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Raat Shayari - Raat Ke Sabse Sachche Pehar

Raat mein hi khulti hai dil ki sabse sacchi baat.

पूरा शहर सो जाता है, पर दिल जागता रहता है - यही वक़्त है जब Raat shayari की हर लाइन जन्म लेती है। करवटें बदलती रातें, यादों में डूबी नींद, और ख़ामोशी में गुज़रता वक़्त। रात का यही सन्नाटा अक्सर सबसे सच्ची बात कहलवाता है। तनहाई से जुड़ी बात के लिए Alone भी पढ़ें।

Raat Shayari - Raaton Mein Jagi Yaadein

लोग रह गए इतराते अपनी चालाकियों पर...
वो समझ ही न पाये कि वो क्या गँवा बैठे हैं...!!

Log rah gae itaraate apanee chaalaakiyon par...
Vo samajh hee na paaye ki vo kya ganva baithe hain...!!

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जुल्फों को हटा दे चेहरे से थोडासा उजाला होने दो,
सूरज को जरा शरमिंदा कर, वो रात सा काला होने दो।

Julphon ko hata de chehare se thodaasa ujaala hone do,
Sooraj ko jara sharaminda kar, vo raat sa kaala hone do.

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बहुत सुकून है, सुन ऐ रात तेरी बाँहों में

बहुत सुकून है, सुन ऐ-रात तेरी बाँहों में,
सारा दिन चलता हूँ तूझ तक आने के लिए।

Bahut sukoon hai, sun ai-raat teree baanhon mein,
Saara din chalata hoon toojh tak aane ke lie.

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उफ़ ये गजब की रात और ये ठंडी हवा का आलम,
हम भी खूब सोते अगर उनकी बांहो में होते।

Uf ye gajab kee raat aur ye thandee hava ka aalam,
Ham bhee khoob sote agar unakee baanho mein hote.

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वो एक तेरा वादा कि हम कभी जुदा ना होंगे,
वो किस्सा हम अपने दिल को सुनाकर अक्सर मुस्कुराते हैं।

Vo ek tera vaada ki ham kabhee juda na honge,
Vo kissa ham apane dil ko sunaakar aksar muskuraate hain.

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अब आ गई है सहर अपना घर सम्भालने को

अब आ गई है सहर अपना घर सम्भालने को,
चलूं कि जागा हुआ रातभर का.. मैं भी हूं।

Ab aa gaee hai sahar apana ghar sambhaalane ko,
Chaloon ki jaaga hua raatabhar ka.. main bhee hoon.

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लगाई तो थी आग उसकी तस्वीर में रात को

लगाई तो थी आग उसकी तस्वीर में रात को,
सुबह देखा तो मेरा दिल छालों से भरा पडा था।

Lagai to thi aag uski tasveer me raat ko,
Subah dekha to mera Dil chhaalo se bhara pada tha !!

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करनी हो पहचान अगर गमगीन शख्स की

करनी हो पहचान अगर गमगीन शख्स की..
दोस्तों गौर से देखना वो मुस्कुराते बहुत है।

Karanee ho pahachaan agar gamageen shakhs kee..
Doston gaur se dekhana vo muskuraate bahut hai.

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चंद खामोश ख्याल और तेरी बातें

चंद खामोश ख्याल और तेरी बातें,
खुद से गुफ्तगू में गुज़र जाती हैं रातें...!

Chand khaamosh khyaal aur teree baaten,
Khud se guphtagoo mein guzar jaatee hain raaten...!

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खामोश शहर की चीखती रातें

खामोश शहर की चीखती रातें,
सब चुप है पर, कहने को है हजार बातें...!

Khaamosh shahar kee cheekhatee raaten,
Sab chup hai par, kahane ko hai hajaar baaten...!

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दब गई थी नींद कहीं करवटों के बीच

दब गई थी नींद, कहीं करवटों के बीच,
दर पर खड़े रहे, कुछ ख्वाब रात भर...!

Dab gaee thee neend, kaheen karavaton ke beech,
Dar par khade rahe, kuchh khvaab raat bhar...!

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कल चौदहवीं की रात थी, शब भर रहा चर्चा तेरा...
कुछ ने कहा ये चाँद है, कुछ ने कहा चेहरा तेरा...!!

Kal chaudahaveen kee raat thee, shab bhar raha charcha tera...
Kuchh ne kaha ye chaand hai, kuchh ne kaha chehara tera...!!

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इश्क़ खैरात नहीँ तू मुझको मैं तुझको दूँ....
इश्क़ इबादत है आओ चलो दोनों करेंगे.....

Ishq khairaat naheen too mujhako main tujhako doon....
Ishq ibaadat hai aao chalo donon karenge.....

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खैरात की ख्वाहिश कभी ना थी मुझको...
मोहब्बत की आरजू थी मोहब्बत के बदले...!!

Khairaat kee khvaahish kabhee na thee mujhako...
Mohabbat kee aarajoo thee mohabbat ke badale...!!

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अपनी सोच के दायरे से रूबरू कराती है जिंदगी...
बदलता कोई नही जरूरतें महकाते हैं रिश्ते...!!

Apanee soch ke daayare se roobaroo karaatee hai jindagee...
Badalata koee nahee jarooraten mahakaate hain rishte...!!

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कुछ तो बता ए उदास रात की ठंडी हवा....
भूलने वालों को आख़िर किस तरह याद आऊ मैँ....

Kuchh to bata e udaas raat kee thandee hava....
Bhoolane vaalon ko aakhir kis tarah yaad aaoo main....

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उसे शौक था हर रात नए बदन का
पर दलाल अबकी बार जो लाया वह बेटी उसी की थी.....!!

Use shauk tha har raat naye badan ka
Par dalaal Abki baar jo laaya woh beti usi ki thi !!

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कभी तो फूल खिलेंगे अंतरात्मा मे,
अगर ये सच है मिट्टी का है आदमी...

Kabhee to phool khilenge antaraatma me,
Agar ye sach hai mittee ka hai aadamee...

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एक पुरानी तस्वीर जिसमे तुमने बिंदी लगाई है

एक पुरानी तस्वीर जिसमे तुमने बिंदी लगाई है..
मै अक्सर उसे रात में चाँद समझ के देख लेता हूँ..!!

Ek puraanee tasveer jisame tumane bindee lagaee hai..
Mai aksar use raat mein chaand samajh ke dekh leta hoon..!!

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मैं खुदगर्ज़ सही, ख़ुद्दारी भी अपने साथ रखती हूँ;
ख़ैरात में इश्क़ मिले भी तो, मुझे ज़रूरी नहीं लगता!

Main khudagarz sahee, khuddaaree bhee apane saath rakhatee hoon;
Khairaat mein ishq mile bhee to, mujhe zarooree nahin lagata!

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Frequently Asked Questions

रात शायरी में बाबा अमरनाथ को याद करने वाला शेर किस भावना से भरा है?
यह शेर श्रद्धा और भरोसे का भाव लिए है, जहाँ भक्त मानता है कि बाबा अमरनाथ का साथ हो तो रात का अंधेरा और दर्द दोनों हल्के पड़ जाते हैं। पंक्ति है, "न दर्द की चिंता, न ग़म की बात, जब साथ हो बाबा अमरनाथ !! हर मोड़ पर तू रहनुमा बने, तेरे नाम से ही सवर जाए रात !!" यह आस्था और सुकून की भावना को बड़ी सादगी से बयां करता है।
दीवारों के आहट सुनने वाला रोमांटिक शेर क्या कहता है?
यह शेर रात की खामोशी में उठने वाली भीतरी बेचैनी को मोहब्बत के आने की खुशखबरी में बदलते हुए दिखाता है। पंक्ति है, "कल रात दीवारों ने मेरे मन की आहट सुन ली, सुबह उठा तो मोहबत मेरे सामने खड़ी थी !!" यह एहसास Khwab से जुड़ी शायरी जैसा ही जादुई और उम्मीद भरा है।
लौट आने की तमन्ना और चौकन्ना रहने वाली पंक्ति किस एहसास को दिखाती है?
यह पंक्ति इंतजार की उस बेचैनी को बयां करती है जो दिन-रात एक जैसी बनी रहती है, "हर रोज़ करते है तुम्हारे लौट आने की तमन्ना, इसलिए दिन रात रहने लगे अब चौकन्ना !!" यह Tanha इंतजार और उम्मीद के बीच झूलते मन की तस्वीर है।
"दिन धुंधला है, रात नशीली है" वाला शेर शहर के बारे में क्या कहता है?
यह पंक्ति शहर की जिंदगी को एक रहस्यमयी और थोड़ी नशीली कहानी की तरह पेश करती है, जहाँ दिन धुंधला और रातें अजीब सी खिंचाव भरी होती हैं। शेर है, "दिन धुंधला है, रात नशीली है, ऐसी कहानी कुछ इस शहर की है !!" यह Khamoshi से जुड़ी शायरी जैसा ही एक गहरा, मौन एहसास छोड़ता है।
क्या रात शायरी सिर्फ उदासी की बात करती है?
नहीं, रात शायरी में भक्ति, इंतजार, रोमांस और शहर की जिंदगी तक, कई रंग शामिल हैं, जैसा ऊपर के अलग-अलग शेरों में देखा जा सकता है। यह विषय Judaa जैसी जुदाई की भावना से लेकर मोहब्बत के मीठे इंतजार तक, रात के हर पहलू को छूता है।

बिछड़ने और ख़ामोशी के जज़्बात के लिए Judaa और Khamoshi सेक्शन भी देखें।