
"काश... किसी लकीर में मिल जाऊं मैं, मुझे कुछ करीब से देखने दे हथेली तेरी" पंक्ति एक कोमल रोमांटिक चाहत दिखाती है — प्रिय के इतने करीब होने की तमन्ना कि खुद उसकी हथेली की लकीर बन जाए।
वतन के प्रति ईमान और मुसलमान होकर भी हिंदुस्तान दिल में रखने वाली पंक्ति किस भाव को दिखाती है?
"मुकम्मल है Ibaadat और मैं वतन ईमान रखता हूँ, वतन के शान की खातिर हथेली पे जान रखता हूँ, क्यु पढ़ते हो मेरी आँखों में नक्शा पाकिस्तान का, मुस्लमान हूँ मैं सच्चा, दिल में हिंदुस्तान रखता हूँ" पंक्ति एक गर्वीली और भावुक घोषणा है — यह बेवजह के शक को नकारते हुए धर्म और देशभक्ति के बीच किसी टकराव को खारिज करती है, और सच्ची इबादत को वतन की सेवा से जोड़ती है।
हथेली पर राख़ उड़ाने वाली पंक्ति ज़िंदगी के किस सच को दिखाती है?
"अगर तुमसे कोई पूछे बताओ ज़िन्दगी क्या है, हथेली पर जरा सी राख़ रखना और उड़ा देना" पंक्ति जीवन की क्षणभंगुरता को बेहद सरल पर गहरे बिंब से समझाती है — जैसे हवा में उड़ती राख़, वैसे ही ज़िंदगी भी पल भर की है।
हथेली शायरी में साहस, प्रेम और जीवन-दर्शन कैसे एक साथ पिरोए गए हैं?
जान हथेली पर रखने के साहस से लेकर लकीरों में समाने की चाहत, वतन-भक्ति और राख़ जैसी जिंदगी के फलसफे तक — यह संग्रह Dil को छू जाने वाली शायरी का उदाहरण है।

Ek sher yahan yeh bhi kehta hai ki hatheli ki lakirein sirf sajawat nahi, har lakir ka apna mizaaj hota hai. Aage Aankh aur 2 Line shayari bhi padhein.