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न्याय पर अनमोल वचन

सच्चे न्याय, साहस और धैर्य पर आधारित प्रेरक विचार।

कोई भी समाज असल में कैसा है, यह सबसे कमज़ोर और लाचार लोगों के प्रति उसके रवैये से ही उजागर होता है, न कि उसकी शक्ति या संसाधनों से। ताक़त और पद को परे रखकर हर मामले में केवल सत्य पर टिके रहना ही वास्तविक न्याय की पहचान मानी जाती है।

किसी समाज की सच्ची पहचान इस बात से होती है कि वह अपने सबसे कमज़ोर और असहाय सदस्यों के साथ कैसा न्याय करता है।

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न्याय में देरी पीड़ादायक होती है, परंतु न्याय का पूरी तरह न मिलना उससे भी अधिक पीड़ादायक है; इसलिए आशा कभी मत छोड़ो।

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सच्चा न्याय वह है जो निर्णय लेते समय यह नहीं देखता कि सामने वाला व्यक्ति शक्तिशाली है या निर्धन; वह केवल सत्य को देखता है।

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जो व्यक्ति अन्याय को होते देखकर भी मौन रह जाता है, वह अनजाने में ही उस अन्याय का साझेदार बन जाता है।

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Love Shayari

न्याय की देवी की आँखों पर बंधी पट्टी यह दर्शाती है कि सच्चा न्याय केवल तथ्यों को देखता है, चेहरे या पद को नहीं।

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न्याय की लड़ाई कभी जल्दी समाप्त नहीं होती; इसमें साहस के साथ-साथ वर्षों तक डटे रहने का धैर्य भी आवश्यक होता है।

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Frequently Asked Questions

How do these lines judge a society's true character?
By how it treats its weakest and most helpless members - that treatment, one line argues, reveals a society's real identity.
What does the blindfold on the figure of Lady Justice represent here?
That true justice looks only at facts, not at someone's face or position - impartiality is the whole point of the symbol.
Is staying silent about injustice treated as neutral in these samples?
No - someone who watches injustice happen and stays quiet becomes an unwitting partner in it, one line says. Related lines sit under Truth.

अन्याय को चुपचाप देखते रहना भी किसी न किसी रूप में उसमें भागीदार बनने जैसा माना गया है, इसलिए आवाज़ उठाने का साहस बनाए रखना ज़रूरी है। न्याय मिलने में देरी भले कष्टदायक हो, पर उम्मीद छोड़ने से मन की शांति भी टूट जाती है।