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Vyast Shayari

Vyast rehna bhi kabhi akelepan se bachne ka tareeka hota hai.

Vyast shayari mein khud ko akelepan mein pighla kar vyast rakhne ki baat hoti hai, to kabhi kisi ke intezaar mein vyastata ka bahana banaya jaata hai. Isi intezaar mein Intezaar shayari bhi padhein.

Vyast Shayari - Zindagi Ki Masroofiyat Ke Sher
किस्मत से शादी हो गयी तेरी आज

किस्मत से शादी हो गयी तेरी आज
कल से तू व्यस्त हो जायेगा नयी खुशियों के साथ

Kismat se shaadee ho gayee teree aaj
Kal se too vyast ho jaayega nayee khushiyon ke saath

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जिसको याद करके आप रो रहे हो...
वो किसी और को खुश करने में व्यस्त है...

Jisako yaad karake aap ro rahe ho...
Vo kisee aur ko khush karane mein vyast hai...

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एकांत को पिघला कर उसमें व्यस्त रहता हूँ...
इन्सान हूँ मुरझा कर भी मस्त रहता हूँ....

Ekaant ko pighala kar usamen vyast rahata hoon...
Insaan hoon murajha kar bhee mast rahata hoon....

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कुछ व्यस्त हूँ, थोड़ा इन्तजार करो,
मैं तुम्हें फिर बेहद याद करूँगा.

Kuchh vyast hoon, thoda intajaar karo,
Main tumhen phir behad yaad karoonga.

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2 Line Shayari

थोड़ी सी तु अस्त-व्यस्त है
फिर भी.. *"जिंदगी"* तु जबर्दस्त है

Thodee see tu ast-vyast hai
Phir bhee.. *"jindagee"* tu jabardast hai

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Frequently Asked Questions

किस्मत से शादी होने पर नई खुशियों के साथ व्यस्त हो जाने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"किस्मत से शादी हो गयी तेरी आज कल से तू व्यस्त हो जायेगा नयी खुशियों के साथ" — यह शायरी हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहती है कि किस्मत से आज शादी हो गई, तो कल से नई खुशियों के साथ व्यस्त हो जाओगे।
जिसे याद करके रो रहे हो उसके किसी और को खुश करने में व्यस्त होने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"जिसको याद करके आप रो रहे हो... वो किसी और को खुश करने में व्यस्त है..." — यह शायरी कहती है कि जिसे याद करके तुम रो रहे हो, वह किसी और को खुश करने में व्यस्त है।
एकांत को पिघलाकर उसमें व्यस्त रहने और मुरझाकर भी मस्त रहने की बात कहने वाली शायरी कौन सी है?
"एकांत को पिघला कर उसमें व्यस्त रहता हूँ... इन्सान हूँ मुरझा कर भी मस्त रहता हूँ...." — यह शायरी कहती है कि एकांत को पिघला कर उसमें व्यस्त रहता हूँ, इंसान हूँ इसलिए मुरझा कर भी मस्त रहता हूँ।
थोड़ा व्यस्त होने के बावजूद इंतज़ार करने को कहकर फिर बेहद याद करने का वादा करने वाली शायरी कौन सी है?
"कुछ व्यस्त हूँ, थोड़ा इन्तजार करो, मैं तुम्हें फिर बेहद याद करूँगा." — यह शायरी कहती है कि कुछ व्यस्त हूँ, थोड़ा इंतज़ार करो, मैं तुम्हें फिर बेहद याद करूँगा।
Vyast से जुड़ी और शायरी कहाँ पढ़ें?
आप Had, Intezaar, Kal और Khush शायरी पढ़ सकते हैं।

Ek sher yahan yeh bhi kehta hai ki thodi si ast-vyast zindagi bhi apni jagah zabardast hoti hai. Aage 2 Line aur Had shayari bhi padhein.