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Aaram Shayari

Thoda ruko, thoda saans lo

Itwaar ke din poora aaram karne ki khwahish ho ya umar ke is padaav mein bhi rukne se inkaar, yeh shayari zindagi ki raftaar aur aaram ke beech ki jung dikhati hai. Isi mizaaj ki baat Aaraam mein bhi milegi.

Aaram Shayari - Sukoon Aur Chain Ki Talash

दीदी को नमस्ते भैया को प्रणाम,
इतवार को करना फुल आराम !!

Didi ko namaste Bhaiya ko pranaam,
Itavaar ko karana full aaraam !!

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अपने मंसूबों को नाकाम नहीं करना है,
मुझको इस उम्र में आराम नहीं करना है !!

Apane mansoobon ko naakaam nahin karana hai,
Mujhako is umr mein aaraam nahin karana hai !!

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जिन्दगी की रफ्तार को कुछ समय के लिए लगाम दो,
सुकून कभी चाहिए तो गंगा की गोद में आराम लो.

Jindagee kee raphtaar ko kuchh samay ke lie lagaam do,
Sukoon kabhee chaahie to ganga kee god mein aaraam lo.

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कुछ रोज़ दिल अपना सख्त बे आराम रहता है,
इसी हालत में लेकर सुबह से तो शाम रहता है।

Kuchh Roz Dil Apna Sakht Be Aaram Rahta Hai,
Isi Halat Mein Lekar Subah Se To Sham Rahta Hai.

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2 Line Shayari

मैं थक गया था, परवाह करते करते
जब से ला-परवाह हुआ हूँ, आराम सा है

Main thak gaya tha, paravaah karate karate
Jab se la-paravaah hua hoon, aaraam sa hai

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“न जाने किसने पढ़ी है मेरे हक़ में दुआ,
आज तबियत में जरा आराम सा है!”

“na jaane kisane padhee hai mere haq mein dua,
Aaj tabiyat mein jara aaraam sa hai!”

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किसकी खातिर अब तु धड़कता है ऐ दिल

किसकी खातिर अब तु धड़कता है ऐ दिल,
अब तो कर आराम, कहानी खत्म हुई !!

Kisakee khaatir ab tu dhadakata hai ai dil,
Ab to kar aaraam, kahaanee khatm huee !!

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Frequently Asked Questions

इतवार के आराम पर कोई मजेदार शायरी है?
हाँ, एक हल्की-फुल्की शायरी में लिखा है 'दीदी को नमस्ते भैया को प्रणाम, इतवार को करना फुल आराम।' यह फनी शायरी जैसे अंदाज़ में रविवार की छुट्टी और आराम की खुशी को मजाकिया तरीके से बयां करती है।
मेहनत के जज़्बे को आराम न करने से कैसे जोड़ा गया है?
शायरी में लिखा है 'अपने मंसूबों को नाकाम नहीं करना है, मुझको इस उम्र में आराम नहीं करना है।' यह जोश और लक्ष्यों को पाने की जिद दिखाती है, जहाँ इंसान आराम की बजाय मेहनत को चुनता है।
गंगा किनारे सुकून पाने वाली आराम शायरी कौन सी है?
एक शायरी में लिखा है 'जिन्दगी की रफ्तार को कुछ समय के लिए लगाम दो, सुकून कभी चाहिए तो गंगा की गोद में आराम लो।' यह भागदौड़ भरी जिंदगी से थोड़ी देर रुककर गंगा किनारे शांति ढूंढने की सलाह देती है।
बेआराम दिल की शायरी में क्या दर्द छिपा है?
शायरी कहती है 'कुछ रोज़ दिल अपना सख्त बे आराम रहता है, इसी हालत में लेकर सुबह से तो शाम रहता है।' यह दिल शायरी जैसे भाव में उस बेचैनी को दिखाती है जब मन दिनभर किसी उलझन में उलझा रहता है।
आराम शायरी किन मौकों पर सबसे ज्यादा शेयर की जाती है?
यह शायरी छुट्टी के दिनों, हल्के-फुल्के फनी कैप्शन और सुकून की तलाश जैसे मौकों पर शेयर की जाती है। कुछ में हसबैंड वाइफ शायरी जैसा घरेलू, रिश्तेदारी भरा मजाकिया अंदाज़ भी झलकता है।

Ganga ki god mein sukoon dhoondna ho ya kahani khatam hone par dil ka aakhir mein aaram paana, har line thake hue man ko thodi rahat deti hai. Judi hui shayari Baatein aur Dil mein bhi padhein.