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Shikave Shayari

Kuch shikwe kaha jaana zaroori nahi hota.

Shikave shayari un lamhon ki baat karti hai jab dil mein gila to hota hai par zubaan chup rehti hai, chahe wo Ishwar se ho ya kisi apne se. Isi ehsaas mein Dil shayari bhi padhein.

Shikave Shayari - Gile Shikwe Bhare Dil Ke Sher

जो दिल से चाहा था वो मिला हमकों
ईश्वर से ना कोई गिला शिकवे है
ना ही कोई तमन्ना है अब हमारी
जब से हमने आपकों पाया हैं.

Jo dil se chaha tha wo mila
humko ishwar se na koi gila shikve
hai na hi koi tamnna hai ab humari
jab se humne apko paya hai..

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गिले शिकवे दिल से न लगा लेना,
कभी रूठ जाऊ तो मना लेना,
कल का क्या पता हम हो न हो
इसलिए जब भी मिलूँ
कभी समोसा कभी पानी पूरी खिला देना.

Gile shikave dil se na laga lena,
Kabhee rooth jaoo to mana lena,
Kal ka kya pata ham ho na ho
Isalie jab bhee miloon
Kabhee samosa kabhee paanee pooree khila dena.

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जिन्दगी से शिकवे तो सभी को हैं पर...
जो मौज मैं जीना जानते हैं, वो शिकायत नहीं करते…!!

Jindagee se shikave to sabhee ko hain par...
Jo mauj main jeena jaanate hain, vo shikaayat nahin karate…!!

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कुछ शिकवे ऐसे थे साहिब

कुछ शिकवे ऐसे थे साहिब,
जो खुद ही कहे और खुद ही सुने।

Kuchh shikave aise the saahib,
Jo khud hee kahe aur khud hee sune.

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2 Line Shayari

जिंदगी बहुत हैं शिकवे तुझसे
चल रहने दे छोड सब, आज *इतवार* हैं

Jindagee bahut hain shikave tujhase
Chal rahane de chhod sab, aaj *itavaar* hain

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है कहीं पलकों तले अक्स तेरा ....
शिकवे-शिकायतें तो पर्दादारी है ...

Hai kaheen palakon tale aks tera ....
Shikave-shikaayaten to pardaadaaree hai ...

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Frequently Asked Questions

दिल से चाही चीज़ मिल जाने पर ईश्वर से कोई गिला-शिकवा न रहने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"जो दिल से चाहा था वो मिला हमकों ईश्वर से ना कोई गिला शिकवे है ना ही कोई तमन्ना है अब हमारी जब से हमने आपकों पाया हैं." — यह शायरी कहती है कि जो दिल से चाहा था वह मिल गया, इसलिए अब ईश्वर से कोई गिला-शिकवा या तमन्ना बाकी नहीं है।
गिले-शिकवे दिल से न लगाकर रूठने पर समोसा-पानीपूरी खिलाकर मनाने की गुज़ारिश करने वाली शायरी कौन सी है?
"गिले शिकवे दिल से न लगा लेना, कभी रूठ जाऊ तो मना लेना, कल का क्या पता हम हो न हो इसलिए जब भी मिलूँ कभी समोसा कभी पानी पूरी खिला देना." — यह शायरी हल्के-फुल्के अंदाज़ में गिले-शिकवे दिल से न लगाने और कभी रूठ जाने पर समोसा या पानी पूरी खिलाकर मना लेने की गुज़ारिश करती है।
ज़िंदगी से शिकवे सभी को होने पर भी मौज में जीने वालों के शिकायत न करने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"जिन्दगी से शिकवे तो सभी को हैं पर... जो मौज मैं जीना जानते हैं, वो शिकायत नहीं करते…!!" — यह शायरी कहती है कि ज़िंदगी से शिकवे तो सभी को होते हैं, पर जो मौज में जीना जानते हैं वे शिकायत नहीं करते।
कुछ शिकवे ऐसे होने की बात कहने वाली शायरी, जो खुद ही कहे जाएं और खुद ही सुने जाएं, कौन सी है?
"कुछ शिकवे ऐसे थे साहिब, जो खुद ही कहे और खुद ही सुने।" — यह शायरी कहती है कि कुछ शिकवे ऐसे होते हैं जिन्हें खुद ही कहा जाता है और खुद ही सुना जाता है।
शिकवे से जुड़ी और शायरी कहाँ पढ़ें?
आप Dil, Gila और Husband शायरी पढ़ सकते हैं।

Kuch sher yahan shikayat ko hansi mein badalte hain, kyunki jo maujmein jeena jaante hain wo kabhi shikwa nahi karte. Aage padhein Gila aur Aaj shayari bhi.