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Dast Shayari

A season's knock, and the customs it carries in.

This set actually splits between two related words, dastak, the knock that announces a new season or a long-awaited visitor, and dastoor, the unwritten custom of how the world tends to work. Feel the seasonal half in full at Dastak shayari.

दुनियां का यही दस्तूर है साथ वहां तक...
मतलब जहां तक...!!

Duniyaan ka yahee dastoor hai saath vahaan tak...
Matalab jahaan tak...!!

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बेतहाशा सर्द हुए जा रही हैं ये हवाएं,
लगता है नवंबर ने फिजाओं संग दस्तक दी है !!

Betahaasha sard hue ja rahee hain ye havaen,
Lagata hai navambar ne phijaon sang dastak dee hai !!

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धूप के कुछ टुकड़े टँगे हैं बादलों की डोर पे
नवंबर ने दे दी है दस्तक बहक के हर ओर से !!

Dhoop ke kuchh tukade tange hain baadalon kee dor pe
Navambar ne de dee hai dastak bahak ke har or se !!

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बारिश की बूंदों से दिल पे दस्तक होती थी
सब मौसम बरसात थे मेरे और दिसम्बर था !!

Baarish kee boondon se dil pe dastak hoti thi,
Sab mausam barasaat the mere aur December tha !!

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2 Line Shayari

एक तमन्ना थी कि ज़िंदगी रंग बिरंगी हो
और दस्तूर देखिये जितने मिले गिरगिट ही मिले !!

Ek tamanna thee ki zindagee rang birangee ho
Aur dastoor dekhiye jitane mile giragit hee mile !!

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दस्तक और आवाज तो कानो के लिए है,
जिसे रूह जी जाए खामोशी उसे कहते हैं।

Dastak aur aavaaj to kaano ke lie hai,
Jise rooh jee jae khaamoshee use kahate hain.

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जी जान लगा दी नाम को दस्तख़त बनाने में...
कमबख्त जमाना बदल के अगूँठे पे आ गया...!!

Jee jaan laga dee naam ko dastakhat banaane mein...
Kamabakht jamaana badal ke agoonthe pe aa gaya...!!

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उम्र का बढ़ना तो दस्तूर-ए-जहाँ है,
महसूस ना करो तो बढ़ती कहाँ है।

Umr ka badhana to dastoor-e-jahaan hai,
Mahasoos na karo to badhatee kahaan hai.

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झुक कर सलाम करने में क्या हर्ज है मगर...
सर इतना मत झुकाओ कि दस्तार गिर पड़े...!!

Jhuk kar salaam karane mein kya harj hai magar...
Sar itana mat jhukao ki dastaar gir pade...!!

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Dastak Shayari

अब तो दीमक भी खा कर छोड़ गई

अब तो दीमक भी खा कर छोड़ गई
तेरी दस्तक के मुतंजिर दरवाजों को

Ab to deemak bhee kha kar chhod gaee
Teree dastak ke mutanjir daravaajon ko

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इकरार नामा मुहब्बत का लिए घूमते हैं,
बस इक तेरे दस्तखत मिल जाते तो अच्छा था...!!

Ikaraar naama muhabbat ka lie ghoomate hain,
Bas ik tere dastakhat mil jaate to achchha tha...!!

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धागा ही समझ,तू अपनी मन्नत का मुझे.
तेरी दुआओ के मुकम्मल होने का दस्तूर हूँ मैं..

Dhaaga hee samajh,too apanee mannat ka mujhe.
Teree duao ke mukammal hone ka dastoor hoon main..

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वक़्त मिले तो मेरे घर तक चले आना कभी

वक़्त मिले तो मेरे घर तक चले आना कभी...
तेरी खुश्बू के मोहताज़ मेरे गुलदस्ते आज भी हैं...

Vaqt mile to mere ghar tak chale aana kabhee...
Teree khushboo ke mohataaz mere guladaste aaj bhee hain...

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थोड़ी सी तु अस्त-व्यस्त है
फिर भी.. *"जिंदगी"* तु जबर्दस्त है

Thodee see tu ast-vyast hai
Phir bhee.. *"jindagee"* tu jabardast hai

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December Shayari

ये जिंदगी तमन्नाओं का गुलदस्ता ही तो है...
कुछ महकती है...कुछ मुरझाती है...कुछ चुभ जाती है...!!!

Ye jindagee tamannaon ka guladasta hee to hai...
Kuchh mahakatee hai...kuchh murajhaatee hai...kuchh chubh jaatee hai...!!!

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Frequently Asked Questions

दस्त शायरी में "दुनिया का दस्तूर" वाला शेर क्या कहता है?
यह शेर रिश्तों की एक कड़वी सच्चाई बयां करता है, कि ज्यादातर साथ स्वार्थ की सीमा तक ही निभाया जाता है। पंक्ति है, "दुनियां का यही दस्तूर है साथ वहां तक... मतलब जहां तक...!!" यहाँ "दस्तूर" का मतलब है दुनिया का चलन या रिवाज, और यह Hak और अपेक्षाओं से जुड़े रिश्तों की एक साफ, बिना लाग-लपेट वाली सच्चाई है।
नवंबर की दस्तक वाला शेर मौसम के बदलाव को कैसे बयां करता है?
यह शेर सर्दी के शुरू होने को बड़े काव्यात्मक अंदाज़ में पेश करता है, जहाँ ठंडी हवाओं को नवंबर की दस्तक कहा गया है। पंक्ति है, "बेतहाशा सर्द हुए जा रही हैं ये हवाएं, लगता है नवंबर ने फिजाओं संग दस्तक दी है !!" यहाँ "दस्तक" का मतलब है आहट या आगमन का संकेत, जो Dastak से जुड़ी शायरी में मौसम और भावनाओं दोनों के लिए इस्तेमाल होता है।
धूप और बादलों वाली नवंबर की दस्तक किस अंदाज़ में बयां हुई है?
यह पंक्ति भी नवंबर के आगमन को खूबसूरत बिम्बों में पिरोती है, जहाँ धूप के टुकड़े बादलों की डोर पर टंगे नजर आते हैं। शेर है, "धूप के कुछ टुकड़े टँगे हैं बादलों की डोर पे, नवंबर ने दे दी है दस्तक बहक के हर ओर से !!" यह मौसम बदलने के उस नाजुक पल को बड़ी कल्पनाशीलता से दिखाता है।
बारिश की बूंदों और दिसंबर की दस्तक वाली पंक्ति किस एहसास को दिखाती है?
यह पंक्ति बारिश की बूंदों को सीधे दिल की दस्तक से जोड़ती है, जहाँ हर मौसम बरसात जैसा महसूस होता रहा और साथ में दिसंबर की ठंड भी दस्तक देती रही। शेर है, "बारिश की बूंदों से दिल पे दस्तक होती थी, सब मौसम बरसात थे मेरे और दिसम्बर था !!" यह December की सर्दी और भीतर की भावनाओं को एक साथ जोड़ता है।
"दस्तूर" और "दस्तक" शब्द इस टॉपिक में किस तरह जुड़े हैं?
दोनों शब्दों की जड़ भले ही एक जैसी लगे, लेकिन इनके मतलब अलग हैं, "दस्तूर" का मतलब है रिवाज या चलन, जबकि "दस्तक" का मतलब है आहट या दस्तक देना। इस संग्रह में एक शेर रिश्तों के दस्तूर पर बात करता है, तो बाकी तीन मौसम बदलने की दस्तक पर, दोनों ही अपने-अपने ढंग से Khush और उदास पलों को बयां करते हैं।

That same cold-weather mood continues in December shayari, once the knock finally turns into arrival.