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Pradhan Shayari

Gaon ka pradhan wahi jo har awaaz sune.

Pradhan shayari mein gaon ke chunav se pehle ki raat ka josh aur ummeedon ka mela dikhai deta hai. Isi mahaul mein Chunav shayari bhi padhein.

Pradhan Shayari - Gaon Ke Chunav Ke Hindi Sher

हर-चंद एतबार में धोके भी हैं मगर
ये तो नहीं किसी पे भरोसा किया न जाए !!

Har-chand etabaar mein dhoke bhee hain magar
Ye to nahin kisee pe bharosa kiya na jae !!

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आप भी सुनिए नेता जी क्या-क्या कह रहे हैं,
दौरे तरक्की में भी दर्द गरीब ही सह रहे हैं !!

Aap bhi suniye neta jee kya-kya kah rahe hain,
Daure tarakkee mein bhee dard gareeb hee sah rahe hain !!

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बड़ा महँगा हर सामान का भाव हो जाता है,
जब हमारे देश में सम्पन्न चुनाव हो जाता है !!

Bada mahanga har saman ka bhaav ho jaata hai,
Jab hamaare desh mein sampann chunaav ho jaata hai !!

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जो इंसान जनता की सुने,
उसे ही आप प्रधान चुने.

Jo insaan janata kee sune,
Use hee aap pradhaan chune.

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Chunav Shayari

आजकल रात को जश्न मनाता मेरा गाँव है,
क्योंकि कुछ दिन में प्रधान का चुनाव है.

Aajakal raat ko jashn manaata mera gaanv hai,
Kyonki kuchh din mein pradhaan ka chunaav hai.

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आत्महत्या की चिता पर देखकर किसान को

आत्महत्या की चिता पर देखकर किसान को
नींद कैसे आ रही हैं देश के प्रधान को.

Aatmahatya kee chita par dekhakar kisaan ko
Neend kaise aa rahee hain desh ke pradhaan ko.

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Frequently Asked Questions

प्रधान (नेता) पर आधारित इस शायरी कलेक्शन का मुख्य भाव क्या है?
यह कलेक्शन नेताओं के वादों और आम गरीब जनता की सच्चाई के बीच के फासले को उजागर करता है। जैसे लिखा है, 'आप भी सुनिए नेता जी क्या-क्या कह रहे हैं, दौरे तरक्की में भी दर्द गरीब ही सह रहे हैं' — यह तरक्की के दावों पर सीधा तंज है।
सही प्रधान चुनने को लेकर इसमें क्या संदेश है?
एक शायरी साफ कहती है, 'जो इंसान जनता की सुने, उसे ही आप प्रधान चुने' — यानी असली नेता वही है जो लोगों की बात सुने। यह भाव Janta शायरी की भावना से भी जुड़ता है।
क्या यहां चुनाव के समय भरोसे को लेकर कोई बात कही गई है?
हां, एक पंक्ति कहती है 'हर-चंद एतबार में धोके भी हैं मगर ये तो नहीं किसी पे भरोसा किया न जाए' — नेताओं से मिले धोखे के बावजूद पूरी तरह भरोसा छोड़ना सही नहीं, यही संदेश यहां भी दोहराया गया है।
चुनाव और महंगाई का ज़िक्र इस कलेक्शन में कैसे आता है?
इसमें भी वही पंक्ति शामिल है — 'बड़ा महँगा हर सामान का भाव हो जाता है, जब हमारे देश में सम्पन्न चुनाव हो जाता है' — जो दिखाती है कि चुनाव और आम जनता की जेब पर पड़ने वाला असर कितना जुड़ा हुआ है। Election कलेक्शन में इस तरह की और शायरियां मिलेंगी।
यह प्रधान शायरी किसानों और देश की स्थिति से भी जुड़ती है क्या?
यह कलेक्शन मूल रूप से नेतृत्व और जनता के रिश्ते पर केंद्रित है, इसलिए किसानों की समस्याओं और देश की स्थिति पर बात करने वालों को Kisaan और Desh कलेक्शन भी पढ़ने चाहिए, जो इसी सामाजिक-राजनीतिक भाव को आगे बढ़ाते हैं।

Ek sher yahan seedhi si baat kehta hai, jo insaan janta ki sune usi ko pradhan chuna jaana chahiye. Aage Desh aur Din shayari bhi padhein.