सेवा अनमोल वचन
दूसरों की सेवा में खुद को पाना।
सत्य को विशाल वृक्ष मानकर उसकी लगातार सेवा करने की बात हो या देश को परिवार मानकर काम करने की, यहां के वचन Dharm और सेवा को एक ही राह पर रखते हैं।
प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में
एक मंत्र होना चाहिए…
मंत्र में गजब की सकती होती है!
फिर वो ईश्वर की आराधना का मंत्र हो
सेवा कार्य हो या फिर जीवन का लक्ष्य!
सत्य एक विशाल वृक्ष है, उसकी ज्यों-ज्यों सेवा की जाती है,
त्यों-त्यों उसमे अनेक फल आते हुए नजर आते है, उनका अंत ही नहीं होता...
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धर्म और व्यावहारिक जीवन अलग नहीं हैं। सन्यास लेना जीवन का परित्याग करना नहीं है। असली भावना सिर्फ अपने लिए काम करने की बजाये देश को अपना परिवार बना मिलजुल कर काम करना है। इसके बाद का कदम मानवता की...
