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Raat Shayari - Raat Ke Sabse Sachche Pehar

Raat mein hi khulti hai dil ki sabse sacchi baat.

पूरा शहर सो जाता है, पर दिल जागता रहता है - यही वक़्त है जब Raat shayari की हर लाइन जन्म लेती है। करवटें बदलती रातें, यादों में डूबी नींद, और ख़ामोशी में गुज़रता वक़्त। रात का यही सन्नाटा अक्सर सबसे सच्ची बात कहलवाता है। तनहाई से जुड़ी बात के लिए Alone भी पढ़ें।

Raat Shayari - Raaton Mein Jagi Yaadein

सब को ताज़ा भोजन खिलाकर खुद रात का भोजन खाती हैं
इस तरह माँ रोज ही शितलासप्तमी मनाती है !!

Sab ko taaza bhojan khilaakar khud raat ka bhojan khaatee hain
Is tarah maan roj hee shitalaasaptamee manaatee hai !!

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उस रात हमने सोना ही छोड़ दिया

उस रात हमने सोना ही छोड़ दिया,
जब उसने कहा सुबह होते ही मुझे भूल जाना

Us raat hamane sona hee chhod diya,
Jab usane kaha subah hote hee mujhe bhool jaana

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इच्छाओं की रात की
अक्सर सुबह नहीं हुआ करती...!!!

Ichchhaon kee raat kee
Aksar subah nahin hua karatee...!!!

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रातों को चलती रहती है मोबाईल पर उँगलियाँ,
सीने पर किताब रखकर सोए ज़माना गुज़र गया…

Raaton ko chalatee rahatee hai mobaeel par ungaliyaan,
Seene par kitaab rakhakar soe zamaana guzar gaya…

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कफ़न न डालो मेरे चेहरे पर मुझे आदत है मुस्कुराने की,
आज की रात न दफनाओ मुझे यारो कल उम्मीद है उनके आने की

Kafan na daalo mere chehare par mujhe aadat hai muskuraane kee,
Aaj kee raat na daphanao mujhe yaaro kal ummeed hai unake aane kee

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ये एक बात समझने में, रात हो गई;
मैं उस से जीत गया हूँ, कि मात हो गई!

Ye ek baat samajhane mein, raat ho gaee;
Main us se jeet gaya hoon, ki maat ho gaee!

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लफ़्ज़ो से नहीं अब
लहज़ो से घबराता हूँ मैं,

Lafzo se nahin ab
Lahazo se ghabaraata hoon main,

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ये कैसे सिलसिले ठहर गए हैं तेरे मेरे दरमियाँ....
न जाग कर रात गुज़री न सो कर दिन ढला

Ye kaise silasile thahar gae hain tere mere daramiyaan....
Na jaag kar raat guzaree na so kar din dhala

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पोंछते अश्क़ हैं अकेले में
जो हज़ारों में मुस्कुराते हैं।

Ponchhate ashq hain akele mein
Jo hazaaron mein muskuraate hain.

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रात दिल को था सहर का इंतिज़ार
अब ये ग़म है क्यूँ सवेरा हो गया

Raat dil ko tha sahar ka intizaar
Ab ye gam hai kyoon savera ho gaya

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रोता रहा फूल......तन्हाई में रात भर,
और लोग ओस कहकर उसे वहाँ से गुजरते रहे...!!

Rota raha phool......tanhaee mein raat bhar,
Aur log os kahakar use vahaan se gujarate rahe...!!

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कब्रों से छेड़-छाड़ नहीं होती..
मेरा तनहा पड़ा बिस्तर कल रात कह रहा था मुझसे..

Kabron se chhed-chhaad nahin hotee..
Mera tanaha pada bistar kal raat kah raha tha mujhase..

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दिल धड़कने लगता है अब तो हवा के शोर से
एक वो ज़माना था टकराते थे तूफानों के साथ

Dil dhadakane lagata hai ab to hava ke shor se
Ek vo zamaana tha takaraate the toophaanon ke saath

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हर रात यही सोचते सोचते गुजर जाती है
मोहब्बत सजा है, मजा है, या गुनाह है

Har raat yahee sochate sochate gujar jaatee hai
Mohabbat saja hai, maja hai, ya gunaah hai

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धूप भी खुल के कुछ नहीं कहती ,
रात ढलती नहीं थम जाती है ,
सर्द मौसम की एक दिक्कत है ,
याद तक जम के बैठ जाती है.....!

Dhoop bhee khul ke kuchh nahin kahatee ,
Raat dhalatee nahin tham jaatee hai ,
Sard mausam kee ek dikkat hai ,
Yaad tak jam ke baith jaatee hai.....!

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तन्हा राते बेमिसाल हे , तेरे जाने के बाद
तु घुट घुट कर मत रोना , मेरे गुजर जाने के बाद

Tanha raate bemisaal he , tere jaane ke baad
Tu ghut ghut kar mat rona , mere gujar jaane ke baad

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बह गए जिनके घर के छप्पर बारिश में,
क्या पूछते हो उनसे की रात कैसी गुज़री।

Bah gae jinake ghar ke chhappar baarish mein,
Kya poochhate ho unase kee raat kaisee guzaree.

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चलो गमों में भी मुस्कुराते हैं,
ज़िंदगी को ज़रा सा चिढ़ाते है

Chalo gamon mein bhee muskuraate hain,
Zindagee ko zara sa chidhaate hai

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जिन्दगी की राहों में मुस्कराते रहो हमेशा

जिन्दगी की राहों में मुस्कराते रहो हमेशा,
उदास दिलों को हमदर्द तो मिलते हैं, हमसफ़र नहीं !

Jindagee kee raahon mein muskaraate raho hamesha,
Udaas dilon ko hamadard to milate hain, hamasafar nahin !

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गज़ल मेरी महकने लग गयी थी रात में कोई

गज़ल मेरी महकने लग गयी थी रात में कोई..........
यही पहचान वाजिब थी कि तुमने पढ़ लिया इसको

Gazal meree mahakane lag gayee thee raat mein koee..........
Yahee pahachaan vaajib thee ki tumane padh liya isako

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Frequently Asked Questions

रात शायरी में बाबा अमरनाथ को याद करने वाला शेर किस भावना से भरा है?
यह शेर श्रद्धा और भरोसे का भाव लिए है, जहाँ भक्त मानता है कि बाबा अमरनाथ का साथ हो तो रात का अंधेरा और दर्द दोनों हल्के पड़ जाते हैं। पंक्ति है, "न दर्द की चिंता, न ग़म की बात, जब साथ हो बाबा अमरनाथ !! हर मोड़ पर तू रहनुमा बने, तेरे नाम से ही सवर जाए रात !!" यह आस्था और सुकून की भावना को बड़ी सादगी से बयां करता है।
दीवारों के आहट सुनने वाला रोमांटिक शेर क्या कहता है?
यह शेर रात की खामोशी में उठने वाली भीतरी बेचैनी को मोहब्बत के आने की खुशखबरी में बदलते हुए दिखाता है। पंक्ति है, "कल रात दीवारों ने मेरे मन की आहट सुन ली, सुबह उठा तो मोहबत मेरे सामने खड़ी थी !!" यह एहसास Khwab से जुड़ी शायरी जैसा ही जादुई और उम्मीद भरा है।
लौट आने की तमन्ना और चौकन्ना रहने वाली पंक्ति किस एहसास को दिखाती है?
यह पंक्ति इंतजार की उस बेचैनी को बयां करती है जो दिन-रात एक जैसी बनी रहती है, "हर रोज़ करते है तुम्हारे लौट आने की तमन्ना, इसलिए दिन रात रहने लगे अब चौकन्ना !!" यह Tanha इंतजार और उम्मीद के बीच झूलते मन की तस्वीर है।
"दिन धुंधला है, रात नशीली है" वाला शेर शहर के बारे में क्या कहता है?
यह पंक्ति शहर की जिंदगी को एक रहस्यमयी और थोड़ी नशीली कहानी की तरह पेश करती है, जहाँ दिन धुंधला और रातें अजीब सी खिंचाव भरी होती हैं। शेर है, "दिन धुंधला है, रात नशीली है, ऐसी कहानी कुछ इस शहर की है !!" यह Khamoshi से जुड़ी शायरी जैसा ही एक गहरा, मौन एहसास छोड़ता है।
क्या रात शायरी सिर्फ उदासी की बात करती है?
नहीं, रात शायरी में भक्ति, इंतजार, रोमांस और शहर की जिंदगी तक, कई रंग शामिल हैं, जैसा ऊपर के अलग-अलग शेरों में देखा जा सकता है। यह विषय Judaa जैसी जुदाई की भावना से लेकर मोहब्बत के मीठे इंतजार तक, रात के हर पहलू को छूता है।

बिछड़ने और ख़ामोशी के जज़्बात के लिए Judaa और Khamoshi सेक्शन भी देखें।