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Khairiyat Shayari

Bas ek baar poochh to lo, khairiyat hamari.

In sheron mein wo lamhe hain jab log sirf khush logon ki khairiyat poochte hain aur dard mein doobe logon ko bhula dete hain. Aise hi chhote magar gehre sher 2 Line shayari mein bhi milenge.

Khairiyat Shayari: Haal Poochne Ki Chaahat

दुनिया उन्हीं की खैरियत पूछती है जो पहले से ही खुश हों ।
जो तकलीफ में होते हैं उनके तो नंबर तक खो जाते हैं ।।

Duniya unheen kee khairiyat poochhatee hai jo pahale se hee khush hon .
Jo takaleeph mein hote hain unake to nambar tak kho jaate hain ..

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ख़ैरियत में तुझसे मिलने आएगा ना कोई भी
ऐ दिल-ए-नादां तुझे.. बीमार होना चाहिए

Khairiyat mein tujhase milane aaega na koee bhee
Ai dil-e-naadaan tujhe.. beemaar hona chaahie

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कौन कहता है हम झूठ नहीं बोलते,
एक बार खैरियत पूछ के तो देखिये।

Kaun kahata hai ham jhooth nahin bolate,
Ek baar khairiyat poochh ke to dekhiye.

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कौन कहता है कि हम झूठ नही बोलते

कौन कहता है कि हम झूठ नही बोलते,
एक बार खैरियत तो पूछ के देखिये।

Kaun kahata hai ki ham jhooth nahee bolate,
Ek baar khairiyat to poochh ke dekhiye.

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2 Line Shayari

सियासत को लहू पीने की लत है,
वरना मुल्क में सब खैरियत है.

Siyaasat ko lahoo peene kee lat hai,
Varana mulk mein sab khairiyat hai.

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जिद कर ही बैठे हो जाने की, तो ये भी सुन लो,
खैरियत मेरी.. कभी गैरों से मत पूछना..!!

Jid kar hee baithe ho jaane kee, to ye bhee sun lo,
Khairiyat meree.. kabhee gairon se mat poochhana..!!

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हाल पूछा न खैरियत पूछी,
आज भी उसने मेरी हैसियत पूछी !

Haal poochha na khairiyat poochhee,
Aaj bhee usane meree haisiyat poochhee !

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सब आते है खैरियत पूछने
तुम आ जाओ तो ये नौबत ही न आए..

Sab aate hai khairiyat poochhane
Tum aa jao to ye naubat hee na aae..

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सिर्फ शायरी पढने का रिश्ता ना रखो,
कभी खैरियत भी तो पूछ कर देखो..

Sirph shaayaree padhane ka rishta na rakho,
Kabhee khairiyat bhee to poochh kar dekho..

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Chaat Shayari

कभी हो मुखातिब तो कहूँ क्या मर्ज़ है मेरा

कभी हो मुखातिब तो कहूँ क्या मर्ज़ है मेरा,
अब तुम दूर से पूछोगे तो ख़ैरियत ही कहेंगे !!

Kabhi ho mukhatib to kahu kya marz hai mera,
Ab tum dur se puchoge to Khairiyat hi kahenge !!

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Frequently Asked Questions

खैरियत शायरी में इंसानी रिश्तों पर क्या तंज़ मिलता है?
खैरियत शायरी अक्सर लोगों के दोहरे व्यवहार पर तंज़ कसती है - जैसे 'दुनिया उन्हीं की खैरियत पूछती है जो पहले से ही खुश हों, जो तकलीफ में होते हैं उनके तो नंबर तक खो जाते हैं' पंक्ति बताती है, जो सिर्फ खुश लोगों का हाल पूछने की आदत को उजागर करती है।
दिल-ए-नादां को बीमार होने की सलाह देने वाली शायरी में क्या व्यंग्य है?
'ख़ैरियत में तुझसे मिलने आएगा ना कोई भी, ऐ दिल-ए-नादां तुझे बीमार होना चाहिए' पंक्ति कड़वे मगर सच्चे अंदाज़ में बताती है कि लोग अक्सर मुश्किल वक्त में ही याद करते हैं, ठीक-ठाक हालत में कोई पूछने नहीं आता।
सियासत और खैरियत को जोड़ने वाली शायरी क्या कहती है?
'सियासत को लहू पीने की लत है, वरना मुल्क में सब खैरियत है' पंक्ति राजनीति पर तीखा व्यंग्य करते हुए कहती है कि अगर सत्ता की लालसा न हो तो देश में हालात वैसे भी ठीक ही हैं।
खैरियत पूछने पर झूठ बोलने से जुड़ी शायरी में क्या मज़ाक है?
'कौन कहता है हम झूठ नहीं बोलते, एक बार खैरियत पूछ के तो देखिये' पंक्ति उस आम आदत पर हल्का-फुल्का मज़ाक बनाती है, जहां हर कोई हाल पूछने पर मुस्कुराकर 'सब ठीक है' कह देता है, चाहे अंदर से हालत कुछ भी हो।
खैरियत शायरी छोटे-छोटे शब्दों में इतनी असरदार क्यों लगती है?
खैरियत जैसी शायरी अक्सर सिर्फ दो पंक्तियों में गहरी बात कह जाती है, इसलिए यह 2 लाइन शायरी के तौर पर खूब पसंद की जाती है और आसानी से याद रह जाती है।

Kuch lines yahan doori badhne par bhi khairiyat na poochhne ki shikayat karti hain. Door ya Ham shayari mein bhi aisa hi ehsaas milega.