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Mehboob Shayari

Mehboob ki yaad, har lafz mein basi hui.

In sheron mein mehboob kabhi dard ka sahara banta hai to kabhi khushi ki wajah — chaahat ka har rang yahan mila hai. Isi jazbaat mein Chaah shayari bhi zaroor padhein.

Mehboob Shayari: Mohabbat Bhare Ehsaas Ke Sher

कोई महबूब नहीं है वतन जैसा यारो,
मेरी तरह देश से कभी इश्क करके देख लेना !!

Koi mehboob nahin hai watan jaisa yaaro,
Meri tarah desh se kabhi ishq karke dekh lena !!

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मेरे इश्क़ का हर सवाल उस रब से है,
जब मिलना ही नहीं था मेरे महबूब से
तो फिर क्यों ये प्यार हर दफा बस उनसे है !!

Mere Ishq Ka Har Sawal Us Rab Se hai,
Jab Milna Hi Nahi Tha Mere Mahboob Se
To Fir Kyun Ye Pyar Har Dafa Bas Unse Hai !!

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दर्द में रोते हुए को हंसाया नही जाता,
छोटे दिल में महबूब को बसाया नही जाता.

Dard mein rote hue ko hansaaya nahee jaata,
Chhote dil mein mahaboob ko basaaya nahee jaata.

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जो अपने महबूब के यादों में खो जाएँ,
उसका एहसास और जज्बात मीठा-मीठा हो जाएँ.

Jo apane mahaboob ke yaadon mein kho jaen,
Usaka ehasaas aur jajbaat meetha-meetha ho jaen.

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2 Line Shayari

दिल की हर धड़कन धन्यवाद कहती है,
जो महबूबा दिल के जख्मों को भरती है.

Dil kee har dhadakan dhanyavaad kahatee hai,
Jo mahabooba dil ke jakhmon ko bharatee hai.

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आशिक़ों के महबूब के पैरो की धूल हूँ

आशिक़ों के महबूब के पैरो की धूल हूँ
हाँ मैं एक लाल गुलाब का फूल हूँ !!

Aashiqon ke mahaboob ke pairo kee dhool hoon
Haan main ek laal gulaab ka phool hoon !!

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इश्क तो करता है हर कोई

इश्क तो करता है हर कोई
महबूब पे तो मरता है हर कोई
कभी वतन को महबूब बना के देखो
तुझ पे मरेगा हर कोई

Ishq to karata hai har koi,
Mahaboob pe to marta hai har koi !!
Kabhi watan ko mahboob bana ke dekho,
Tujh pe marega har koi !!

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महबूब काजल की तरह होना चाहिए...
जब आप हँसे तो वो चमके जब रोये तो बिखर जाये...!!

Mahaboob kaajal kee tarah hona chaahie...
Jab aap hanse to vo chamake jab roye to bikhar jaaye...!!

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महबूब की यादों की गर्मी है या ग्लोबल वार्मिंग ,
समझ नही आता जनवरी इस बार इतनी गर्म क्यों है

Mehboob ki yaado ki garmi hai yaa global warming,
Samjh nahi aata January is baar itni garmi kyo hai !!

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Apne Shayari

सिर्फ गुलाब देने से अगर मोहब्बत हो जाती,
तो माली सारे 'शहर' का महबूब बन जाता...

Sirph gulaab dene se agar mohabbat ho jaatee,
To maalee saare shahar ka mahaboob ban jaata...

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Frequently Asked Questions

शायरी में महबूब की तुलना वतन से कैसे की गई है?
"कोई महबूब नहीं है वतन जैसा यारो, मेरी तरह देश से कभी इश्क करके देख लेना" पंक्ति में वतन को किसी भी महबूब से बढ़कर बताया गया है और देश-प्रेम को असली इश्क़ के बराबर दिखाया गया है।
महबूब से न मिल पाने पर शायर किससे सवाल करता है?
एक शायरी के अनुसार "मेरे इश्क़ का हर सवाल उस रब से है, जब मिलना ही नहीं था मेरे महबूब से तो फिर क्यों ये प्यार हर दफा बस उनसे है", यानी शायर अपनी अधूरी मोहब्बत का सवाल सीधे ईश्वर से करता है।
क्या छोटे दिल में महबूब को जगह देना आसान बताया गया है?
नहीं, "दर्द में रोते हुए को हंसाया नही जाता, छोटे दिल में महबूब को बसाया नही जाता" के अनुसार जैसे दर्द में रोते व्यक्ति को हंसाना मुश्किल है, वैसे ही छोटे दिल में महबूब को बसाना मुश्किल बताया गया है।
महबूब की यादों में खोने का एहसास कैसा बताया गया है?
"जो अपने महबूब के यादों में खो जाएँ, उसका एहसास और जज्बात मीठा-मीठा हो जाएँ" पंक्ति के मुताबिक अपने महबूब की यादों में खोना जज्बातों को मीठा और सुखद बना देता है।
यह महबूब शायरी कलेक्शन किन भावनाओं को दिखाता है?
यह कलेक्शन महबूब के प्रति इश्क़, देशप्रेम से तुलना, और उनकी यादों में खोने के मीठे एहसास जैसी अलग-अलग भावनाओं को शायरियों के जरिए बयां करता है।

Kuch lines yahan watan ko hi apna mehboob maankar likhi gayi hain, ek alag hi andaaz mein. Apne ya Desh shayari mein bhi aisa hi jazba milega.