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Berukhi Shayari

Berukhi ka dard, chup rehkar sahaa

Kisi ki thandi berukhi ne kayi baar wajood ko hi pighla diya hai, phir bhi ummeed nahi tootti - yehi tanaav is topic ki har shayari mein dikhta hai. Aisi hi dil ki halaton ke liye Dil bhi padhein.

Berukhi Shayari - Bewajah Badle Rishton Ka Dard

हज़ार शिकवे कई दिनों की बेरूखी...
बस उनकी एक हँसी और सब रफा-दफा...!!

Hazaar shikave kaee dinon kee berookhee...
Bas unakee ek hansee aur sab rapha-dapha...!!

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तुम्हारी बेरूखी ने लाज रख ली बादाखाने की,
तुम आंखों से पिला देते तो पैमाने कहाँ जाते।

Tumhaaree berookhee ne laaj rakh lee baadaakhaane kee,
Tum aankhon se pila dete to paimaane kahaan jaate.

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तेरी ये #बेरूखी, किस काम की रह जायेगी,,
आ गया जिस रोज,अपने दिल को समझाना मुझे .!!

Teree ye #berookhee, kis kaam kee rah jaayegee,,
Aa gaya jis roj,apane dil ko samajhaana mujhe .!!

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भरी सख्ती मिजाज़ों में नहीं पैदायशी यूँ हम

भरी सख्ती मिजाज़ों में, नहीं पैदायशी यूँ हम .....
किसी की बेरूखी झेली, पिघल के फिर जमे हैं हम

Bharee sakhtee mijaazon mein, nahin paidaayashee yoon ham .....
Kisee kee berookhee jhelee, pighal ke phir jame hain ham

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2 Line Shayari

कोई अनजान नहीं होता अपनी बेरूखी और खताओं से...
बस हौसला नहीं होता खुद को कटघरे में लाने का...!!

Koee anajaan nahin hota apanee berookhee aur khataon se...
Bas hausala nahin hota khud ko kataghare mein laane ka...!!

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तेरी बेरूखी का अंजाम एक दिन यही होगा...
आखिर भूला ही देंगे तुझे याद करते करते...

Teree berookhee ka anjaam ek din yahee hoga...
Aakhir bhoola hee denge tujhe yaad karate karate...

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वो लफ्ज कहाँ से लाऊं जो तेरे दिल को मोम कर दें

वो लफ्ज कहाँ से लाऊं जो तेरे दिल को मोम कर दें,
मेरा वजूद पिघल रहा है तेरी बेरूखी से !!

Wo laphj kahaan se laoon jo tere dil ko mom kar den,
Mera vajood pighal raha hai teree berookhee se !!

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Frequently Asked Questions

'हज़ार शिकवे और एक हँसी' वाली बेरूखी शायरी का भाव क्या है?
'हज़ार शिकवे कई दिनों की बेरूखी... बस उनकी एक हँसी और सब रफा-दफा' पंक्ति दिखाती है कि प्रिय की बेरुखी से चाहे कितने भी दिन की नाराजगी क्यों न हो, उनकी एक मुस्कान सब कुछ भुला देती है। यह मोहब्बत में शिकवों के बावजूद हार मान लेने वाले Dil को बयां करती है।
बादाखाने की लाज वाली बेरूखी शायरी में क्या शायराना अंदाज़ है?
'तुम्हारी बेरूखी ने लाज रख ली बादाखाने की, तुम आंखों से पिला देते तो पैमाने कहाँ जाते' पंक्ति में शायर कहता है कि प्रिय की आँखों का नशा इतना गहरा है कि अगर वे मेहरबान होतीं तो शराब के प्याले बेकार हो जाते। यह बेरुखी को भी एक खूबसूरत तंज में बदलने वाली क्लासिक शायराना अदा है।
'तेरी ये बेरूखी किस काम की रह जायेगी' पंक्ति में क्या आत्मविश्वास है?
यह पंक्ति उस दिन का इंतज़ार दिखाती है जब शायर अपने ही दिल को समझाकर बेरुखी के असर से पूरी तरह आज़ाद हो जाएगा। यह उम्मीद और आत्म-नियंत्रण पाने के संकल्प को दर्शाती है, चाहे आज कितनी भी बेरुखी झेलनी पड़े।
पिघलकर फिर जमने वाली बेरूखी शायरी का भाव क्या है?
'भरी सख्ती मिजाज़ों में, नहीं पैदायशी यूँ हम ..... किसी की बेरूखी झेली, पिघल के फिर जमे हैं हम' पंक्ति बताती है कि स्वभाव से सख्त न होते हुए भी किसी की बेरुखी सहकर इंसान मजबूरन कठोर बन जाता है। यह भावनात्मक चोट से बदलते स्वभाव की गहरी पीड़ा को दर्शाती है।
बेरूखी पर लिखी शायरियाँ किन भावों को छूती हैं?
इस कलेक्शन में मोहब्बत के शिकवे, शायराना नज़ाकत, आत्मविश्वास और भावनात्मक बदलाव तक कई भाव शामिल हैं, जो Hindi शायरी की गहराई को दर्शाते हैं। हर पंक्ति बेरुखी शब्द को Anjaan बनते रिश्तों के अलग-अलग रंगों में पेश करती है।

Koi apni berukhi aur khataon se anjaan nahi hota, bas khud ko kathghare mein laane ki himmat kam padti hai - is soch ko yahan khoobsurati se rakha gaya hai. Judi hui shayari Anjaan aur Din mein bhi milegi.