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Paraaya Shayari

Apna kaun, paraya kaun - dil hi jaane.

Paraaya shayari yeh sawal uthati hai ki koi apna ya paraya kaise banta hai - kabhi tyohar sabko jodta hai to kabhi ahankar Apne logon ko bhi paraya bana deta hai.

Paraaya Shayari - Apna Ya Paraya, Faisla Dil Ka

त्योहार नहीं होता अपना पराया,
त्योहार है वही जिसे सबने मनाया,
तो मिला के गुड़ में तिल
पतंग संग उड़ जाने दो दिल,
हैप्पी पोंगल

Tyohaar nahin hota apana paraaya,
Tyohaar hai vahee jise sabane manaaya !!
To mila ke gud mein til,
Patang sang ud jaane do dil !!
~ Happy Pongal ~

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त्यौहार नहीं होता है अपना पराया,
त्यौहार वही जिसे सबने मनाया,
तो मिला के गुड़ में तिल,
पतंग संग उड़ जाने दो दिल.
हैप्पी मकर संक्रांति!!

Tyohaar nahin hota apana paraaya,
Tyohaar hai vahee jise sabane manaaya !!
To mila ke gud mein til,
Patang sang ud jaane do dil !!
~ Happy Makar Sankraanti ~

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जिसपर अहंकार का साया होता है,
उसके लिए अपना भी पराया होता है.

Jisapar ahankaar ka saaya hota hai,
Usake lie apana bhee paraaya hota hai.

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ज़िन्दगी जोकर सी निकली
कोई अपना भी नहीं.. कोई पराया भी नहीं

zindagi jokar si nikali koi apana bhi nahin.. koi paraaya bhi nahin

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2 Line Shayari

खून अपना हो या पराया हो
नस्ले आदम का खून है आखिर !!

Khoon apna ho ya paraya ho
Nasle aadam ka khoon hai aakhir

Sahir Ludhianvi

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रोती है आँख जलता है ये दिल जब..
अपने घर के फेंके दिये से आँगन पराया जगमगाता है.

Rotee hai aankh jalata hai ye dil jab..
Apane ghar ke phenke diye se aangan paraaya jagamagaata hai.

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परखो तो कोई अपना नही

परखो तो कोई अपना नही
समझो तो कोई पराया नहीं

Parakho to koee apana nahee
Samajho to koee paraaya nahin

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सौ खामियाँ मुझमे सही मगर, इक खूबी भी है,
अपनों को आज तक पराया नहीं किया !!

Sau khaamiyaan mujhame sahee magar, ik khoobee bhee hai,
Apanon ko aaj tak paraaya nahin kiya !!

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Frequently Asked Questions

'त्योहार नहीं होता अपना पराया' वाली शायरी में क्या संदेश है?
पोंगल और मकर संक्रांति के मौके पर लिखी शायरी कहती है, "त्योहार नहीं होता अपना पराया, त्योहार है वही जिसे सबने मनाया, तो मिला के गुड़ में तिल पतंग संग उड़ जाने दो दिल।" यह संदेश देती है कि त्योहार किसी एक का नहीं होता, बल्कि उसे मिलजुल कर मनाने से ही उसकी असली खुशी मिलती है।
अहंकार से जुड़ी 'पराया' शायरी का क्या भाव है?
शेर कहता है, "जिसपर अहंकार का साया होता है, उसके लिए अपना भी पराया होता है।" यह बताता है कि अहंकार इंसान को इतना अंधा कर देता है कि वह Apne यानी अपनों को भी पराया समझने लगता है।
'खून अपना हो या पराया' वाली शायरी में इंसानियत का क्या संदेश है?
शेर कहता है, "खून अपना हो या पराया हो, नस्ले आदम का खून है आखिर!!" यह अपने-पराए के भेद से ऊपर उठकर सभी इंसानों को एक ही मानव परिवार का हिस्सा मानने का व्यापक संदेश देती है।
क्या 'पराया' शायरी में एक ही भाव को अलग-अलग त्योहारों पर दोहराया गया है?
हाँ, "त्योहार नहीं होता अपना पराया..." वाली पंक्तियाँ पोंगल और मकर संक्रांति, दोनों मौकों पर लगभग एक जैसे शब्दों में मिलती हैं, क्योंकि दोनों त्योहार करीब-करीब एक ही समय मनाए जाते हैं और यह संदेश दोनों पर समान रूप से लागू होता है।
अपने-पराए के भाव पर और शायरी कहाँ मिलेगी?
अपने और पराए के जटिल भाव से जुड़ी और गहरी शायरी Apno-par सेक्शन में देखी जा सकती है, साथ ही छोटी दो-पंक्ति की रचनाएं 2 Line में भी मौजूद हैं।

Aaj ke daur mein rishte parakhne ki soch ho ya Aankh se bahte aansu jo doosron ka aangan roshan kar dete hain, yeh shayari apnapan aur begaanapan dono dikhati hai.