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Sazaa Shayari

The punishment love hands out quietly.

Sazaa shayari turns heartbreak into a courtroom of one — punishments handed out for trusting too easily, loving too much, or breaking a heart that didn't deserve it. It sits close to Dil Shayari in mood.

Sazaa Shayari - Mohabbat Ki Sazaa Wali Shayari

भरोसा तोड़ने वाले के लिए बस यही एक सज़ा काफ़ी है...
उसको ज़िन्दगी भर के लिए ख़ामोशी तोहफ़ेे में दे दी जाए...!!

Bharosa todane vaale ke lie bas yahee ek saza kaafee hai...
Usako zindagee bhar ke lie khaamoshee tohafee mein de dee jae...!!

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नयी हवाओं की सोहबत बिगाड़ देती हैं
कबूतरों को खुली छत बिगाड़ देती हैं

जो जुर्म करते है इतने बुरे नहीं होते
सज़ा न देके अदालत बिगाड़ देती हैं

Nai hawaon ki sohabat bigaad deti hain
Kabootron ko khul cchat bigaad deti hain

Jo jurm karte hain itne bure nahi hote
Sazaa na de ke adaalat bigaad deti hain

Rahat Indori

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दिल कहता है उसे फिर सज़ा दी जाए

दिल कहता है उसे फिर सज़ा दी जाए...
अक़्ल कहती है नही बात दबा दी जाए...!!

Dil kahata hai use phir saza dee jae...
Aql kahatee hai nahee baat daba dee jae...!!

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कसूर तो बहुत किये थे ज़िन्दगी में

कसूर तो बहुत किये थे ज़िन्दगी में,
पर सज़ा वहाँ मिली जहाँ बेकुसूर थे हम

Kasoor to bahut kiye the zindagee mein,
Par saza vahaan milee jahaan bekusoor the ham

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ADA Shayari

ख़्वाहिशों का कैदी हूँ मैं,
मुझे हकीक़ते सज़ा देती है..
आसान चीजो को शौक नहीं,
मुझे मुश्किलें ही मज़ा देती है..

Khvaahishon ka kaidee hoon main,
Mujhe hakeeqate saza detee hai..
Aasaan cheejo ko shauk nahin,
Mujhe mushkilen hee maza detee hai..

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बनना पड़ा है आप ही अपना ख़ुदा मुझे
किस कुफ़्र की मिली है भला ये सज़ा मुझे

Banana pada hai aap hee apana khuda mujhe
Kis kufr kee milee hai bhala ye saza mujhe

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क्यों न सज़ा मिलती हमें मोहब्बत में,
आख़िर हमने भी बहोत दिल तोड़े थे उस शख्स की ख़ातिर...

Kyon na saza milatee hamen mohabbat mein,
Aakhir hamane bhee bahot dil tode the us shakhs kee khaatir...

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जो दे रहे हो हमें ये तड़पने की सज़ा तुम
हमारे लिए ये सज़ा ऐ मौत से भी बदतर है

Jo de rahe ho hamen ye tadapane kee saza tum
Hamaare lie ye saza ai maut se bhee badatar hai

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मुझ पे हँसने की ज़माने को सज़ा दी जाए

मुझ पे हँसने की ज़माने को सज़ा दी जाए...!
मैं बहुत खुश हूँ ये अफ़वाह..उड़ा दी जाए

Mujh pe hansane kee zamaane ko saza dee jae...!
Main bahut khush hoon ye afavaah..uda dee jae

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Dil Shayari

वापस ले लो वो सारी यादे, तड़प और आंसु,
जुर्म कोई नही हे मेरा तो फिर ये सज़ा कैसी?

Vaapas le lo vo saaree yaade, tadap aur aansu,
Jurm koee nahee he mera to phir ye saza kaisee?

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मुझे मंज़ूर थे वक़्त के हर सितम मगर

मुझे मंज़ूर थे वक़्त के हर सितम मगर,
तुमसे बिछड़ जाना ये सज़ा कुछ ज्यादा हो गई !!

Mujhe manzoor the vaqt ke har sitam magar,
Tumse bichhad jaana ye saza kuchh jyaada ho gaee !!

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Frequently Asked Questions

"सज़ा" शायरी में भरोसा तोड़ने वाले के लिए किस तरह की सज़ा बताई गई है?
इस शायरी में सज़ा शारीरिक नहीं, भावनात्मक है — "भरोसा तोड़ने वाले के लिए बस यही एक सज़ा काफ़ी है, उसको ज़िन्दगी भर के लिए ख़ामोशी तोहफ़ेे में दे दी जाए" पंक्ति बताती है कि धोखा देने वाले को हमेशा के लिए चुप्पी और दूरी ही सबसे बड़ी सज़ा है, जो शब्दों से ज़्यादा गहरी चोट करती है।
सज़ा शायरी में अदालत और इंसाफ को लेकर क्या तंज़ कसा गया है?
"जो जुर्म करते है इतने बुरे नहीं होते, सज़ा न देके अदालत बिगाड़ देती हैं" पंक्तियों में यह शायरी बताती है कि गुनहगार से ज़्यादा दोष उस व्यवस्था का है जो वक़्त पर सज़ा नहीं देती, ठीक वैसे ही जैसे नयी हवाओं की सोहबत खुली छत पर बैठे कबूतरों को बिगाड़ देती है।
सज़ा शायरी में दिल और अक्ल के बीच किस उलझन को दिखाया गया है?
"Dil कहता है उसे फिर सज़ा दी जाए, अक़्ल कहती है नही बात दबा दी जाए" पंक्ति उस आंतरिक द्वंद्व को दिखाती है जहाँ भावनाएँ बदला चाहती हैं मगर समझदारी चुप रहने की सलाह देती है — यही उलझन कई प्रेम-शायरियों की जान होती है।
बेकुसूर होकर भी सज़ा मिलने का दर्द इस शायरी में कैसे बयां हुआ है?
"कसूर तो बहुत किये थे ज़िन्दगी में, पर सज़ा वहाँ मिली जहाँ बेकुसूर थे Ham" पंक्ति ज़िंदगी की उस विडंबना को दिखाती है जहाँ सच्ची गलतियों की बजाय निर्दोष पलों में ही सबसे बड़ी सज़ा मिल जाती है — यह भाव कई Love शायरियों में भी दोहराया जाता है।
सज़ा शायरी का अंदाज़ इतना खामोश और गहरा क्यों रखा जाता है?
इन पंक्तियों का अंदाज़ जानबूझकर शांत रखा जाता है क्योंकि असली सज़ा शोर में नहीं, चुप्पी में छुपी होती है — "उसको ज़िन्दगी भर के लिए ख़ामोशी तोहफ़ेे में दे दी जाए" जैसी Hindi पंक्तियाँ बिना गुस्सा दिखाए भी गहरा असर छोड़ जाती हैं।

Some lines protest their innocence entirely, calling the punishment worse than the crime itself. Continue with ADA Shayari or Ham Shayari for more of the same ache.